नई दिल्ली।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उपजे गंभीर भू-राजनीतिक तनाव के बाद वैश्विक समुद्री मार्ग अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। इस अनिश्चितता के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। घरेलू बाजार में कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और तेल कंपनियों के पास पर्याप्त रिजर्व स्टॉक बनाए रखने के लिए भारत ने जून 2026 में रूस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से तेल का आयात अप्रत्याशित रूप से तेज कर दिया है।
मैरीटाइम और कमोडिटी इंटेलिजेंस कंपनी 'केप्लर' (Kpler) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 19 जून तक भारत ने रूस से औसतन 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) कच्चे तेल का आयात किया है, जो मई के 19.1 लाख बीपीडी के मुकाबले एक बहुत बड़ी छलांग है। इस रिकॉर्ड खरीद के साथ ही रूस, भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता (Supplier) बना हुआ है।
तेल आयात का नया समीकरण: कौन कहाँ खड़ा है?
जून 2026 में भारतीय रिफाइनरियों द्वारा की गई तेल खरीद के आंकड़े देश की विविधीकरण (Diversification) नीति को साफ दर्शाते हैं:
| देश | जून 2026 में आयात (बैरल प्रतिदिन - bpd) | स्थिति / बदलाव |
|---|---|---|
| रूस | 26.6 लाख | भारत का नंबर-1 तेल आपूर्तिकर्ता (नया रिकॉर्ड संभव) |
| यूएई (UAE) | 6.36 लाख | मई के रिकॉर्ड 6.44 लाख bpd के करीब स्थिर |
| सऊदी अरब | 3.84 लाख | पारंपरिक और स्थिर सहयोगी |
| वेनेजुएला | 2.09 लाख | चौथा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा |
| अमेरिका | 91,000 | मई (2.52 लाख bpd) के मुकाबले भारी गिरावट |
भारत की 'डायवर्सिफाइड पॉलिसी' और होर्मुज संकट
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक होने के नाते भारत कच्चे तेल, एलएनजी (LNG) और एलपीजी (LPG) के लिए खाड़ी देशों पर काफी निर्भर है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल खपत का परिवहन ठप हो गया था।
ऐसे संकट के समय भारत की बहुआयामी रणनीति काम आई। एक तरफ रूस से मिलने वाला रियायती और सस्ता क्रूड ऑयल भारतीय रिफाइनरियों के लिए आकर्षक बना रहा, तो दूसरी तरफ यूएई और अटलांटिक क्षेत्र से बढ़ी खरीद ने होर्मुज संकट के दौरान देश की ऊर्जा सुरक्षा को कवच प्रदान किया।
संघर्षविराम के बाद रिकवरी: सबसे पहले मिलेगी LPG में राहत
हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम समझौते के बाद पिछले सप्ताह से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है, लेकिन समझौते के टिकने को लेकर बाजार में अब भी आशंकाएं हैं। केप्लर के सीनियर मैनेजर (मॉडलिंग) सुमित रितोलिया के अनुसार, "होर्मुज स्ट्रेट खुलने से भारत को सबसे तेज राहत एलपीजी (LPG) सप्लाई में मिलेगी। कच्चे तेल और एलएनजी का आयात पूरी तरह सामान्य होने में थोड़ा समय लग सकता है।"
वेनेजुएला से दोस्ती और अमेरिका से एलपीजी का नया रूट
विशेषज्ञों के मुताबिक, मार्च से ही भारतीय रिफाइनरियों ने खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुई बाधाओं की भरपाई के लिए नए मार्ग तलाश लिए थे। इसी सिलसिले में वेनेजुएला से जून में आयात बढ़कर 3 से 4 लाख बीपीडी तक पहुंचने की उम्मीद है।
इस पूरे संकट के दौरान एलपीजी (रसोई गैस) क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव देखा गया है। खाड़ी देशों से आपूर्ति प्रभावित होने के बाद अमेरिका, भारत के लिए एक प्रमुख एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। हालांकि, अमेरिका से लंबी दूरी होने के कारण परिवहन लागत (Freight Cost) जरूर बढ़ी है, लेकिन इसने भारत को आपूर्ति के मामले में किसी एक क्षेत्र पर निर्भर रहने से बचा लिया है।
साफ है कि वैश्विक मोर्चे पर जारी अशांति के बीच भारत ने अपनी मजबूत कूटनीति और समय रहते लिए गए फैसलों की बदौलत न केवल अपने नागरिकों को तेल संकट से बचाया है, बल्कि अपने रणनीतिक भंडारों को भी फुल कर लिया है।