नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों (4 मई) के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में भड़की बगावत की आग अब देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच चुकी है। कभी संसद के दोनों सदनों में 40 सांसदों के साथ विपक्ष की बुलंद आवाज बनने वाली टीएमसी आज अपने सबसे बड़े वजूद के संकट से जूझ रही है।
इस सियासी ड्रामे के बीच सबसे बड़ी खबर यह है कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को आगामी 19 जून को तलब किया है। स्पीकर ने अभिषेक बनर्जी को पार्टी में हुई इस अभूतपूर्व फूट पर अपना और पार्टी का पक्ष रखने को कहा है। 19 जून को होने वाली यह मुलाकात टीएमसी के भविष्य और बागी सांसदों की सदस्यता को लेकर बेहद निर्णायक मानी जा रही है।
20 सांसदों का मिला साथ: रातों-रात चमकी 'पेन की नीब' व 'सात किरणें'
टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 बागी सांसदों ने एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठाते हुए त्रिपुरा की एक गुमनाम क्षेत्रीय पार्टी—नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी (NCPI) में विलय का एलान कर दिया है।
कौन है NCPI?
स्थापना: साल 2022 में शिवली कुंडू द्वारा गठित यह त्रिपुरा का एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दल है।
चुनावी इतिहास: 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने केवल 2 सीटों पर चुनाव लड़ा था और दोनों ही जगह इसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।
चुनाव चिन्ह: 'पेन की नीब और सात किरणें'।
सियासी गलियारों में चर्चा: कल तक जिस पार्टी को त्रिपुरा से बाहर कोई जानता तक नहीं था, 'जोड़ा फूल' (TMC) की बगावत और 'कमल' (BJP) के कथित बैक-सपोर्ट के चलते वह दल अब अचानक लोकसभा में 5वीं सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनने की दहलीज पर खड़ा है।
बैकस्टेज स्क्रिप्ट: लोकसभा अध्यक्ष से पहले भूपेंद्र यादव से मिले बागी
इस पूरी बगावत के पीछे की कड़ियों को जोड़ें तो खेल काफी दिलचस्प नजर आता है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विलय का पत्र सौंपने से ठीक पहले, टीएमसी के सभी 20 बागी सांसदों ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद से ही राजनीतिक पंडित यह कयास लगा रहे हैं कि इस पूरी स्क्रिप्ट के पीछे भाजपा की बड़ी रणनीति काम कर रही है।
राज्यसभा में भी हाहाकार: इन बड़े चेहरों का हुआ मोहभंग
ममता बनर्जी की मुश्किलें सिर्फ लोकसभा तक सीमित नहीं हैं, राज्यसभा में भी उनके पैर उखड़ रहे हैं। हाल ही में टीएमसी के कई बड़े स्तम्भों ने पार्टी और सांसदी से इस्तीफा दे दिया है:
सुखेंदु शेखर रॉय: तृणमूल के सबसे वरिष्ठ चेहरों में से एक सुखेंदु शेखर ने इस्तीफा देकर ममता सरकार के कार्यकाल पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने साफ कहा कि कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में हुए डॉक्टर दुष्कर्म-हत्या मामले के बाद ही उनका मन पार्टी से खिन्न हो गया था।
सुष्मिता देव: बंगाल से राज्यसभा सांसद रहीं सुष्मिता देव ने भी इस्तीफा दे दिया है और अब वे अपने गृह राज्य असम की राजनीति पर ध्यान केंद्रित करेंगी।
ताजा इस्तीफे: गुरुवार को प्रकाश चिक बराइक और मशहूर अभिनेत्री व सांसद कोयल मल्लिक ने भी राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी, जिससे टीएमसी खेमा पूरी तरह बैकफुट पर आ गया है।
अब आगे क्या? 19 जून पर टिकी निगाहें
पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी के खिलाफ पार्टी के भीतर ही आंतरिक कलह सतह पर आ चुकी है। नेता अब खुलकर ममता के नेतृत्व के खिलाफ बोल रहे हैं।
अब सारा दारोमदार 19 जून को होने वाली अभिषेक बनर्जी और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की मुलाकात पर है। अभिषेक बनर्जी दलबदल कानून (Anti-Defection Law) के तहत इन बागी सांसदों पर क्या रुख अपनाते हैं और स्पीकर इस पर क्या फैसला लेते हैं, इसी से तय होगा कि देश की राजनीति में इस नए समीकरण (NCPI) को कानूनी मान्यता मिलती है या नहीं।