कफ सीरप की 'ओवर द काउंटर' बिक्री पर ब्रेक: अब बिना डॉक्टर के पर्ची के नहीं मिलेंगी सीरप वाली दवाएं, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

सरकार ने 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में किया बड़ा संशोधन, शेड्यूल K से 'सीरप' शब्द हटाया; मनमर्जी से कफ सीरप खरीदने और इसके दुरुपयोग पर लगेगी लगाम।

16 Jun 2026  |  96

 

 

नई दिल्ली।

देश में कफ सीरप सहित अन्य सीरप वाली दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। सरकार द्वारा जारी एक नए नोटिफिकेशन के तहत अब कफ सीरप सहित सभी तरह की सीरप वाली दवाओं को बिना डॉक्टर की पर्ची (Prescription) के बेचने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। अब मेडिकल स्टोर्स से ऐसी दवाएं खरीदने के लिए ग्राहकों को डॉक्टर की पर्ची दिखाना अनिवार्य होगा।

'ड्रग्स (पांचवां संशोधन) रूल्स, 2026' के तहत कार्रवाई

यह महत्वपूर्ण बदलाव केंद्र सरकार द्वारा 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में संशोधन के जरिए किया गया है। सरकार ने इसे 'ड्रग्स (पांचवां संशोधन) रूल्स, 2026' का नाम दिया है, जिसे 9 जून को आधिकारिक राजपत्र (ऑफिशियल गजट) में नोटिफाई (अधिसूचित) कर दिया गया है। यह नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा।

तकनीकी बदलाव: शेड्यूल K के दायरे से बाहर हुआ 'सीरप'

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस संशोधन के तहत 'ड्रग्स रूल्स, 1945' की अनुसूची K (Schedule K) के सीरियल नंबर 13 के आइटम नंबर (7) से 'सीरप' (Syrups) शब्द को पूरी तरह हटा दिया गया है।

क्या है शेड्यूल K?

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत अनुसूची K में उन दवाओं को रखा जाता है, जिन्हें कुछ विशेष शर्तों के साथ अधिनियम के अध्याय IV के कड़े विनियामक (Regulatory) प्रावधानों से छूट मिली होती है। अब इस सूची से 'सीरप' शब्द हटने के बाद, सीरप वाली तमाम दवाएं भी लागू सख्त कानूनी और विनियामक प्रावधानों के सीधे दायरे में आ गई हैं।

आम जनता और स्टेकहोल्डर्स से ली गई थी राय

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम निर्णय पूरी तरह लोकतांत्रिक और पारदर्शी प्रक्रिया के बाद लिया गया है। इससे पहले 29 दिसंबर, 2025 को एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर इस विषय पर सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) और आम जनता से आपत्तियां व सुझाव मांगे गए थे। ड्राफ्ट पर प्राप्त सभी टिप्पणियों और सुझावों पर गहन विचार-विमर्श करने के बाद ही इस फाइनल नोटिफिकेशन को मंजूरी दी गई है।

ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की सलाह पर मुहर

यह ऐतिहासिक अधिसूचना 'ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड' (DTAB) से विस्तृत विचार-विमर्श और उनकी तकनीकी सलाह के बाद जारी की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940' की धारा 12 और 33 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए देश में दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण की व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित व पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से कफ सीरप को नशे या बिना डॉक्टरी सलाह के तौर पर इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति पर कड़ा प्रहार होगा।

अन्य खबरें