झारखंड राज्यसभा चुनाव के बाद महा-संग्राम: 'INDIA' गठबंधन में आर-पार, राजद ने की कांग्रेस को बाहर निकालने की मांग

कैचलाइन: प्रणव झा की हार से दरकीं गठबंधन की दीवारें; भितरघात के आरोपों पर भड़का राजद, सरयू राय ने हेमंत सोरेन को दिया 'कांग्रेस मुक्त सरकार' का नया फॉर्मूला।

21 Jun 2026  |  92

 

 

रांची।

झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की सत्ताधारी राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला दिया है। संसद के उच्च सदन की दूसरी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की करारी शिकस्त के बाद सत्ताधारी महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) की एकजुटता पूरी तरह बिखरती नजर आ रही है। इस चुनावी मुकाबले ने गठबंधन के भीतर छिपे अविश्वास को सरेआम उजागर कर दिया है, जिसकी गूंज अब मुख्यमंत्री आवास की दीवारों से भी टकरा रही है। चुनाव के इस 'लिटमस टेस्ट' में फेल होने के बाद अब झारखंड की सत्ता और सियासत पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

 भरोसे का अंत: राजद और कांग्रेस में खुलेआम जुबानी जंग

इस चुनाव में करारी हार का सामना करने वाली कांग्रेस ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और वामपंथी दल माले (CPI-ML) पर खुलेआम क्रॉस वोटिंग और भितरघात का गंभीर आरोप मढ़ा है। वहीं, राजद ने भी इस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस को ही आड़े हाथों लिया है।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव परिणाम महज एक सीट की हार नहीं, बल्कि महागठबंधन के भीतर आपसी भरोसे का पूरी तरह अंत है।

राजद का तीखा हमला: राजद के राष्ट्रीय महासचिव भोला प्रसाद यादव ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी अंदरूनी कलह और कमजोरी को छिपाने के लिए सहयोगियों पर ठीकरा फोड़ रही है। उन्होंने तंज कसा कि जो दल अपने ही विधायकों को संभाल नहीं सकता, उसे दूसरों पर उंगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

 "धोखेबाज कांग्रेस को गठबंधन से बाहर करें हेमंत सोरेन"

महागठबंधन के भीतर की खाई कितनी गहरी हो चुकी है, इसका अंदाजा राजद विधायक दल के नेता सुरेश पासवान के बयान से लगाया जा सकता है। सुरेश पासवान ने बेहद सख्त लहजे में कहा:

"कांग्रेस हमेशा बड़े भाई की भूमिका में रहने का दिखावा करती है, लेकिन चुनावी मैदान में वह गठबंधन धर्म निभाने में पूरी तरह फेल साबित हुई है। हम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग करते हैं कि ऐसे धोखेबाज और अस्थिर सहयोगी को तुरंत गठबंधन से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए।"

 "अपनों ने ही परदे के पीछे से खेल किया"— कांग्रेस का दर्द

दूसरी ओर, झारखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने पार्टी का दर्द और गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि आज सत्ताधारी खेमे में चर्चा इस बात को लेकर नहीं है कि भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवाणी ने कैसे जीत हासिल की, बल्कि दर्द इस बात का है कि अपनों ने ही पीठ में छुरा घोंपा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन सहयोगियों ने भितरघात की पटकथा लिखी है, उनके चेहरों को पार्टी आलाकमान के सामने बेनकाब किया जाएगा। कांग्रेस इस गद्दारी को चुपचाप सहने के मूड में बिल्कुल नहीं है।

 फैसले की घड़ी में सीएम हेमंत: क्या बचेगी झारखंड सरकार?

इस चुनावी खींचतान का झारखंड की सत्ता पर बहुत बड़ा और दूरगामी असर पड़ने की बात कही जा रही है। गठबंधन में आई इस दरार के बीच अब अंतिम और कड़ा फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ही लेना है। सियासी गलियारों में सरकार को लेकर दो अलग-अलग तरह के दबाव बन रहे हैं:

'कांग्रेस मुक्त सरकार' का फॉर्मूला: जेडीयू विधायक सरयू राय ने जेएमएम (JMM), राजद और माले के 41 विधायकों को मिलाकर राज्य में 'कांग्रेस मुक्त सरकार' चलाने का एक नया सियासी समीकरण उछाल दिया है।

मंत्रियों को हटाने की जिद: दूसरी तरफ, घायल कांग्रेस अपनी साख बचाने के लिए सरकार से कुछ मंत्रियों को हटाने की जिद पर अड़ी हुई है।

अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस सियासी भंवर से अपनी सरकार को कैसे बचाते हैं और झारखंड की राजनीति ऊँट किस करवट बैठता है।

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