पेरिस (फ्रांस):
फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के मंच से एक बेहद चौंकाने वाला भू-राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। कभी इजराइल के सबसे पक्के मददगार माने जाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के रिश्तों में बड़ी दरार आ गई है। ट्रंप ने लेबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ इजराइल के सैन्य तौर-तरीकों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने साफ कहा कि आतंकियों को ढूंढने के नाम पर पूरी की पूरी रिहायशी इमारतों को बम से उड़ाना पूरी तरह गलत और गैर-जरूरी है।
"मेरे बिना इजराइल का वजूद संभव नहीं था"
कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ मीडिया के सामने आए राष्ट्रपति ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर दिखा। इजराइल को उसकी सीमाएं याद दिलाते हुए ट्रंप ने एक बड़ा और तीखा दावा किया:
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा:
"अगर अमेरिका और मैं न होते, तो आज इजराइल का कोई वजूद ही नहीं होता। इतिहास में कोई भी दूसरा अमेरिकी राष्ट्रपति वह करने को तैयार नहीं था, जो मैंने इजराइल के लिए किया। अगर मैं बीच में न पड़ता, तो इजराइल बहुत पहले ही तबाह हो चुका होता।"
ऐन वक्त पर इजराइली हमले से बिगड़ा खेल: क्यों नाराज हैं ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप की इस नाराजगी की मुख्य वजह ईरान के साथ होने वाला एक ऐतिहासिक और बड़ा 'शांति समझौता' है। ट्रंप प्रशासन काफी समय से इस समझौते के लिए जमीन तैयार कर रहा था, जिसके तहत दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला न करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
लेकिन, जब समझौते पर दस्तखत होने में महज एक घंटे का समय बचा था, तभी इजराइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर भीषण हवाई हमला कर दिया। इस हरकत ने महीनों की राजनयिक मेहनत पर पानी फेर दिया।
मीडिया पोर्टल एक्सियोस से बातचीत में ट्रंप ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा:
"जब मेरे सलाहकारों ने मुझे इस हमले के बारे में बताया, तो मैं हैरान रह गया। समझौता साइन होने से ठीक एक घंटे पहले बीबी (नेतन्याहू) को यह हमला करने की क्या जरूरत थी? उनमें फैसले लेने की सही समझ (Judgement) नहीं है। हमारे रिश्ते अच्छे रहे हैं, लेकिन अब नेतन्याहू को ज्यादा जिम्मेदार होना पड़ेगा।"
इस दौरान ट्रंप भावुक भी दिखे और उन्होंने लेबनान के पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि यह कभी प्रोफेसरों, डॉक्टरों और वकीलों का एक बेहद खूबसूरत और समझदार देश हुआ करता था, जिसे आज बर्बाद कर दिया गया है।
ईरान की शर्त बनाम इजराइल का अड़ियल रुख
इस पूरे विवाद के बीच कूटनीतिक गतिरोध और बढ़ गया है:
ईरान का रुख: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ किसी भी समझौते के लिए इजराइल को लेबनान के उन इलाकों को खाली करना होगा, जिन पर उसने युद्ध के दौरान कब्जा किया है।
इजराइल का रुख: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस शर्त को खारिज कर चुके हैं। उनका कहना है कि इजराइली सेना (IDF) जब तक जरूरी समझेगी, लेबनान में डटी रहेगी।
अमेरिका का रुख: हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप द्वारा तैयार किए जा रहे समझौते में इजराइली सेना की वापसी की ऐसी कोई शर्त शामिल नहीं है।
व्हाइट हाउस का डैमेज कंट्रोल
ट्रंप के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया, जिसके बाद व्हाइट हाउस को तुरंत सफाई पेश करनी पड़ी। अमेरिकी अधिकारियों ने मामले को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप से बड़ा इजराइल का कोई दोस्त नहीं है और इजराइली सेना हमेशा हमारी बेहतरीन साझेदार रहेगी।
विशेषज्ञों की राय:
वैश्विक मामलों के जानकारों का मानना है कि ट्रंप के इस कड़े बयान और गुस्से के बावजूद, अमेरिका की मूल इजराइल नीति और रणनीतिक साझेदारी में किसी बड़े या तात्कालिक बदलाव की उम्मीद नहीं है, लेकिन नेतन्याहू के लिए यह एक बड़ा कूटनीतिक झटका जरूर है।