मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में विकास का महा-रोडमैप तैयार,₹24,200 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी, इंदौर मेट्रो और स्वास्थ्य क्षेत्र को मिली नई रफ्तार!

मप्र कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला: इंदौर मेट्रो के लिए ₹19,472 करोड़ स्वीकृत, 'मेगा स्वास्थ्य नीति-2026' के लिए बनी हाई-पावर कमेटी।

16 Jun 2026  |  107

 

 

भोपाल:

मध्यप्रदेश के समग्र विकास, बुनियादी ढांचे और जनकल्याण को एक नई ऊंचाई पर ले जाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में कई युगांतकारी निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, वन्यजीव संरक्षण और रोजगार सृजन से जुड़ी विभिन्न दूरगामी योजनाओं के लिए 24,200 करोड़ रुपये से अधिक का बजटीय आवंटन मंजूर कर प्रदेशवासियों को बड़ी सौगात दी है।

 कैबिनेट के प्रमुख फैसले: एक नजर में

1. इंदौर मेट्रो के लिए ₹19,472 करोड़ का महा-इंजन

बैठक का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला इंदौर मेट्रो रेल परियोजना को लेकर रहा। परियोजना की बढ़ी हुई लागत और भविष्य की अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सरकार ने 19,472 करोड़ 29 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की है। इस फैसले से प्रदेश की इस सबसे महत्वाकांक्षी शहरी परिवहन परियोजना को तय समय सीमा में पूरा करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

2. स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति: 'मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026'

प्रदेश में विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सरकार ने एक नई नीति के प्रस्ताव पर विचार करते हुए पांच सदस्यीय मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया है। यह समिति सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की स्थापना, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और गरीबों को बेहतर इलाज सुनिश्चित करने पर अपनी रिपोर्ट देगी।

पायलट प्रोजेक्ट: रीवा, देवास और गुना के ऐसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) को आउटसोर्स मॉडल पर संचालित किया जाएगा, जहां डॉक्टरों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। निविदा प्रक्रिया एमपीपीएचएससीएल (MPPHSCL) के जरिए होगी, जिससे जिला अस्पतालों पर से मरीजों का बोझ कम होगा।

3. वन्यजीव संरक्षण और ग्राम पुनर्वास: ₹2,381 करोड़

पर्यावरण और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए कैबिनेट ने वर्ष 2026 से 2031 तक के लिए 2,381 करोड़ 15 लाख रुपये मंजूर किए हैं।

इसके तहत टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर अभयारण्य में हाथियों व बाघों के संरक्षण और आवास सुधार के कार्य होंगे।

संरक्षित क्षेत्रों में आने वाले 94 गांवों के पुनर्वास और प्रभावित परिवारों को मुआवजे की सुदृढ़ व्यवस्था की जाएगी।

 समाज के हर वर्ग के कल्याण पर मुहर

जनजातीय शिक्षा (₹687 करोड़): 16वें वित्त आयोग की अवधि (2026-2031) के लिए जनजातीय कार्य विभाग की योजनाओं को निरंतर रखने की मंजूरी दी गई है। यह राशि 22 जिलों में संचालित छात्रावासों, आश्रम शालाओं और बालवाड़ियों के बेहतर संचालन व स्टाफ के वेतन पर खर्च होगी।

रेशम उद्योग को बढ़ावा (₹639 करोड़): 'रेशम समृद्धि योजना' और टसर रेशम विकास कार्यक्रम के जरिए बुनकरों, उत्पादकों और ग्रामीण उद्यमियों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है।

श्रमिक कल्याण (₹531 करोड़): औद्योगिक सुरक्षा, बाल श्रमिक पुनर्वास, प्रवासी श्रमिक आयोग और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए इस बजट को मंजूरी दी गई है।

वित्तीय पारदर्शिता (₹492 करोड़): स्थानीय निकायों की ऑडिट व्यवस्था (Local Fund Audit) को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासनिक सुधारों को हरी झंडी दी गई है।

समावेशी विकास की ओर बढ़ते कदम

राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. मोहन यादव सरकार का यह बजट आवंटन केवल बुनियादी ढांचा सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति, किसानों, श्रमिकों और आदिवासियों के जीवन स्तर को उठाने वाला एक दूरदर्शी कदम है। सरकार के इन फैसलों से आने वाले पांच वर्षों में मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे की तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।

अन्य खबरें