समंदर में मचा हाहाकार: फारस की खाड़ी से भारत आ रहे तेल जहाज का किराया 9 गुना बढ़ा, शिपिंग इंडस्ट्री में तहलका

अमेरिका-ईरान समझौते के बाद तेल निर्यात में आई तेजी; जहाजों की भारी किल्लत के चलते 'वर्ल्डस्केल रेट' 897% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।

24 Jun 2026  |  153

 

 

नई दिल्ली/सियोल:

फारस की खाड़ी से भारत के लिए कच्चा तेल (Crude Oil) लेकर आ रहे एक विशालकाय जहाज (सुपरटैंकर) की बुकिंग ने वैश्विक शिपिंग इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया है। इस सुपरटैंकर को सामान्य से लगभग 9 गुना (900 फीसदी) अधिक किराये पर बुक किया गया है। यह सनसनीखेज डील दक्षिण कोरियाई शिपिंग कंपनी ‘सिनोकोर’ (Sinokor) की ओर से की गई है, जिसके पास करीब 20 लाख बैरल तेल ढोने की विशाल क्षमता है।

इस जहाज को बेंचमार्क दर के 897 प्रतिशत (897 वर्ल्डस्केल पॉइंट्स) पर बुक किया गया है। इसे बेहद आसान शब्दों में ऐसे समझा जा सकता है कि यदि किसी रूट का तय स्टैंडर्ड किराया 1 डॉलर प्रति बैरल होता है, तो 897 वर्ल्डस्केल पॉइंट्स होने के बाद कंपनी अब उसी काम के लिए सीधे 8.97 डॉलर प्रति बैरल वसूल रही है।

क्यों खड़ा हुआ समंदर में जहाजों का महा-संकट?

अचानक मालभाड़े (Freight Rates) में आई इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे हालिया भू-राजनीतिक परिस्थितियां और युद्ध जिम्मेदार हैं।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी: फरवरी के आखिर में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। इसके चलते दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को करीब तीन महीने तक पूरी तरह बंद रखना पड़ा।

रूट डायवर्जन: इस समुद्री मार्ग के बंद होने के कारण ज्यादातर जहाज मालिकों ने सुरक्षा के लिहाज से अपने बेड़े को दूसरे और लंबे रास्तों पर डाइवर्ट कर दिया था।

खाली जहाजों की कमी: अब जब हालात धीरे-धीरे सुधर रहे हैं, तो उन जहाजों को वापस फारस की खाड़ी तक लौटने में कई हफ्तों का समय लग रहा है। यही वजह है कि खाड़ी के बंदरगाहों पर खाली जहाजों की उपलब्धता इस समय बेहद सीमित हो गई है।

वर्ल्डस्केल रेट्स ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

शिपिंग इंडस्ट्री में मालभाड़े की गणना ‘वर्ल्डस्केल रेट्स’ के आधार पर होती है, जिसे हर साल फारस की खाड़ी से चीन या सिंगापुर जैसे तय रूट के लिए निर्धारित किया जाता है। इसी बेस रेट के प्रतिशत (पॉइंट्स) के रूप में जहाजों की बुकिंग की जाती है।

शिपब्रोकर्स के मुताबिक, सिनोकोर की यह महंगी बुकिंग फारस की खाड़ी से सिंगापुर रूट के बेस रेट पर हुई है, जो 897 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह एक ऐसा अप्रत्याशित आंकड़ा है जिसने पूरे वैश्विक बाजार को चौंका दिया है। हालांकि, इस भारी-भरकम डील को लेकर सिनोकोर के सियोल या सिंगापुर दफ्तर की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अमेरिका-ईरान समझौते के बाद तेल निकालने की मची होड़

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ है। इस कूटनीतिक सफलता के बाद से ही तेल बाजार में अचानक भारी हलचल तेज हो गई है।

जो तेल खरीदार फरवरी से फारस की खाड़ी में अपने अटके हुए कार्गो को निकालने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, वे अब युद्ध स्तर पर टैंकरों की तलाश में जुट गए हैं। साथ ही, खाड़ी के तेल उत्पादक देश भी अपना निर्यात जल्द से जल्द बढ़ाने की होड़ में हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में सिनोकोर कंपनी सबसे ज्यादा सक्रिय भूमिका निभा रही है। कंपनी ने इराक के बसरा टर्मिनल से तेल लोड करने के लिए अपने वेरी लार्ज क्रूड कैरियर (VLCC) जहाजों को मैदान में उतार दिया है। यह कदम दिखाता है कि जहाजों को अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का पूरा भरोसा है, भले ही वहां समुद्री यातायात अभी पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाया है।

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