MP सरकार का बड़ा फैसला: अब बिना इजाजत राज्य से बाहर नहीं जा सकेंगे IAS-IPS, फिजूलखर्ची रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार का बड़ा कदम—प्रशासनिक खर्चों में कटौती के साथ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर; शाम 7 बजे के बाद दफ्तरों में बंद करनी होगी लाइटें।

21 Jun 2026  |  88

 

 

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी खर्चों में कमी लाने और वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर बेहद सख्त रुख अपना लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की ओर से जारी नए निर्देशों के मुताबिक, अब प्रदेश के IAS, IPS और सचिव स्तर के अधिकारियों को सरकारी खर्च पर दिल्ली, गुजरात या देश-विदेश के किसी भी हिस्से में यात्रा करने से पहले मुख्य सचिव (Chief Secretary) से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

वहीं, अन्य विभागों के अधिकारियों को राज्य से बाहर किसी भी शासकीय यात्रा के लिए अपने विभागीय सचिव की मंजूरी लेनी होगी। यह आदेश सभी विभागों, विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए भेज दिया गया है।

 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर जोर, यात्राओं पर लगेगी रोक

प्रशासनिक खर्च को कम करने के लिए डिजिटल माध्यमों को प्राथमिकता दी जाएगी:

डिजिटल बैठकें: सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी विभागीय बैठकें, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और सेमिनार अधिकतम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही आयोजित किए जाएं।

सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा: अधिकारियों और कर्मचारियों को दफ्तर आने-जाने के लिए अपनी निजी गाड़ियों के बजाय सार्वजनिक परिवहन, बस और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करने को कहा गया है।

 ऑफिसों में होगा 'ऊर्जा ऑडिट', शाम 7 बजे के बाद बंद होंगे उपकरण

सरकार ने ऊर्जा बचत और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर भी सख्त गाइडलाइन जारी की है:

सभी सरकारी कार्यालयों में ऊर्जा ऑडिट (Energy Audit) कराया जाएगा और बिजली की खपत पर पैनी नजर रखी जाएगी।

दफ्तरों में शाम 7 बजे के बाद अनावश्यक रूप से चल रहे पंखे, लाइट, कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अनिवार्य रूप से बंद करने होंगे।

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर संयंत्रों के प्रचार-प्रसार और स्थापना पर जोर दिया जाएगा।

 पीएम मोदी के 'मितव्ययिता फॉर्मूले' पर काम करेगी सरकार

राज्य सरकार ने इन निर्देशों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मितव्ययिता और संसाधनों के बेहतर उपयोग के विजन से जोड़ा है। सरकार का तर्क है कि वर्तमान वैश्विक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासनिक खर्चों में कटौती, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा समय की मांग है।

इसी के तहत निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश, प्लास्टिक वेस्ट बिटुमिन जैसी पर्यावरण अनुकूल सामग्री का उपयोग बढ़ाने और कृषि विभाग को प्राकृतिक व जैविक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।

 फर्जी एलपीजी कनेक्शनों पर चलेगा हंटर, तेल की खपत पर जागरूकता

सरकार केवल दफ्तरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर भी बड़े बदलाव की तैयारी में है:

अपात्र गैस कनेक्शनों की छंटनी: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और सामान्य एलपीजी कनेक्शनों में डुप्लीकेट या अपात्र कनेक्शनों की पहचान कर उन्हें हटाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही पीएनजी (PNG) नेटवर्क के विस्तार में तेजी लाई जाएगी।

सेहत की फिक्र: लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को खाद्य तेल (फूड ऑइल) के अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के प्रति जनता को जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई है।

 90 दिनों का महा-अभियान और मासिक रिपोर्ट

इस पूरी मुहिम को जमीन पर उतारने के लिए जनसंपर्क विभाग 90 दिवसीय विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाएगा। वहीं, पर्यटन विभाग को घरेलू पर्यटन को गति देने के लिए “देखो अपना देश” और “सबसे पहले मध्यप्रदेश” जैसे अभियानों को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

सख्त मॉनिटरिंग: सभी विभागों को इन नियमों के पालन की नियमित समीक्षा करनी होगी और हर महीने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को अपनी प्रगति रिपोर्ट (Monthly Report) भेजनी होगी। सरकार का मानना है कि इन कदमों से न केवल सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा, बल्कि मध्य प्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ाएगा।

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