अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला: करोड़ों के गबन में 5 मुख्य किरदार बेनकाब, ₹200 करोड़ से अधिक की चोरी की आशंका, 2.98 करोड़ बरामद

"आस्था पर आघात: दानपात्रों से गायब हुई रामभक्तों की गाढ़ी कमाई, जांच के घेरे में नोट गिनने वाले 50 कर्मचारी। मास्टरमाइंड के नाम पर अब भी रहस्य का पर्दा। ;3 सदस्यीय SIT करेगी जांच

15 Jun 2026  |  137

 

 

राम नगरी अयोध्या से एक ऐसी स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरे देश के श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। भव्य राम मंदिर के दानपात्रों से रामभक्तों द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे में एक बड़े घोटाले और चोरी का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। शुरुआती अनुमानों और सूत्रों के मुताबिक, यह हेराफेरी मामूली नहीं बल्कि 200 करोड़ रुपए से अधिक की हो सकती है।

विश्वासपात्र ही निकले 'विभीषण': 50 कर्मचारी संदेह के घेरे में

इस महाघोटाले की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि चोरी की इस वारदात को किसी बाहरी गिरोह ने नहीं, बल्कि मंदिर के भीतर के ही लोगों ने अंजाम दिया है। मंदिर में आने वाले भारी-भरकम चढ़ावे और नोटों की गिनती के काम में लगे लगभग 50 कर्मचारी इस समय सीधे संदेह के घेरे में हैं।

बताया जा रहा है कि ये कर्मचारी लंबे समय से बड़ी चालाकी से गिनती के दौरान रकम इधर-उधर कर रहे थे। एक साथ इतने बड़े पैमाने पर आंतरिक स्टाफ की संलिप्तता ने मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच एजेंसियों की ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू

मामला सामने आते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पुलिस और देश की शीर्ष जांच एजेंसियों ने मोर्चा संभाल लिया है। अब तक की जांच के आधार पर संदिग्धों से पूछताछ शुरू कर दी गई है।

CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं: नोटों की गिनती वाले कक्ष के पिछले कई महीनों के सीसीटीवी फुटेज को बारीकी से री-चेक किया जा रहा है।

बैंक खातों की जांच: संदिग्ध कर्मचारियों और उनके परिजनों के बैंक खातों व संपत्तियों की कुंडली खंगाली जा रही है ताकि अचानक हुए वित्तीय लेन-देन का पता लगाया जा सके।

सुरक्षा घेरा सख्त: मंदिर ट्रस्ट ने तत्काल प्रभाव से नोटों की गिनती की प्रक्रिया को रोककर नई और बेहद सख्त गाइडलाइंस लागू करने का फैसला किया है।

ट्रस्ट का रुख: मंदिर से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ धन की चोरी नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की 'आस्था और विश्वास' की चोरी है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई होगी जो एक मिसाल बनेगी।

जैसे-जैसे जांच की आंच आगे बढ़ रही है, आशंका जताई जा रही है कि इस खेल में कुछ बड़े नाम और बैंक अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। फिलहाल, पूरी राम नगरी इस धोखे से स्तब्ध है और हर कोई दोषियों के चेहरे बेनकाब होने का इंतजार कर रहा है।

 करोड़ों का गबन और 'पांच किरदारों' की कहानी

सूत्रों के अनुसार, पकड़े गए संदिग्धों के नाम लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रमाशंकर हैं। अब तक हुई करीब तीन करोड़ रुपये की रिकवरी इन्हीं पांचों की निशानदेही पर की गई है। आरोपियों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है, जिससे इस महाघोटाले में उनकी भूमिका पूरी तरह स्पष्ट हो गई है।

लेकिन इतने संवेदनशील और सुरक्षित स्थान से लगातार रकम पार होती रही और किसी को भनक तक नहीं लगी, इसने सुरक्षा और प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस साजिश के तार राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े किसी बड़े पदाधिकारी या किसी अन्य रसूखदार विभाग से जुड़े हो सकते हैं।

 जिम्मेदारों की चुप्पी और कयासों का बाजार गर्म

इतने बड़े और संवेदनशील मामले पर अब तक ट्रस्ट के किसी भी वरिष्ठ पदाधिकारी ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इस रहस्यमयी चुप्पी के कारण तमाम तरह की चर्चाएं और कयासों का दौर जारी है। ट्रस्ट से जुड़े दो लोगों पर सीधे सवाल उठ रहे हैं, जिनकी वास्तविक भूमिका का पता एक विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।

'टिन्नू' का जिक्र सबसे तेज

इस पूरे घटनाक्रम में 'टिन्नू' नाम के एक शख्स का नाम सबसे ज्यादा उछल रहा है। बताया जा रहा है कि टिन्नू ट्रस्ट के एक बड़े पदाधिकारी का बेहद करीबी है और दशकों से उनसे जुड़ा है। पकड़े गए आरोपियों में से एक, रमाशंकर, टिन्नू का ही रिश्तेदार है। सूत्रों की मानें तो ट्रस्ट के हर काम में टिन्नू का सीधा दखल रहता था। हाल ही में ट्रस्ट के एक पूर्व पदाधिकारी ने भी कैमरे के सामने आकर टिन्नू पर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे।

  करोड़ के हेरफेर की आशंका, अब तक ₹2.98 करोड़ बरामद

गुपचुप तरीके से चल रही इस जांच में अब तक 8 करोड़ रुपये से अधिक के हेरफेर के संकेत मिले हैं। हालांकि, अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा।

छापेमारी और रिकवरी: संदिग्धों के घरों और बैंक खातों को खंगाला जा रहा है। आरोपी अवनीश के खाते से गायब की गई दान राशि के 5 लाख रुपये और कुछ जेवरात बरामद हुए हैं।

घर पर छापा: शनिवार को पुलिस ने रुदौली के मीनापुर ठकुरन फगौली गांव में मंदिर कर्मचारी लवकुश के घर पर छापेमारी की, जहां से 10 से 12 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई है।

पुलिस का रुख: आधिकारिक तौर पर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस मामले में अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है, इसलिए औपचारिक पूछताछ का सवाल नहीं उठता। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, पर्दे के पीछे पुलिस की एक विशेष टीम रिकवरी और पूछताछ की प्रक्रिया में पूरी मुस्तैदी से जुटी है।

 सरकार का बड़ा एक्शन: 3 सदस्यीय SIT गठित

मामले के तूल पकड़ने के बाद राज्य सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है।

एसआईटी (SIT) के सदस्यपद
विजय विश्वास पंतमंडलायुक्त, लखनऊ
किरन एसपुलिस महानिरीक्षक (IG), लखनऊ जोन
नीलरतनविशेष वित्त सचिव

 

जांच की समयसीमा: यह हाई-प्रोफाइल कमेटी 7 दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जबकि 15 दिनों में अंतिम (फाइनल) रिपोर्ट दाखिल करेगी।

 सियासी घमासान: "गोली चलवाने वालों को बोलने का हक नहीं"

इस मामले पर अब सिसायी बयानबाजी भी तेज हो गई है। सीतापुर के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे खाद्य एवं रसद विभाग के मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने विरोधियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने खैराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कहा:

"राम मंदिर के चढ़ावे पर सवाल उठाने वाले पहले अपना खुद का इतिहास देख लें। जिन्होंने कभी मासूम रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं, उन्हें इस पवित्र मामले में बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।"

इस महाघोटाले में आगे क्या बड़े खुलासे होते हैं और एसआईटी की जांच में किस बड़े 'सफेदपोश' का नाम सामने आता है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

अन्य खबरें