रक्षा क्षेत्र में महाडील की तैयारी: ₹23,000 करोड़ में 300 से अधिक 'K9 वज्र' तोपें खरीदेगी भारतीय सेना

दशकों के सबसे बड़े आर्टिलरी आधुनिकीकरण से थर्राएंगे दुश्मन; चीन और पाकिस्तान सीमा पर अभेद्य होगी भारत की मारक क्षमता।

10 Jun 2026  |  115

 

 

नई दिल्ली:

भारतीय सेना अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता और युद्धक्षेत्र में त्वरित गतिशीलता (तेज मोबाइल आर्टिलरी ताकत) को एक नए शिखर पर ले जाने की तैयारी में है। सेना द्वारा 300 से अधिक अतिरिक्त K9 वज्र (K9 Vajra) सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर तोपों की खरीद के लिए करीब 23,000 करोड़ रुपये का महाप्रस्ताव तैयार किया गया है। रक्षा क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, यह संभावित सौदा पिछले कई दशकों में भारतीय सेना का सबसे बड़ा आर्टिलरी (तोपखाना) ऑर्डर माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस महाप्रस्ताव को इसी सप्ताह रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।

'मेक इन इंडिया' को पंख: 500 के पार पहुंचेगी 'वज्र' की संख्या

इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद यह विशाल ऑर्डर भारतीय रक्षा दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को मिलने की पूरी संभावना है। L&T दक्षिण कोरियाई कंपनी 'हनवा एयरोस्पेस' (Hanwha Aerospace) के साथ तकनीकी सहयोग के जरिए भारत में ही इन तोपों का निर्माण करती है।

इस नई डील के जमीन पर उतरते ही भारतीय सेना के बेड़े में K9 वज्र तोपों की कुल संख्या 500 के पार पहुंच जाएगी, जो सेना की आर्टिलरी आधुनिकीकरण योजना में एक मील का पत्थर साबित होगा।

क्यों इतनी खास है 'K9 वज्र'?

विनाशक मारक क्षमता: यह 155mm/52-कैलिबर की ट्रैक्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर तोप है, जो 40 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर बैठे दुश्मन को सटीक निशाना बना सकती है।

'शूट एंड स्कूट' तकनीक: इसकी सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसकी री-पोजीशनिंग स्पीड है। यह दुश्मन पर गोला दागने के तुरंत बाद अपनी लोकेशन बदल लेती है, जिससे दुश्मन के लिए काउंटर-अटैक करना नामुमकिन हो जाता है।

रफ़्तार और गतिशीलता: पारंपरिक तौर पर खींचकर ले जाई जाने वाली (टो की जाने वाली) तोपों के मुकाबले यह ट्रैक्ड तोप युद्धक्षेत्र के उबड़-खाबड़ रास्तों पर बेहद तेजी से मूव कर सकती है।

चीन और पाकिस्तान सीमा पर बढ़ेगा भारत का दबदबा

शुरुआत में इन तोपों को मुख्य रूप से पश्चिमी सीमा के रेगिस्तानी इलाकों (पाकिस्तान बॉर्डर) के लिए उपयुक्त माना गया था। लेकिन लद्दाख में 'कोल्ड-वेदर वर्जन' (अत्यधिक कड़ाके की ठंड) के सफल परीक्षण के बाद अब इन्हें चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भी तैनात किया जाएगा। हाई-एल्टीट्यूड (अत्यधिक ऊंचाई वाले) क्षेत्रों में 'वज्र' की तैनाती से उत्तरी मोर्चे पर भारतीय सेना की फायरपावर कई गुना बढ़ जाएगी।

सफरनामा: 2017 से अब तक

2017 (पहली डील): ₹4,500 करोड़ में 100 तोपों का पहला ऑर्डर। L&T ने समय से पहले 2021 तक डिलीवरी पूरी की।

दिसंबर 2023 (दूसरी डील): रक्षा मंत्रालय ने ₹7,600 करोड़ की लागत से 100 अतिरिक्त K9 वज्र तोपों को मंजूरी दी।

अब (प्रस्तावित महाडील): ₹23,000 करोड़ में 300+ तोपों की खरीद की तैयारी।

संभावित टाइमलाइन पर एक नज़र

समयचरण
जून 2026रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) के सामने प्रस्ताव पेश होने की उम्मीद।
2026 के अंत तकरक्षा मंत्रालय और सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) से अंतिम मंजूरी की संभावना।
2027 की शुरुआतL&T और हनवा एयरोस्पेस के साथ आधिकारिक कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर।
2027-2028उत्पादन शुरू और सेना को पहली खेप की डिलीवरी।
2030 तकसभी 300+ नई तोपों की चरणबद्ध डिलीवरी पूरी करने का लक्ष्य।

रणनीतिक निष्कर्ष:

चीन और पाकिस्तान सीमा पर तेजी से बदलते सुरक्षा समीकरणों को देखते हुए इस डील को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। यह न केवल भारतीय सेना को अत्याधुनिक ताकत देगी, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' और घरेलू रक्षा विनिर्माण (Defence Manufacturing) के संकल्प को भी नया आसमान देगी।

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