राम मंदिर दान घोटाला: SIT की दूसरे दिन भी मैराथन जांच, करोड़ों के हार और चरण पादुका गायब होने का सनसनीखेज दावा

8 महीने के CCTV फुटेज डिलीट होने के आरोपों के बीच 100 लोगों से पूछताछ; 19 जून को अयोध्या पहुंच सकते हैं सीएम योगी आदित्यनाथ।

17 Jun 2026  |  88

 

 

अयोध्या:

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान राशि और चढ़ावे में हेरफेर का मामला अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की टीम ने दूसरे दिन मंगलवार को भी मंदिर परिसर में करीब सात घंटे से अधिक समय तक मैराथन तफ्तीश की। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों, पुजारियों और बैंक अधिकारियों समेत 100 से अधिक लोगों से गहन पूछताछ की जा चुकी है।

लखनऊ से पहुंचे आला अफसर, कड़ी सुरक्षा में पूछताछ

मंगलवार सुबह 11 बजे SIT अध्यक्ष और मंडलायुक्त लखनऊ विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन सीधे राम जन्मभूमि परिसर स्थित ट्रस्ट कार्यालय पहुंचे।

सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और गोपाल राव समेत कई प्रमुख चेहरों से पूरी दान प्रक्रिया की बारीकियों को समझा। टीम मुख्य रूप से दान लेने, उसकी गिनती करने और उस दौरान मौजूद रहने वाले व्यक्तियों की सूची खंगाल रही है। पूछताछ की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बयान दर्ज कराने वाले हर व्यक्ति की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जा रही है।

करोड़ों का हार और चरण पादुका गायब! एक और बड़ा दावा

इस वित्तीय गबन की जांच के बीच आचार्य विनोद मिश्र ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा कर मामले में नया मोड़ ला दिया है:

शिष्य ने दिया था करोड़ों का उपहार: आचार्य विनोद मिश्र के अनुसार, उनके शिष्य और जौनपुर के बड़े कारोबारी अजय विश्वकर्मा ने मंदिर निर्माण के बाद करोड़ों रुपये की कीमत का एक कीमती हार और सोने-चांदी की चरण पादुकाएं भेंट की थीं।

रसीद होने के बाद भी गायब: आरोप है कि इन दोनों मूल्यवान वस्तुओं को 'टिन्नू' नाम के व्यक्ति ने प्राप्त किया था और उसकी रसीद भी दी थी, लेकिन इन्हें आज तक मुख्य मंदिर के चढ़ावे में शामिल नहीं किया गया।

बेंगलुरु भेजकर जेवर गलाने का आरोप: जब आचार्य ने इस बारे में पूछताछ की, तो उन्हें बताया गया कि चढ़ावे के जेवर बेंगलुरु भेजकर गला दिए जाते हैं और उनकी ईंटें बनाकर यहाँ रखी जाती हैं। हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

8 महीने के CCTV फुटेज गायब, बेसमेंट में संदिग्धों से पूछताछ

मामले में सबसे बड़ा पेच साक्ष्यों को लेकर फंसता नजर आ रहा है। ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी महिपाल सिंह ने आरोप लगाया है कि गड़बड़ी को छिपाने के लिए पिछले आठ महीने के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को सिस्टम से डिलीट कर दिया गया है।

वहीं, सूत्रों का कहना है कि इस मामले में पकड़े गए कुछ संदिग्ध युवकों को ट्रस्ट कार्यालय के बेसमेंट में रखा गया है, जिनसे मिली जानकारियों और बरामद रकम के आधार पर SIT आगे की कड़ियों को जोड़ रही है। इस जांच में करीब 40 से 50 ऐसे नाम सामने आए हैं जिनकी भूमिका बेहद संदिग्ध मानी जा रही है।

संतों में भारी नाराजगी और वीआईपी दर्शन के नाम पर वसूली का पुराना विवाद

इस विवाद ने अयोध्या के संत समाज को भी झकझोर कर रख दिया है। राम जन्मभूमि मामले के मुख्य पक्षकार रहे महंत धर्मदास ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा:

महंत धर्मदास ने कहा:

"ट्रस्ट का सीधा अर्थ 'विश्वास' होता है, लेकिन जब वही विश्वास डगमगाने लगे तो स्थिति बेहद चिंताजनक हो जाती है। इस पूरी व्यवस्था में अयोध्या के स्थानीय संतों और लोगों की लगातार उपेक्षा की गई है।"

इसके साथ ही, मंदिर में विशेष दर्शन, वीआईपी पास और प्राथमिकता सुविधा दिलाने के नाम पर पहले भी लगने वाले अवैध वसूली के आरोप एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। SIT इन सभी व्यवस्थागत कमजोरियों को अपनी जांच के दायरे में शामिल कर रही है।

19 जून को सीएम योगी का संभावित दौरा:

इस पूरे सियासी और प्रशासनिक भूचाल के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 19 जून को अयोध्या पहुंच सकते हैं। हालांकि, उनका मुख्य कार्यक्रम श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के जन्मदिवस समारोह में शामिल होना है, लेकिन सूत्रों का मानना है कि सीएम योगी इस संवेदनशील मामले की प्रगति और रामनगरी के विकास कार्यों की जमीनी समीक्षा भी कर सकते हैं। मुख्यमंत्री के इस संभावित दौरे को लेकर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

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