ट्रंप का महाविस्फोट: 'अगर मैं न होता तो इजराइल बर्बाद हो जाता', चौबीस घंटे में नेतन्याहू को मिले 4 बड़े झटके

ईरान समझौते में अमेरिका ने इजराइल को किया पूरी तरह अलग-थलग; रक्षा मंत्री को वीजा देने से इनकार, ट्रंप बोले– 'हिजबुल्लाह से लड़ने में इजराइल से बेहतर तो सीरिया है!'

17 Jun 2026  |  110

 

 

वाशिंगटन/तेल अवीव।

वैश्विक राजनीति के मंच पर एक अभूतपूर्व उलटफेर देखने को मिल रहा है। कल तक अमेरिका के सबसे भरोसेमंद सहयोगी माने जाने वाले इजराइल और उसके प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए बेहद मुश्किल दौर शुरू हो गया है। पिछले 48 घंटों के भीतर 'टीम नेतन्याहू' को अमेरिका की तरफ से एक के बाद एक चार बड़े झटके लगे हैं।

सबसे बड़ा और तीखा हमला खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है। ट्रंप ने खुलेआम कह दिया कि अगर वे न होते, तो इजराइल बर्बाद हो चुका होता। इतना ही नहीं, ट्रंप ने इजराइल की सैन्य क्षमता पर सवाल उठाते हुए उसे सीरिया से भी कमजोर राष्ट्र बता दिया और कहा कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल से बेहतर ढंग से सीरिया लड़ सकता है।

बैक-टू-बैक लगे 4 बड़े झटके: पूरी तरह साइडलाइन हुआ इजराइल

शर्तों को किया दरकिनार

झटका 1

अमेरिका ने ईरान डील (Iran Deal) में इजराइल की किसी भी शर्त को शामिल करने से साफ मना कर दिया है। इजराइल चाहता था कि इस समझौते में ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों के निर्माण पर रोक लगे और खाड़ी देशों को 'अब्राहम समझौते' में शामिल किया जाए, लेकिन अमेरिका ने इसे नजरअंदाज कर दिया।

समझौते के दस्तावेज (MoU) देने से इनकार

झटका 2

इजराइल ने अमेरिका से इस ऐतिहासिक डील के संबंध में होने वाले एमओयू (MoU) की एक कॉपी मांगी थी, ताकि वह शर्तों को देख सके। लेकिन अमेरिका ने इजराइल को कोई भी जानकारी या दस्तावेज देने से साफ इनकार कर दिया।

व्हाइट हाउस ने नहीं दिया मिलने का वक्त

झटका 3

अमेरिकी मीडिया नेटवर्क सीएनएन (CNN) की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम बेंजामिन नेतन्याहू राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करना चाहते हैं, लेकिन व्हाइट हाउस ने फिलहाल उन्हें समय देने से मना कर दिया है। संकेत हैं कि डील पूरी होने के बाद ही मुलाकात संभव हो पाएगी।

रक्षा मंत्री बेन ग्वीर का वीजा रोका

झटका 4

इजराइली अखबार 'हार्तेज' के अनुसार, इजराइल के रक्षा मंत्री बेन ग्वीर को अमेरिका ने वीजा देने से इनकार कर दिया है। ग्वीर मियामी जाना चाहते थे, लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने उन्हें स्पेशल वीजा जारी नहीं किया, जिसे राजनयिक स्तर पर बहुत बड़ा अपमान माना जा रहा है।

क्यों टूटा ट्रंप का भरोसा? अमेरिका ने क्यों छोड़ा साथ?

ईरान के साथ तनाव की शुरुआत में अमेरिका और इजराइल कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे, लेकिन समझौते की मेज पर आते ही समीकरण बदल गए। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण सामने आ रहे हैं:

गलत खुफिया इनपुट और तख्तापलट का फेल दावा: पीएम नेतन्याहू ने राष्ट्रपति ट्रंप को भरोसा दिलाया था कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई या जंग शुरू होते ही वहां की जनता विद्रोह कर देगी और तख्तापलट हो जाएगा। हालांकि, जमीन पर इसका बिल्कुल उल्टा हुआ, जिससे ट्रंप का नेतन्याहू पर से भरोसा उठ गया।

खाड़ी देशों और नाटो का दबाव: सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी के प्रमुख देश ईरान के साथ युद्ध के बजाय समझौते के पक्ष में थे। नाटो सहयोगी तुर्की ने भी इसी रास्ते की वकालत की, जिसके आगे अमेरिका को झुकना पड़ा।

व्हाइट हाउस के भीतर विरोध: अमेरिका के शीर्ष वार्ताकार और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) भी इजराइल के मौजूदा कड़े रुख के सख्त खिलाफ हैं। उनके प्रभाव के कारण भी इजराइल को वार्ता से बाहर रखा गया।

अक्टूबर 2026 के चुनावों पर पड़ेगा बड़ा असर

डोनाल्ड ट्रंप का यह रुख और इजराइल का वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ना पीएम नेतन्याहू के लिए घरेलू राजनीति में बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है। अक्टूबर 2026 में इजराइल में आम चुनाव प्रस्तावित हैं।

अब तक नेतन्याहू अमेरिकी समर्थन और अपनी मजबूत विदेश नीति के दम पर इस चुनाव को जीतने की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन अमेरिका के इन कड़े फैसलों ने विपक्ष को उनके खिलाफ एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चारों तरफ से घिरे नेतन्याहू इस कूटनीतिक चक्रव्यूह से बाहर निकलने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

अन्य खबरें