जियोपॉलिटिकल रार में फंसा स्टारलिंक का 'तार'! ईरान युद्ध के साए में भारत सरकार ने रोकी एलन मस्क को मंजूरी

विदेशी सैटेलाइट नेटवर्क पर नई दिल्ली को भरोसा नहीं! सुरक्षा चिंताओं के चलते गृह मंत्रालय ने खींचे हाथ, स्पेसएक्स (SpaceX) ने खबरों को बताया भ्रामक।

10 Jun 2026  |  89

 

बिजनेस डेस्क। भारत में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट शुरू करने का सपना देख रही एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक (Starlink) की राहें आसान नहीं नजर आ रही हैं। ब्लूमबर्ग की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए स्टारलिंक को मिलने वाली अंतिम सिक्योरिटी क्लीयरेंस (सुरक्षा मंजूरी) पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस पूरे मामले के तार सीधे तौर पर ईरान युद्ध (Iran War) और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव से जुड़े हैं।

ईरान युद्ध और स्टारलिंक टर्मिनल्स: क्या है पूरा विवाद?

रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों की चिंता की सबसे बड़ी वजह यह है कि ईरान में आधिकारिक तौर पर लाइसेंस न होने के बावजूद, वहां चल रहे युद्ध/संघर्ष के दौरान अमेरिकी ताकतों द्वारा स्टारलिंक के सैटेलाइट टर्मिनल्स का इस्तेमाल किया गया।

इस घटना ने नई दिल्ली में बैठे नीति-निर्माताओं और सुरक्षा अधिकारियों को सतर्क कर दिया है। भारत सरकार को यह डर सता रहा है कि यदि भविष्य में किसी वैश्विक तनाव या भू-राजनीतिक संकट की स्थिति बनती है, तो भारत सरकार एक अमेरिकी ओनरशिप (US-Owned) वाले कम्युनिकेशन ऑपरेटर पर कितना नियंत्रण रख पाएगी?

भारतीय अधिकारियों ने स्टारलिंक से मांगे कड़े जवाब

स्टारलिंक ने करीब एक साल पहले भारत में GMPCS (ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट) लाइसेंस हासिल कर लिया था, जिससे उसे कमर्शियल एग्रीमेंट और जमीनी तैयारी करने की अनुमति मिल गई थी। लेकिन जमीनी स्तर पर सेवाएं शुरू करने के लिए गृह मंत्रालय की अंतिम सुरक्षा मंजूरी अनिवार्य है।

अधिकारियों का तीखा सवाल: "अगर भविष्य में किसी वैश्विक संकट के दौरान विदेशी सरकारें कोई अलग मांग रखती हैं, तो अपनी वैश्विक मौजूदगी और अमेरिकी स्वामित्व के बावजूद स्टारलिंक भारतीय सुरक्षा आवश्यकताओं और संप्रभुता के पालन की शत-प्रतिशत गारंटी कैसे देगी?"

देश के पूरे सैटेलाइट सेक्टर पर गहराया असर (जियो-एयरटेल भी रडार पर)

ईरान संकट के बाद भारत सरकार केवल स्टारलिंक ही नहीं, बल्कि पूरे बड़े सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर को लेकर बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रही है:

स्पेक्ट्रम प्राइसिंग पर ब्रेक: डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन्स (DoT) ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम प्राइसिंग का फ्रेमवर्क तो फाइनल कर लिया है, लेकिन सुरक्षा चिंताओं के कारण इसे अभी तक केंद्रीय कैबिनेट (Union Cabinet) के पास मंजूरी के लिए नहीं भेजा गया है।

भारतीय दिग्गजों की भी बढ़ी जांच: रिलायंस जियो (Jio) और भारती एयरटेल (Airtel) ने भी यूरोपीय सैटेलाइट कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की है। अब सरकार इन घरेलू दिग्गजों के विदेशी समझौतों की भी बारीक और कड़ी जांच कर रही है, ताकि संकट के समय देश का सुरक्षा ढांचा बाहरी ताकतों के हाथ न लगे।

स्टारलिंक ने रिपोर्ट को नकारा: 'बातचीत अभी भी जारी'

इस बीच, विवाद बढ़ता देख स्टारलिंक की ओर से एक आधिकारिक स्पष्टीकरण भी सामने आया है। स्टारलिंक की बिजनेस ऑपरेशंस वाइस प्रेसिडेंट लॉरेन ड्रेयर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा:

"अनाम स्रोतों पर आधारित मंजूरी रुकने की ये कहानियां भ्रामक और निराधार हैं। स्टारलिंक भारत सरकार के साथ लगातार रचनात्मक और सकारात्मक बातचीत कर रहा है। हमने सरकार की सभी नियामक और अनुपालन प्रक्रियाओं को पारदर्शी तरीके से पूरा किया है और हम अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।"

निष्कर्ष

भले ही स्टारलिंक इन दावों को खारिज कर रहा हो, लेकिन एक बात साफ है—बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत सरकार विदेशी नियंत्रण वाले संचार बुनियादी ढांचे (Communications Infrastructure) पर निर्भर रहने का कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती। मस्क की कंपनी के आगामी नैस्डैक (Nasdaq) आईपीओ लिस्टिंग से ठीक पहले भारत जैसे विशाल बाजार में यह गतिरोध स्पेसएक्स के लिए एक बड़ा नीतिगत इम्तिहान साबित हो सकता है।

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