हथियार बंद हों तो दुनिया में खुद आ जाएगी शांति, गोलियों का खर्च रोटियों पर हो तो दोनों मुल्क समृद्ध हो जाएं: कवि सुरेंद्र शर्मा

मशहूर हास्य कवि ने टीवी9 के पॉडकास्ट 'ना काहूं से बैर' में भारत-पाक संबंधों और विश्व युद्धों पर बेबाकी से रखे विचार; अमेरिका-रूस को ठहराया आपसी कलह का जिम्मेदार।

21 Jun 2026  |  72

 

 

नई दिल्ली।

अपनी अनूठी शैली और मारक हास्य से दशकों तक मंचों पर राज करने वाले देश के मशहूर कवि सुरेंद्र शर्मा ने टीवी9 भारतवर्ष के विशेष पॉडकास्ट 'ना काहूं से बैर' में शिरकत की। यहाँ उन्होंने हास्य के पुट के साथ देश, दुनिया और भारत-पाकिस्तान के रिश्तों जैसे गंभीर मुद्दों पर बेहद बेबाकी से अपने विचार साझा किए। सुरेंद्र शर्मा के दर्शन में जाति, धर्म या सरहदें आड़े नहीं आतीं, बल्कि वे हमेशा वैश्विक मंच पर आपसी मेलजोल और एकता का संदेश देते आए हैं।

 "तू खुद शांत रह, विश्व शांति अपने आप आ जाएगी"

पॉडकास्ट के दौरान सुरेंद्र शर्मा ने चंडीगढ़ का एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए 'विश्व शांति' का असली मंत्र समझाया। उन्होंने बताया:

"चंडीगढ़ में मुझे एक महिला मिलीं, जो वर्ल्ड पीस फाउंडेशन की सेक्रेट्री थीं। उन्होंने मुझसे कहा कि शर्मा जी, कुछ ऐसा मिलकर किया जाए कि दुनिया में अमन हो जाए, आतंकी हमले रुकें और विश्व शांति आ जाए। इस पर मैंने उनसे सहज भाव से कहा— बहन, तू कुछ मत कर, बस तू खुद शांति रख, विश्व शांति अपने आप आ जाएगी।"

 अमेरिका और रूस पर तीखा निशाना: "हमारी जंग से उनकी खुशहाली"

दुनिया के रसूखदार देशों के दोहरे रवैये पर उंगली उठाते हुए सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि कई देश ऐसे हैं जो केवल विश्व शांति का ढोंग रचते हैं। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि अगर ये देश हथियार बनाना बंद कर दें, तो दुनिया में युद्ध खुद-ब-खुद थम जाएंगे।

शर्मा ने दर्द बयां करते हुए कहा, "इन्हें (हथियार निर्माता देशों को) तो सुकून तब मिलता है जब दो देश आपस में लड़ रहे हों, ताकि इनके हथियारों की दुकान चलती रहे। फर्क तो अमेरिका और रूस जैसे देशों को पड़ेगा जो हमें हथियार बेचते हैं। क्या हम उनकी समृद्धि और खुशहाली के लिए आपस में लड़ रहे हैं? उनका तो मकसद ही यही है कि हम कभी आपस में मिलें ही नहीं।"

🇵🇰 भारत-पाक रिश्तों पर पीएम मोदी को सलाह: "रोटी और तरक्की की आखिरी लड़ाई लड़ें"

सुरेंद्र शर्मा ने भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने तनाव को खत्म करने के लिए एक अनोखा और मानवीय फॉर्मूला सुझाया। उन्होंने कहा कि वे हर मंच से यह बात बोलते हैं:

बातचीत की शुरुआत: "मोदी जी जाइए, पाकिस्तान के राष्ट्रपति से बात करिए। आखिर हम कब तक लड़ते रहेंगे? अब आमने-सामने की एक आखिरी लड़ाई लड़ते हैं।"

बदलाव की जंग: "यह लड़ाई सरहद पर गोलियों की नहीं, बल्कि इस बात की होनी चाहिए कि कौन अपने मुल्क की गरीबी पहले मिटाता है और कौन अपने युवाओं को पहले बेरोजगारी से निकालता है।"

गोलियों का खर्च रोटियों पर: उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यदि सरहदों पर गोलियों के पीछे होने वाला अरबों का खर्च दोनों मुल्क अपनी अवाम की रोटियों और बुनियादी जरूरतों पर करने लगें, तो भारत और पाकिस्तान दोनों ही समृद्ध हो जाएंगे।

 "अगर लड़ने वाले मुल्कों के लीडर 'ऊपर' बुला लिए जाएं, तो सारे युद्ध खत्म!"

पॉडकास्ट के अंत में उन्होंने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र करते हुए बेहद मारक बात कही। उन्होंने कहा कि नए साल पर उन्होंने भगवान के नाम एक चिट्ठी लिखी थी कि दुनिया ने तो बहुत तरक्की कर ली, लेकिन भगवान ने इंसान के ढांचे में कोई अपग्रेड नहीं किया।

सुरेंद्र शर्मा ने चुटीले अंदाज में कहा:

"भगवान को कुछ ऐसा नियम बनाना चाहिए कि जब भी दो देश आपस में लड़ें, तो वो उन दोनों देशों के लीडर्स (नेताओं) में से किसी एक को सीधे अपने पास (ऊपर) बुला लें। अगर ऐसा होने लगा, तो दुनिया के सारे युद्ध अपने आप ही खत्म हो जाएंगे, क्योंकि कोई भी नेता अपनी कुर्सी और जान की कीमत पर जंग नहीं चाहेगा। हकीकत तो यह है कि युद्ध चंद लोगों के स्वार्थ के कारण होते हैं, लेकिन उसमें पिसती और मरती हमेशा मासूम आम जनता ही है।"

अन्य खबरें