इस्लामाबाद।
पाकिस्तान सरकार ने महिलाओं के स्वास्थ्य और देश की बेकाबू होती आबादी को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा और प्रगतिशील कदम उठाया है। सरकार ने सैनिटरी पैड और गर्भनिरोधक उत्पादों (Contraceptives) पर लगने वाले 18% सेल्स टैक्स को पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव रखा है। पिछले हफ्ते संसद में पेश किए गए देश के नए बजट में इस छूट को शामिल किया गया है।
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा:
"सैनिटरी प्रोडक्ट्स महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और समाज में उनकी भागीदारी के लिए कोई लग्जरी नहीं, बल्कि बेहद जरूरी बुनियादी आवश्यकता हैं। इसके साथ ही, पाकिस्तान जनसंख्या के मामले में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश बन चुका है, इसलिए परिवार नियोजन को बढ़ावा देना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।"
चिंताजनक हकीकत: सिर्फ 12% महिलाएं ही कर पाती हैं पैड का इस्तेमाल
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की एक हालिया रिपोर्ट पाकिस्तान में महिलाओं की सेहत से जुड़े बेहद डराने वाले आंकड़े पेश करती है:
असुरक्षित विकल्प: पाकिस्तान में केवल 12% महिलाएं और लड़कियां ही बाजार में मिलने वाले सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल कर पाती हैं। बाकी की एक बहुत बड़ी आबादी आज भी पीरियड्स के दौरान कपड़े, राख या घर में बने असुरक्षित और अस्वास्थ्यकर विकल्पों का सहारा लेने को मजबूर है।
40% एक्स्ट्रा टैक्स की मार: यूनिसेफ के अनुसार, अलग-अलग स्थानीय टैक्स और छिपे हुए शुल्कों को मिलाकर पाकिस्तानी महिलाओं को इन जरूरी प्रोडक्ट्स पर करीब 40% अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ती है। इसकी सबसे ज्यादा मार गरीब और ग्रामीण इलाकों की महिलाओं पर पड़ती है।
'पीरियड पॉवर्टी' का संकट: एक दिन की कमाई का एक-तिहाई हिस्सा सिर्फ पैड पर
विश्व बैंक (World Bank) के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान की लगभग 45% आबादी बेहद गरीबी में जीवन बिता रही है, जिनकी रोजाना की कमाई करीब 1,175 पाकिस्तानी रुपए (PKR) से भी कम है।
इस भयंकर गरीबी के बीच सैनिटरी पैड्स की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसे नीचे दिए गए आंकड़ों से समझा जा सकता है:
| विवरण | आर्थिक बोझ (अनुमानित) |
|---|---|
| गरीब की औसत दैनिक आय | ~1,175 पाकिस्तानी रुपए |
| 10 सैनिटरी पैड के एक पैकेट की कीमत | एक दिन की कमाई का एक-तिहाई (33%+) हिस्सा |
| मासिक संकट | कई बार एक महीने में एक पैकेट कम पड़ जाता है, जिससे खर्च दोगुना हो जाता है। |
क्यों गेम-चेंजर साबित हो सकता है यह फैसला?
पाकिस्तान इस समय भयंकर आर्थिक तंगी और 'पीरियड पॉवर्टी' (मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता उत्पादों तक पहुँच न होना) से जूझ रहा है। ऐसे में 18% सेल्स टैक्स हटने से इन उत्पादों की कीमतें जमीन पर आएंगी। यह फैसला न केवल महिलाओं को गंभीर संक्रमण और बीमारियों से बचाएगा, बल्कि कंडोम और अन्य गर्भनिरोधक सस्ते होने से देश की तेजी से बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
महिला अधिकार संगठनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही मांग की है कि कंपनियों पर सख्त निगरानी रखी जाए ताकि टैक्स कटौती का सीधा फायदा आम महिलाओं की जेब तक पहुँचे।