महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की बड़ी पहल: रीठी में 'कृषि उद्यमी प्रशिक्षण' की परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न, महिलाओं को मिले प्रमाण पत्र

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया RSETI और ग्रामीण आजीविका मिशन का साझा प्रयास; 35 स्व-सहायता समूह की महिलाओं को मिले प्रमाण पत्र, स्वरोजगार की ओर बढ़े कदम।

19 Jun 2026  |  156

 

रीठी (कटनी)।

मध्य प्रदेश शासन के ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक और मील का पत्थर तय किया गया है। जनपद पंचायत रीठी के अंतर्गत ग्राम पंचायत परौहा पिपरिया की बीपीएल वर्ग की स्व-सहायता समूह की 35 महिलाओं के लिए आयोजित 13 दिवसीय 'कृषि उद्यमी प्रशिक्षण' की परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है।

यह विशेष प्रशिक्षण स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) द्वारा संस्थान के प्रबंधक पवन कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण समन्वयक सुनील रजक के सक्रिय सहयोग से आयोजित किया गया था।

राष्ट्रीय स्तर के मानदंडों पर हुआ मूल्यांकन

प्रशिक्षण की समाप्ति के बाद महिलाओं की योग्यता और सीख को परखने के लिए एक औपचारिक परीक्षा का आयोजन किया गया। यह परीक्षा ग्रामीण विकास मंत्रालय (भारत सरकार, भोपाल) के रूडसेटी परीक्षा नियंत्रक एवं प्रमाणीकरण अधिकारी ओम प्रकाश चतुर्वेदी के निर्देशन में संपन्न हुई। परीक्षा में मूल्यांकन के लिए दो अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को नियुक्त किया गया था:

कृषि क्षेत्र: कृषि विषय से संबंधित व्यावहारिक और सैद्धांतिक मूल्यांकन परीक्षक रामसुख दुबे (कटनी) द्वारा किया गया।

बैंकिंग एवं स्वरोजगार: बैंकिंग, वित्तीय साक्षरता और बिजनेस मैनेजमेंट से जुड़े विषयों का मूल्यांकन प्रदीप नामदेव (दमोह) द्वारा किया गया।

उन्नत खेती से लेकर पशुपालन तक: महिलाओं ने सीखे प्रगतिशील गुर

13 दिनों के इस सघन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों की आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराया गया, ताकि वे एक सफल उद्यमी बन सकें:

आधुनिक एवं जैविक कृषि: महिलाओं को जलवायु परिवर्तन, मिट्टी परीक्षण (सॉइल टेस्टिंग), जैविक खेती, केंचुआ खाद/जैविक कीटनाशक निर्माण और फसलों में कीट व रोग नियंत्रण की विस्तृत जानकारी दी गई।

तकनीक का उपयोग: दलहन-तिलहन और नकदी सब्जी फसलों की उन्नत तकनीक के साथ-साथ स्प्रिंकलर (फव्वारा) एवं टपक (ड्रिप) सिंचाई प्रणाली और शुष्क भूमि कृषि के गुर सिखाए गए।

एकीकृत कृषि (Integrated Farming): आय बढ़ाने के लिए नर्सरी प्रबंधन, पादप प्रसार, पशुपालन, डेयरी, मछली पालन, मुर्गी पालन और बकरी पालन जैसे सहायक व्यवसायों का व्यावहारिक ज्ञान दिया गया।

वित्तीय साक्षरता: स्वरोजगार को मजबूती देने के लिए बैंकिंग सेवाओं, सरकारी अनुदान (सब्सिडी), विभिन्न प्रकार के बैंक खातों, बीमा योजनाओं और ऋण प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से समझाया गया।

प्रमाण पत्र पाकर खिले महिलाओं के चेहरे

इस पूरे आयोजन और प्रशिक्षण को सुचारू रूप से जमीन पर उतारने में स्थानीय समाजसेवी गोवर्धन रजक का विशेष और सराहनीय सहयोग रहा। परीक्षा के सफल समापन के बाद सभी संभागियों को आधिकारिक प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

प्रमाण पत्र पाकर स्व-सहायता समूह की महिलाओं के चेहरे पर आत्मनिर्भरता का आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। अब ये महिलाएं अपने गांवों में कृषि उद्यमी के रूप में नए रोजगार स्थापित कर अपने परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएंगी।

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