बिजनेस डेस्क। भारतीय सर्राफा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट तक, इस समय सोने और चांदी की कीमतों में एक बड़ा और चौंकाने वाला क्रैश (Gold-Silver Crash) देखने को मिल रहा है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण कीमती धातुओं पर दबाव इस कदर बढ़ा है कि घरेलू बाजार (MCX) पर सोना ₹1.50 लाख के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया है, जबकि चांदी भी ₹2.35 लाख के नीचे गोता लगा चुकी है।
आइए समझते हैं कि इस बड़ी गिरावट के पीछे के मुख्य कारण क्या हैं और बाजार के दिग्गज एक्सपर्ट इस पर क्या राय दे रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार (MCX) के ताजा भाव
वैश्विक बाजार (COMEX) में सोना करीब 1.25% टूटकर 4,232 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया है, जबकि चांदी फिसलकर 65 डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है। भारतीय बाजार में इसका सीधा असर देखने को मिला:
सोना (Gold Rate): MCX पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1.48% की भारी गिरावट के साथ ₹1,50,180 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। पिछले सत्र के ₹1,52,443 के मुकाबले कारोबार के दौरान यह ₹1,49,500 के निचले स्तर तक भी चला गया।
चांदी (Silver Rate): जुलाई डिलीवरी वाली चांदी लगभग 1% टूटकर ₹2,36,284 प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई। कारोबार के दौरान चांदी ने ₹2,33,400 का निचला स्तर छुआ, जबकि पिछले सत्र में यह ₹2,38,528 पर बंद हुई थी।
आखिर क्यों आंधी की तरह टूट रहे हैं दाम? एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के 4 बड़े विश्लेषण
बाजार में मचे इस हाहाकार को लेकर सेबी रजिस्टर्ड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने पूरी तस्वीर साफ करते हुए 4 मुख्य कारणों और रणनीतियों पर बात की है:
1. डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों का डर
अनुज गुप्ता के मुताबिक, "इस महीने सोने में करीब 3.44% और चांदी में 11.32% की भारी गिरावट आ चुकी है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख है। बाजार को आशंका है कि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहेंगी, जिससे निवेशक सोने के बजाय डॉलर की तरफ भाग रहे हैं।"
इसके अलावा, फिजिकल डिमांड भी कमजोर पड़ी है; चीन ने पिछले महीने सिर्फ 8 टन सोना खरीदा, जबकि भारत में शादियों के सीजन के बावजूद फिजिकल गोल्ड की मांग में करीब 70% की भारी गिरावट देखी गई है।
2. गोल्ड ईटीएफ (ETF) से रिकॉर्ड निकासी
गिरावट को हवा देने का काम वैश्विक निवेशकों द्वारा गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ से लगातार पैसा निकालने ने किया है। लगातार चौथे सप्ताह गोल्ड ईटीएफ से निकासी हुई है, जिसके तहत लगभग 2.71 अरब डॉलर बाजार से बाहर निकल गए। साथ ही, शेयर और क्रिप्टो बाजार में गिरावट के कारण निवेशकों को 'मार्जिन कॉल' का सामना करना पड़ा, जिसकी भरपाई के लिए उन्होंने कमोडिटी बाजार में बिकवाली की।
3. क्या होंगे सोने-चांदी के नए टारगेट?
तकनीकी चार्ट (Technical Breakdown) पर भी दोनों धातुओं की स्थिति फिलहाल कमजोर दिख रही है। अनुज गुप्ता के अनुसार आगामी हफ्तों में ये नए सपोर्ट स्तर देखने को मिल सकते हैं:
सोना: अंतरराष्ट्रीय बाजार में $4,100 से $4,000, जो भारतीय बाजार में ₹1.22 लाख प्रति 10 ग्राम का स्तर हो सकता है।
चांदी: $60 से $56, जो भारतीय करेंसी में ₹1.71 लाख प्रति किलोग्राम तक का मजबूत सपोर्ट दिखा रहा है।
4. निवेशकों के लिए सलाह: अभी खरीदें या रुकें?
अनुज गुप्ता का मानना है कि अगले 2 से 3 महीने तक सोने-चांदी पर यह दबाव बना रह सकता है। हालांकि, लंबी अवधि (Long-term) के निवेशकों के लिए घबराने की बात नहीं है।
एक्सपर्ट टिप: "बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव को देखते हुए एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय हर गिरावट पर चरणबद्ध खरीदारी (SIP मोड में बाइंग) की रणनीति अपनाएं। आगामी त्योहारी सीजन, केंद्रीय बैंकों की वापसी और भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना के चलते लंबी अवधि में सोना-चांदी दोबारा शानदार रिकवरी दिखाएंगे।"
निष्कर्ष: यदि आप एक शॉर्ट-टर्म ट्रेडर हैं, तो फिलहाल बाजार के जोखिमों से सावधान रहें। लेकिन अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो सोने और चांदी में आ रही यह गिरावट आपके लिए पोर्टफोलियो को मजबूत करने का एक बेहतरीन अवसर साबित हो सकती है।