राम मंदिर में करोड़ों का 'सोना घोटाला'! श्रद्धालुओं के चढ़ावे में हेराफेरी का आरोप, जांच में जुटी SIT

मिंट कॉर्पोरेशन के अफसरों को भगाया, रसीद काउंटर नहीं खुलने दिया; दान पेटी से लेकर पुजारियों तक पहुंचे सोने का गायब है हिसाब-किताब!

18 Jun 2026  |  119

 

 

अयोध्या।

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में सिर्फ चढ़ावे के कैश (रुपयों) की हेराफेरी का ही मामला नहीं है, बल्कि इससे कहीं ज्यादा बड़ा और चौंकाने वाला 'सोना घोटाला' सामने आ रहा है। देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा रामलला के चरणों में अर्पित किए गए सोने और बेशकीमती गहनों में करोड़ों रुपये के घपले की आशंका है। इस पूरे मामले की कमान अब स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) ने संभाल ली है और सोने के इस कथित घोटाले को लेकर भी सघन पूछताछ और पड़ताल शुरू कर दी गई है।

क्यों और कहां हुआ खेल? समझिए पूरा मामला

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने को व्यवस्थित करने और उसकी सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता और विशेष व्यवस्था नहीं थी। इसी का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर हेराफेरी को अंजाम दिया गया।

श्रद्धालुओं से सोना तीन अलग-अलग रास्तों से मंदिर प्रशासन तक पहुंच रहा था:

दान पेटी: श्रद्धालु सीधे सोने के आभूषण दान पात्र में डाल देते थे।

पुजारी: गर्भगृह में मौजूद पुजारियों को सोना सौंपा जाता था ताकि वे उसे रामलला को अर्पित कर दें।

सीधा ट्रस्ट: कुछ रसूखदार और बड़े लोग सीधे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को सोना सौंपकर जाते थे।

पड़ताल की कमी और 'टुन्नू यादव' का कनेक्शन:

चंपत राय को मिलने वाले सोने को वे सीधे टुन्नू यादव को सौंप देते थे। टुन्नू यादव उन आभूषणों की फोटो खींचकर उन्हें बैंक में जमा कराता था। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि कितना सोना आया और कितना बैंक में जमा हुआ, इसका कोई मिलान या ऑडिट नहीं किया गया। हाल ही में हुई छापेमारी के दौरान आरोपी टुन्नू यादव के ठिकाने से भारी मात्रा में कैश के साथ-साथ सोना भी बरामद हुआ है, जिसने इस घोटाले की पुष्टि की है। आरोप है कि पुजारियों द्वारा गणना स्टाफ को सौंपे गए सोने की सही तौल और गिनती कभी दर्ज ही नहीं की गई और रास्ते में ही सोना चोरी कर लिया गया।

केंद्र सरकार की योजना को किया गया 'फ्लॉप'

सोने के चढ़ावे में किसी भी तरह की पारदर्शिता की कमी और घपले को रोकने के लिए भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने एक विशेष योजना तैयार की थी। इसके तहत वित्त मंत्रालय और सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SPMCIL - मिंट कॉर्पोरेशन) के बीच एक आधिकारिक करार (MoU) हुआ था।

क्या है SPMCIL?

यह वित्त मंत्रालय के अधीन काम करने वाली देश की वह शीर्ष संस्था है जो भारतीय मुद्रा (नोट) छापती है, सिक्कों का निर्माण करती है और डाक टिकट व स्टाम्प पेपर जैसे उच्च सुरक्षा वाले दस्तावेज तैयार करती है।

क्या थी योजना?

देश के अन्य बड़े और वीआईपी मंदिरों की तर्ज पर राम मंदिर में भी SPMCIL का एक समर्पित काउंटर खोला जाना था। नियम के मुताबिक, जो भी श्रद्धालु सोना या गहने दान करना चाहता, वह इसी काउंटर पर देता और बदले में उसे सरकारी रसीद मिलती। मंदिर में आए इसी दान के सोने को पिघलाकर धार्मिक सिक्के (Religious Coins) बनाने की योजना थी, ताकि रामभक्त उन्हें यादgroup के तौर पर खरीद सकें।

साजिश के तहत भगाए गए मिंट कॉर्पोरेशन के अफसर?

सूत्रों का दावा है कि केंद्र सरकार के साथ करार होने के बावजूद अयोध्या में मंदिर व्यवस्था संभाल रहे कुछ प्रभावशाली लोगों ने जानबूझकर मिंट कॉर्पोरेशन को मंदिर परिसर में उचित जगह नहीं दी, जिसके कारण यह काउंटर कभी खुल ही नहीं पाया।

यही नहीं, जांच में यह गंभीर बात भी सामने आई है कि सोने में घपला न रुक सके, इसीलिए मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों ने मिंट कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को वहां से भगा दिया। अब एसआईटी इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या जानबूझकर पारदर्शिता को रोकने के लिए सरकारी अफसरों को हटाया गया था ताकि इस करोड़ों के सोने के घोटाले को अंजाम दिया जा सके।

अन्य खबरें