कृषि एवं ग्रामीण विकास डेस्क:
भारत में खेती-किसानी के दौरान सबसे ज्यादा खर्च और मेहनत सिंचाई पर होती है। आज भी देश के लाखों किसान डीजल पंप या महंगी बिजली के भरोसे फसलों को पानी देते हैं, जिससे लागत लगातार बढ़ती जा रही है। गर्मियों में बिजली कटौती और आसमान छूते डीजल के दाम इस संकट को और गहरा कर देते हैं। किसानों की इसी बड़ी परेशानी को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए केंद्र सरकार की 'पीएम कुसुम योजना' (PM Kusum Yojana) एक गेम-चेंजर साबित हो रही है।
वर्ष 2019 में शुरू की गई इस योजना (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान) का मुख्य उद्देश्य खेती में पारंपरिक बिजली और डीजल पर निर्भरता को खत्म कर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
90 प्रतिशत तक की आर्थिक मदद: ऐसे समझें सब्सिडी का गणित
पीएम कुसुम योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सोलर पंप लगाने की कुल लागत का एक बहुत बड़ा हिस्सा सरकार खुद वहन करती है। इसमें किसान को अपनी जेब से बहुत मामूली रकम लगानी पड़ती है:
केंद्र सरकार का योगदान: 30% सब्सिडी
राज्य सरकार का योगदान: 30% सब्सिडी
बैंक लोन की सुविधा: 30% तक कर्ज (लोन)
किसान का खुद का अंशदान: मात्र 10%
आसान शब्दों में उदाहरण: यदि आपके खेत में लगने वाले सोलर पंप की कुल कीमत ₹5,00000 (5 लाख रुपये) है, तो सरकारी मदद के चलते आपको अपनी जेब से केवल ₹50,000 (पचास हजार रुपये) ही खर्च करने होंगे।
कौन उठा सकता है लाभ और क्या हैं जरूरी दस्तावेज?
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक के नाम पर कृषि योग्य भूमि (खेती की जमीन) होना अनिवार्य है। इसके साथ ही निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:
जमीन के मालिकाना हक से जुड़े कानूनी दस्तावेज (जमाबंदी/खतौनी आदि) और भूमि रिकॉर्ड वेरिफिकेशन।
पहचान और वित्तीय प्रमाण के लिए: पैन कार्ड, बैंक पासबुक (खाता विवरण), पासपोर्ट साइज फोटो, मोबाइल नंबर और जरूरी केवाईसी (KYC) डॉक्यूमेंट्स।
पहचान पत्र (जैसे सरकारी आईडी) और बैंक खाता।
आवेदन करने की बेहद आसान प्रक्रिया (Step-by-Step Guide)
योजना का लाभ लेने के लिए किसान नीचे दिए गए चरणों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं:
पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले अपने राज्य के आधिकारिक पीएम कुसुम पोर्टल या नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की नेशनल वेबसाइट https://mnre.gov.in/ पर विजिट कर रजिस्ट्रेशन करें।
विकल्प (कंपोनेंट) का चयन: अपनी आवश्यकता के अनुसार सही विकल्प चुनें—जैसे कि खेत में बिल्कुल नया सोलर पंप लगवाना है या फिर पहले से मौजूद बिजली/डीजल पंप को सोलर सिस्टम से जोड़ना है।
दस्तावेज अपलोड करें: आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियां भरें और जमीन के कागजात, पंप की क्षमता (HP) की डिटेल्स व अपनी सरकारी आईडी जैसे दस्तावेज ऑनलाइन सबमिट करें।
सत्यापन और स्थापना: आवेदन जमा होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा साइट वेरिफिकेशन (खेत का निरीक्षण) किया जाएगा। मंजूरी मिलते ही सब्सिडी जारी कर दी जाएगी और आपके खेत में सोलर पंप लगा दिया जाएगा।
इस योजना को अपनाकर किसान न सिर्फ सिंचाई के भारी खर्च से मुक्त हो सकते हैं, बल्कि भविष्य में अतिरिक्त सौर ऊर्जा बनाकर उसे ग्रिड को बेचकर अतिरिक्त कमाई भी कर सकते हैं।