कनसास सिटी (मिसौरी):
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के महाकुंभ के आगाज से ठीक पहले अमेरिका से एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली खबर सामने आई है। टूर्नामेंट के दौरान इंग्लैंड फुटबॉल टीम के आधिकारिक बेस कैंप बनाए गए मिसौरी के कनसास सिटी में एक अज्ञात हमलावर ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस अचानक हुए हमले में नौ लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि हुई है। यह वारदात इंग्लैंड टीम के तय होटल और बेस कैंप से महज 10 मिनट की दूरी पर हुई है, जिसने विश्व कप की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शनिवार सुबह थर्रा उठा कनसास सिटी
कनसास सिटी पुलिस डिपार्टमेंट से मिली जानकारी के मुताबिक, यह वारदात बीते शनिवार की सुबह करीब 4 बजे घटी। जैसे ही पुलिस अधिकारियों ने गोलियों की आवाज सुनी, वे तुरंत मौके के लिए रवाना हो गए। घटना स्थल पर पहुंचते ही पुलिस को वहां चारों तरफ भगदड़ मची हुई मिली। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सबसे पहले गंभीर रूप से घायल 3 महिलाओं को अस्पताल पहुंचाया, जिसके बाद घायलों की कुल संख्या 9 तक पहुंच गई। राहत की बात यह है कि सभी घायलों का इलाज जारी है और किसी की जान को खतरा नहीं है। फिलहाल पुलिस ने किसी को हिरासत में नहीं लिया है, लेकिन पूरे इलाके में पेट्रोलिंग और सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
फ्लोरिडा में थी इंग्लैंड की टीम, बाल-बाल बची
जिस वक्त कनसास सिटी में यह खूनी खेल खेला जा रहा था, उस वक्त राहत की बात यह थी कि इंग्लैंड की फुटबॉल टीम वहां मौजूद नहीं थी:
फ्लोरिडा में प्रैक्टिस: इंग्लैंड के खिलाड़ी इस समय फ्लोरिडा के पाल्म बीच पर वर्ल्ड कप के कड़े अभ्यास सत्र (प्रैक्टिस) में व्यस्त हैं।
13 जून को आगमन: तय शेड्यूल के मुताबिक, ब्रिटिश टीम को 13 जून को कनसास सिटी पहुंचना है।
वॉर्म-अप मैचों में व्यस्त है टीम
फीफा वर्ल्ड कप 2026 की तैयारियों के सिलसिले में इंग्लैंड की टीम इस समय शानदार फॉर्म में दिख रही है। अपने पहले वॉर्म-अप मैच में टीम ने न्यूजीलैंड को 1-0 से मात दी थी। अब बुधवार को इंग्लैंड का सामना अपने दूसरे वॉर्म-अप मैच में कोस्टा रिका से होने जा रहा है, जिसके तुरंत बाद टीम को इसी कनसास सिटी के बेस कैंप में शिफ्ट होना है।
यद्यपि अमेरिका में मास फायरिंग की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन विश्व कप जैसे सबसे बड़े वैश्विक खेल आयोजन के ठीक पहले और वो भी एक दिग्गज टीम के बेस कैंप के इतने करीब ऐसी वारदात होना, फीफा (FIFA) और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ा 'वेक-अप कॉल' है।