महाराष्ट्र के संतरा किसानों पर दोहरा संकट: बांग्लादेश निर्यात से 50% सब्सिडी खत्म; भारी टैक्स के कारण बाग उजाड़ने को मजबूर अन्नदाता

घरेलू बाजारों में भारी आवक से कौड़ियों के दाम बिक रहे संतरे; दक्षिण अफ्रीका और चीन को 'टैक्स फ्री' एंट्री, भारतीय संतरों पर ₹120 का भारी शुल्क।

19 Jun 2026  |  141

 

अमरावती/मुंबई।

भारत के कृषि और बागवानी निर्यात में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महाराष्ट्र के संतरा उत्पादक किसान इस समय एक अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा बांग्लादेश को होने वाले संतरा निर्यात पर मिलने वाली 50 प्रतिशत की सब्सिडी योजना को आधिकारिक तौर पर रद्द करने के फैसले ने आग में घी का काम किया है। कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फैसले से न केवल किसान, बल्कि बड़े निर्यातक (एक्सपोर्टर्स) भी पूरी तरह टूट चुके हैं।

₹169 करोड़ की सब्सिडी पर फिरा पानी

अमरावती के प्रमुख संतरा निर्यातक ताज खान ने इस संकट की जमीनी हकीकत साझा करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने दिसंबर 2023 में बांग्लादेश को निर्यात होने वाले संतरों के लिए ₹169 करोड़ की भारी-भरकम सब्सिडी की घोषणा की थी। इस वित्तीय सहायता का उद्देश्य किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखना था। हालांकि, जून 2026 से इस सब्सिडी को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, जिससे राज्य के किसानों और व्यापारियों में भारी असंतोष और निराशा है।

बांग्लादेश का 'टैक्स चक्रव्यूह' और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा

संतरा उद्योग के घाटे में जाने की सबसे बड़ी वजह बांग्लादेश की दोहरी व्यापार नीति है:

टैक्स की चौगुनी मार: करीब 7-8 साल पहले बांग्लादेश भारतीय संतरों पर केवल ₹30 से ₹36 प्रति किलो टैक्स लेता था। आज यह शुल्क बढ़कर ₹120 प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। टैक्स बढ़ने से बांग्लादेशी बाजारों में भारतीय संतरा बेहद महंगा हो गया है और उसकी मांग घट गई है।

प्रतिद्वंद्वियों को खुली छूट: एक तरफ भारत पर भारी टैक्स लगाया गया है, तो दूसरी तरफ बांग्लादेश ने दक्षिण अफ्रीका, चीन और भूटान जैसे देशों से आने वाले संतरों को पूरी तरह 'टैक्स फ्री' (कर मुक्त) कर दिया है। इसके चलते भारतीय संतरे अंतरराष्ट्रीय रेस में पिछड़ रहे हैं।

कम शेल्फ लाइफ की मजबूरी: संतरे जल्दी खराब होने वाले (पेरिशेबल) फल हैं। शेल्फ लाइफ कम होने के कारण निर्यातक इन्हें सड़क मार्ग से बांग्लादेश के अलावा किसी अन्य सुदूर देश में आसानी से नहीं भेज सकते।

घरेलू बाजारों में अधिक आपूर्ति: घट गई किसानों की आय

बांग्लादेश का रास्ता बंद होने का सीधा असर अब देश के घरेलू बाजारों पर दिख रहा है:

"पहले जहां दिल्ली की मंडियों में रोजाना संतरे की 50 गाड़ियां भेजी जाती थीं, वहीं अब 80 से 100 गाड़ियां भेजनी पड़ रही हैं। घरेलू बाजारों में अचानक संतरे की आवक (सप्लाई) अत्यधिक बढ़ने से कीमतें औंधे मुंह गिर गई हैं। लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।" — ताज खान, संतरा निर्यातक

हताशा में बाग नष्ट कर रहे हैं किसान

लगातार हो रहे आर्थिक नुकसान और अनिश्चित भविष्य को देखते हुए महाराष्ट्र के संतरा बेल्ट (विदर्भ क्षेत्र) के कई किसानों ने अब संतरे की खेती से तौबा करना शुरू कर दिया है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कई हताश किसानों ने सालों की मेहनत से तैयार किए गए अपने संतरों के बागों को खुद ही नष्ट करना शुरू कर दिया है।

यदि सरकार ने इस दिशा में तुरंत कोई डैमेज कंट्रोल कदम या कूटनीतिक बातचीत नहीं की, तो देश के इस मशहूर 'ऑरेंज कल्टिवेशन' को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।

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