G7 समिट में गरजे पीएम मोदी: ट्रंप के बगल में बैठकर उठाया अमेरिकी हमले में भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा

ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर भारत की दोटूक; तनाव के बीच 16 महीने बाद गर्मजोशी से मिले मोदी और ट्रंप।

17 Jun 2026  |  98

 

 

एवियन (फ्रांस):

फ्रांस के सुरम्य शहर एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक सुरक्षा और भारत के हितों को लेकर बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। पीएम मोदी ने समिट में पश्चिम एशिया के तनाव और समुद्री मार्गों की असुरक्षा का मुद्दा बेहद जोरदार तरीके से उठाया। इस दौरान सबसे खास बात यह रही कि जब पीएम मोदी वैश्विक नेताओं को संबोधित कर रहे थे, तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ठीक उनके बगल में बैठे थे। ट्रंप की मौजूदगी में पीएम मोदी ने अमेरिकी सैन्य हमले में भारतीय नाविकों की दुखद मौत पर गहरी चिंता और आपत्ति व्यक्त की।

ट्रंप के सामने उठाया नाविकों की मौत का दर्द

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में वैश्विक व्यापार और मानवीय सुरक्षा का हवाला देते हुए अमेरिका को आईना दिखाया।

पीएम मोदी ने कहा:

"पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों की प्रगति का हम स्वागत करते हैं, लेकिन इस संघर्ष के कारण क्षेत्र में हमारे मित्र देशों में भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। समुद्री नाविक, जो वैश्विक व्यापार से पूरी दुनिया को जोड़ते हैं, उनकी सुरक्षा हमारी साझा जिम्मेदारी है। कई भारतीय नागरिकों की भी इसमें जान गई है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।"

क्या था पूरा मामला?

पीएम मोदी का यह सख्त रुख ओमान की खाड़ी में हुई हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद आया है। दरअसल, अमेरिकी सेना ने ईरान से तेल ले जा रहे पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर 'सेट्टेबेलो' पर अमेरिकी नाकाबंदी के उल्लंघन का आरोप लगाकर हमला कर दिया था। इस जहाज के 28 सदस्यीय क्रू में 24 भारतीय शामिल थे, जिनमें से 3 भारतीय नाविकों की इस अमेरिकी हमले में दुखद मौत हो गई थी। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास वाणिज्यिक जहाजों पर हमले की यह तीसरी घटना थी, जिसने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य: भारत के लिए क्यों है बेहद अहम?

वैश्विक चोकपॉइंट: यह मार्ग फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र से जोड़ता है, जहाँ से दुनिया का एक बड़ा ऊर्जा और वाणिज्यिक व्यापार गुजरता है।

आर्थिक नुकसान: होर्मुज में व्यवधान आने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर बुरा असर पड़ता है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपने कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आयात करता है, इसलिए इस रास्ते का सुरक्षित रहना भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

तनाव के बीच 16 महीने बाद मोदी-ट्रंप की मुलाकात

इस कूटनीतिक तल्खी के बीच एक सकारात्मक तस्वीर भी देखने को मिली। पिछले 16 महीनों से दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक तनाव के बाद यह पहला मौका था जब पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आमना-सामना हुआ।

गर्मजोशी से मिले दोनों नेता: सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया और बेहद गर्मजोशी से हाथ मिलाया। इससे पहले दोनों नेता फरवरी 2025 में वॉशिंगटन में मिले थे।

द्विपक्षीय बैठक पर नजरें: इस संक्षिप्त मुलाकात के बाद दोनों नेताओं के बीच बुधवार को एक हाई-प्रोफाइल द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में लंबित व्यापार समझौतों, रक्षा सहयोग और हालिया सैन्य घटनाक्रमों सहित द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर खुलकर बातचीत होगी।

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