"तुम्हारे हथियार हमारे खिलाफ इस्तेमाल होते हैं..." – रूस से तेल खरीद पर जयशंकर का पश्चिमी देशों को करारा जवाब

यूरोप के दोहरे रवैये को विदेश मंत्री ने किया बेनकाब; कहा- भारत ने कभी यूरोप की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाला, हमारी प्राथमिकता राष्ट्रीय हित।

12 Jun 2026  |  103

 

 

 

हेलसिंकी/नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर पश्चिमी देशों द्वारा लगातार की जा रही आलोचनाओं का भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अत्यंत आक्रामक और तार्किक जवाब दिया है। फिनलैंड में आयोजित प्रतिष्ठित 'कुल्तारंता टॉक्स' (Kultaranta Talks) कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने पश्चिमी देशों की 'चुनिंदा नैतिकता' और उनके दोहरे रवैये को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया।

विदेश मंत्री ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यूरोप के कई देश वर्षों से उन मुल्कों को हथियारों की आपूर्ति करते रहे हैं, जिनका इस्तेमाल सीधे भारत के खिलाफ हमलों में किया गया। इसके विपरीत, भारत ने कभी भी ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे यूरोप की सुरक्षा को कोई नुकसान पहुँचे। इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनन और यूएई की सहायक विदेश मंत्री लाना नुसेबेह भी मंच पर मौजूद थीं।

"कीमत और उपलब्धता हमारा पैमाना, परिस्थितियों ने हमें बाध्य किया"

जब मंच से रूस से तेल आयात को लेकर सवाल दागा गया, तो विदेश मंत्री जयशंकर ने दो टूक शब्दों में भारत की ऊर्जा नीति को स्पष्ट किया।

विदेश मंत्री का बड़ा बयान: "मैं बाजार में तेल की कीमत और उसकी उपलब्धता के आधार पर फैसला लेता हूँ। जब संकट शुरू हुआ, तब बाजार में उपलब्ध अधिकांश तेल रूसी था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यूरोपीय देश मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) से तेल खरीद रहे थे, जो कि पारंपरिक रूप से भारत का मुख्य सप्लायर था। ऐसे में यूरोपीय देशों के रुख के कारण पैदा हुई परिस्थितियों ने हमें एक खास दिशा में आगे बढ़ने के लिए धकेल दिया।"

यूरोप के ऐतिहासिक और नैतिक विरोधाभास पर उठाए सवाल

विदेश मंत्री ने वैश्विक सुरक्षा के मुद्दे पर यूरोप को आईना दिखाते हुए उसकी ऐतिहासिक और नैतिक विसंगतियों की ओर ध्यान खींचा। उन्होंने कहा:

भारतीय हथियारों से यूरोप पर कभी हमला नहीं: दुनिया के इतिहास में आज तक किसी भी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं किया गया है। भारत की वैश्विक छवि हमेशा शांतिप्रिय रही है।

यूरोपीय हथियारों से भारत को नुकसान: काश, मैं यूरोप के हथियारों के बारे में भी भारत के संदर्भ में ऐसा ही कह पाता! यूरोप ने हमेशा उन देशों को हथियार दिए जिन्होंने भारत की संप्रभुता को चोट पहुंचाई।

अमेरिका ने खुद किया था तेल खरीद जारी रखने का अनुरोध!

एक बेहद महत्वपूर्ण तथ्य को उजागर करते हुए एस. जयशंकर ने बताया कि वर्ष 2022 से पहले भारत रूस से बेहद सीमित मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता था। लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद, वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के उद्देश्य से खुद अमेरिका ने भारत से अनुरोध किया था कि वह रूस से तेल की खरीद जारी रखे।

उन्होंने आगे कहा कि रूस ने हमेशा एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत को समय पर ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की है। विदेश मंत्री ने पश्चिमी देशों की प्रतिबंध नीतियों के विरोधाभासी रवैये की आलोचना करते हुए साफ कर दिया कि जटिल वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के मामलों में भारत किसी के दबाव में नहीं आएगा और केवल अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखकर ही आगे बढ़ेगा।

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