अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर ओम बिरला से की मुलाकात, 20 बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग, बागियों को दी नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की चुनौती

संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत 20 अलग-अलग याचिकाएं दायर; अभिषेक बनर्जी ने बागियों को दी नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की चुनौती।

19 Jun 2026  |  93

 

नई दिल्ली/कोलकाता।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक बड़ा राजनीतिक संकट गहरा गया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा नेता अभिषेक बनर्जी ने आज नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अपनी ही पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ सख्त और त्वरित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। बनर्जी ने इन सभी सांसदों की सदस्यता रद्द (अयोग्य घोषित) करने के लिए स्पीकर को औपचारिक याचिकाएं सौंपी हैं।

लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और बागियों को नैतिकता के आधार पर तुरंत पद से इस्तीफा देने की चुनौती दी।

'NCPI' में विलय का दावा, बनर्जी ने उठाए सवाल

घटना की पृष्ठभूमि साझा करते हुए अभिषेक बनर्जी ने बताया कि करीब 3-4 दिन पहले टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर सदन में एक अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की थी।

बनर्जी ने बागी सांसदों के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा:

"अलग गुट की मांग के कुछ ही घंटों बाद, उनमें से 2-4 सांसदों ने दावा किया कि उन्होंने 'NCPI' नामक किसी पार्टी में अपना विलय कर लिया है। यह एक ऐसी पार्टी है जिसके बारे में आज तक किसी ने सुना भी नहीं है। यह पूरी तरह से असंवैधानिक और संदिग्ध है।"

10वीं अनुसूची के तहत 20 अलग-अलग याचिकाएं

टीएमसी संसदीय दल के नेता के रूप में कड़ा रुख अपनाते हुए अभिषेक बनर्जी ने इन सांसदों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

सख्त कानूनी कदम: उन्होंने प्रत्येक बागी सांसद के खिलाफ संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत 20 अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं स्पीकर को सौंपी हैं।

संविधान का हवाला: बनर्जी ने कहा कि हमारा संविधान इस तरह के किसी भी असंवैधानिक गुट या अवैध विलय को मान्यता नहीं देता, और कानून पूरी तरह से इन बागियों के खिलाफ है।

"थोड़ी भी नैतिकता बची है तो इस्तीफा दें"

बागी सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए टीएमसी महासचिव ने उनकी राजनीतिक ईमानदारी और सत्यनिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर इन सांसदों में जरा भी नैतिकता बची है, तो वे चोर दरवाजे से राजनीति करने के बजाय तुरंत सांसद पद से इस्तीफा दें और दोबारा जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ें।

क्या कहता है कानूनी गणित? (दल-बदल विरोधी कानून)

संसद के नियमों के मुताबिक, इस मामले में कानूनी स्थिति इस प्रकार है:

नियम / अनुसूचीप्रावधानवर्तमान स्थिति
संविधान की 10वीं अनुसूचीयदि कोई निर्वाचित सदस्य स्वेच्छा से मूल पार्टी छोड़ता है या व्हिप का उल्लंघन करता है, तो उसकी सदस्यता रद्द हो सकती है।टीएमसी ने इसी आधार पर अयोग्यता की मांग की है।
2/3 (दो-तिहाई) का नियमकानूनी रूप से अलग गुट या विलय को मान्यता तभी मिलती है जब पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसद एक साथ टूटें।बागी सांसदों का यह आंकड़ा कानूनी कसौटी पर कितना खरा उतरता है, यह स्पीकर तय करेंगे।

 

अभिषेक बनर्जी की इस त्वरित और आक्रामक कानूनी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व बगावत करने वाले सांसदों को किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है। अब सबकी नजरें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अगले कदम और इस पर आने वाले कानूनी फैसले पर टिकी हैं।

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