डिजिटल फ्रॉड के पीड़ितों को RBI की बड़ी राहत: 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए नियम, मिलेगा 85% तक मुआवजा

ओटीपी चोरी, डरा-धमकाकर पैसे ट्रांसफर कराने या जबरदस्ती में की गई ट्रांजैक्शन पर भी मिलेगा पैसा; बैंकों को 45 से 60 दिनों में पूरी करनी होगी जांच।

25 Jun 2026  |  134

 

 

मुंबई।

देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल फ्रॉड (ऑनलाइन धोखाधड़ी) के मामलों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आम बैंक ग्राहकों को एक बहुत बड़ी राहत दी है। अगर किसी साइबर ठग ने आपकी मेहनत की कमाई पर डाका डाला है, या आपको डरा-धमकाकर जबरन पैसे ट्रांसफर करवा लिए हैं, तो अब आपको अपना पैसा वापस मिल सकेगा। आरबीआई ने कम कीमत वाले डिजिटल फ्रॉड के पीड़ितों के लिए मुआवजे की एक नई और बेहद मजबूत व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक ने साफ किया है कि ये संशोधित और नए नियम 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे।

जीवन में केवल एक बार मिलेगा क्लेम, ₹25,000 तक की राहत

इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए फ्रेमवर्क के तहत छोटे डिजिटल फ्रॉड के पीड़ितों को सुरक्षा दी गई है:

85% तक मुआवजा: धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन की वजह से जिन लोगों को 50,000 रुपए तक का नुकसान हुआ है, उन्हें उनके कुल नुकसान का 85 फीसदी तक मुआवजा मिल सकता है।

अधिकतम सीमा: इस मुआवजे की अधिकतम राशि 25,000 रुपए तय की गई है।

शर्त: कोई भी खाताधारक अपने पूरे जीवनकाल में केवल एक ही बार इस विशेष व्यवस्था के तहत क्लेम का लाभ उठा सकता है।

पासवर्ड-ओटीपी चोरी और जबरदस्ती के ट्रांजैक्शन भी दायरे में

आमतौर पर बैंक पासवर्ड या ओटीपी शेयर होने पर ग्राहकों की गलती मानकर पल्ला झाड़ लेते थे, लेकिन नए नियमों में इसका दायरा बढ़ा दिया गया है। अब ऐसे मामले भी इस मुआवजे के हकदार होंगे जिनमें:

किसी जालसाज ने धोखाधड़ी से आपका पासवर्ड या ओटीपी चुराकर ट्रांजैक्शन कर लिया हो।

पीड़ित ने किसी दबाव, डिजिटल अरेस्ट के डर या जबरदस्ती में आकर खुद ट्रांजैक्शन को मंजूरी (Approve) दी हो।

बैंकों के लिए डेडलाइन: 45 से 60 दिनों में पूरी करनी होगी जांच

आरबीआई ने ग्राहकों को मानसिक तनाव से बचाने के लिए बैंकों पर भी सख्त समय-सीमा लागू की है।

जांच की अवधि: घरेलू स्तर (Domestic) पर हुए फ्रॉड के मामलों में बैंकों को 45 कैलेंडर दिनों के भीतर और क्रॉस-बॉर्डर (इंटरनेशनल) मामलों में 60 कैलेंडर दिनों के भीतर जांच पूरी करनी होगी।

यदि बैंक इस समय-सीमा के भीतर जांच पूरी नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें ग्राहक को इसकी लिखित और ठोस वजह बतानी होगी।

क्रेडिट कार्ड धारकों को 5 दिन में 'शैडो रिवर्सल' और SMS अलर्ट

क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए आरबीआई ने और भी कड़ा नियम बनाया है। कार्ड से फ्रॉड होने की सूचना मिलने के 5 कैलेंडर दिनों के भीतर बैंकों को विवादित रकम के बराबर 'शैडो रिवर्सल' (अस्थायी तौर पर रकम खाते में वापस क्रेडिट करना) देना होगा।

इसके साथ ही, सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए 500 रुपए से ज्यादा के किसी भी इलेक्ट्रॉनिक ट्रांज़ैक्शन पर तुरंत SMS अलर्ट भेजने की अनिवार्यता को बरकरार रखा गया है। आरबीआई का मानना है कि देश में आज भी एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिसके पास स्मार्टफोन या इंटरनेट नहीं है, उनके लिए तुरंत अलर्ट पाने का एकमात्र जरिया केवल SMS ही है।

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