नई दिल्ली।
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची आंतरिक बगावत का सीधा असर अब देश की संसद के समीकरणों पर दिखने लगा है। टीएमसी के बागी रुख के चलते संसद के दोनों सदनों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ताकत में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है।
बीजेपी सरकार देश में महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन बिलों को पास कराने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की पुरजोर कोशिश कर रही है। हालांकि, मौजूदा गणित बताता है कि टीएमसी के पाला बदलने के बाद एनडीए राज्यसभा में तो दो-तिहाई के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुँच जाएगा, लेकिन लोकसभा में वह अभी भी इस विशेष बहुमत से काफी दूर है।
उच्च सदन (राज्यसभा) का गणित: 163 के आंकड़े पर नजर
वर्तमान में राज्यसभा में एनडीए के पास 148 सांसद हैं। आगामी दौर के राजनीतिक बदलावों और चुनावों के बाद यह संख्या काफी मजबूत होने वाली है:
झारखंड और मिजोरम का गणित: इन राज्यों में हो रहे राज्यसभा चुनावों में निर्दलीय सीटों पर जीत हासिल करके एनडीए अपनी संख्या में 3 सीटें और जोड़ लेगा।
बंगाल से मिलेंगी सीटें: टीएमसी के तीन सांसदों के इस्तीफे और उसके बाद होने वाले उपचुनावों में पश्चिम बंगाल की तीनों सीटें एनडीए के खाते में जाने की उम्मीद है। इससे एनडीए का आंकड़ा 154 तक पहुँच जाएगा, जो दो-तिहाई बहुमत (163) से सिर्फ 9 कम होगा।
और इस्तीफों से मिलेगी ताकत: सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में उच्च सदन से टीएमसी के कुछ और सांसद इस्तीफा दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो एनडीए 163 का जादुई आंकड़ा छू सकता है, जिससे उसे हर तरह के संवैधानिक संशोधन बिल पास कराने की ताकत मिल जाएगी।
लेकिन... नवंबर में लग सकता है झटका
एनडीए की यह ताकत नवंबर तक थोड़ी कम हो सकती है। इसका कारण यह है कि नवंबर में उत्तर प्रदेश से 10 राज्यसभा सांसद रिटायर हो रहे हैं। यूपी विधानसभा में इस समय समाजवादी पार्टी (SP) की संख्या बेहतर है, जिसके चलते सपा राज्यसभा में कुछ सीटें वापस हासिल कर सकती है।
विपक्षी खेमे (इंडी गठबंधन) की स्थिति
वर्तमान में विपक्षी 'इंडी ब्लॉक' (INDIA Alliance) के पास केवल 64 सांसद बचे हैं। विपक्ष के कमजोर होने की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
डीएमके (DMK): 8 सांसदों के साथ गठबंधन से बाहर हो चुकी है।
आम आदमी पार्टी (AAP): 3 सांसदों के साथ खुद को इस समूह से अलग कर चुकी है।
किंगमेकर पार्टियां: वाईएसआरसीपी (7 सीटें), बीजेडी (6 सीटें) और एमडीएमके जैसी निर्दलीय पार्टियां फिलहाल तटस्थ हैं और वे राज्यसभा में किसी भी तरफ वोट कर सकती हैं।
लोकसभा का समीकरण: टीएमसी के 20 बागियों के बाद भी बहुमत दूर
लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए 363 सांसदों की आवश्यकता होती है।
सोमवार को टीएमसी के लगभग 20 बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर पार्टी से अलग होने का पत्र सौंपने वाले हैं। इन बागियों द्वारा एक अलग समूह बनाकर एनडीए को समर्थन देने के बाद निचले सदन में एनडीए की ताकत 213 तक पहुँच सकती है।
विश्लेषण:
टीएमसी के इस बड़े धड़े के समर्थन के बावजूद, बीजेपी और एनडीए गठबंधन लोकसभा में दो-तिहाई के जरूरी आंकड़े (363) से अभी भी काफी पीछे रहेगा। ऐसे में सरकार को बड़े संवैधानिक बदलावों को अमलीजामा पहनाने के लिए अन्य क्षेत्रीय दलों के बैकिंग या एक व्यापक आम सहमति की जरूरत बनी रहेगी।