दीया मिर्जा के 'लॉजिक' पर भड़के नेटिजन्स: जलवायु परिवर्तन के लिए 'पितृसत्ता' को ठहराया जिम्मेदार, सोशल मीडिया पर हुईं बुरी तरह ट्रोल!

सोहा अली खान के पॉडकास्ट में दिया 25 सेकेंड का बयान पड़ा भारी; यूजर्स बोले—"एसी केबिन में बैठकर ज्ञान देना और हर हफ्ते नए कपड़े बदलना पाखंड है।"

16 Jun 2026  |  99

 

 

मुंबई:

लंबे समय से पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के मुद्दों पर आवाज उठाने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा इस बार अपने एक अजीबोगरीब बयान को लेकर विवादों में घिर गई हैं। सोहा अली खान के एक टॉक शो (पॉडकास्ट) में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और पर्यावरण को हो रहे नुकसान के पीछे 'पितृसत्ता' (Patriarchy) और पुरुषों को जिम्मेदार ठहराने के बाद वह सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गई हैं। इंटरनेट पर उनकी इस थ्योरी का जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है और लोग इसे 'बिना सिर-पैर का लॉजिक' बता रहे हैं।

क्या कहा दीया मिर्जा ने?

वायरल हो रहे पॉडकास्ट के 25 सेकेंड के एक वीडियो क्लिप में दीया मिर्जा, सोहा अली खान और पर्यावरण लेखिका आरती कुमार-राव के साथ प्रकृति और समाज के संबंधों पर चर्चा करती नजर आ रही हैं। इसी दौरान दीया मिर्जा ने कहा:

"पितृसत्ता ही जलवायु परिवर्तन का असली कारण है। प्रकृति का शोषण उस मानसिकता से जुड़ा है जो प्रभुत्व, आक्रामक विकास और प्राकृतिक संसाधनों को अपने अधीन रखने को प्राथमिकता देती है। इस दुनिया में पुरुष हैं; जलवायु परिवर्तन को पुरुषों ने ही बढ़ाया है और वे पूरी तरह से इस अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार हैं।"

 सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा: यूजर्स ने याद दिलाया 'दोहरा रवैया'

दीया मिर्जा का यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर यूजर्स ने उनकी जमकर क्लास लगाई और उनकी पर्यावरण संबंधी समझ (नॉलेज) पर ही सवाल खड़े कर दिए।

"एसी रूम में बैठकर ज्ञान": एक नाराज यूजर ने लिखा, "तीन महिलाएं एक शानदार एयर-कंडीशंड केबिन में बैठी हैं, महँगी कारों में घूमती हैं और उन्हीं पुरुषों द्वारा ईजाद की गई तकनीक और मेहनत के फल का आनंद लेते हुए बेकार की बातें कर रही हैं। यहाँ पाखंड ने लाखों बार दम तोड़ दिया।"

सशक्तिकरण को झटका: एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, "दीया ने अपने इस अजीब तर्क से उन सभी उपलब्धियों को बर्बाद कर दिया जो वास्तविक महिला सशक्तिकरण पहलों ने अब तक हासिल की थीं। खुद को चर्चा में बनाए रखने के लिए वे 'ट्यूबलाइट' बनकर रह गईं।"

उपभोक्ता संस्कृति पर सवाल: लोगों ने उनके लाइफस्टाइल पर उंगली उठाते हुए कहा कि जो शैम्पू वे इस्तेमाल करती हैं, जो ब्रांडेड कपड़े वे हर हफ्ते बदलती हैं और जिन गाड़ियों से चलती हैं, क्या वे प्रदूषण नहीं फैलाते? क्या प्रदूषण सिर्फ पुरुष फैला रहे हैं?

साधु बनने का नाटक?

एक यूजर ने तंज कसते हुए दीया के दोहरे रवैये पर लिखा, "जरा सोचिए, किसी चिलचिलाती धूप वाले दिन जब इनका एसी खराब हो जाएगा, तो ये अपनी हाउसकीपर पर चिल्लाएंगी और उसे रिपेयरिंग के लिए किसी पुरुष मैकेनिक को ही बुलाने को कहेंगी… और यहाँ कैमरे के सामने ये साधु बनने का नाटक कर रही हैं।"

दीया मिर्जा को इससे पहले संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की सद्भावना राजदूत के रूप में उनके काम के लिए काफी सराहा गया है, लेकिन उनके इस 'मैन-वर्सेस-नेचर' (पुरुष बनाम प्रकृति) वाले नए राजनीतिक एंगल ने उनके प्रशंसकों को भी निराश किया है। फिलहाल इस भारी ट्रोलिंग पर दीया मिर्जा की तरफ से कोई सफाई सामने नहीं आई है।

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