क्रिप्टो से आगे ब्लॉकचेन: 'सिर्फ टोकन और टैक्स तक सीमित न रहे चर्चा, भारत को चाहिए मजबूत कानून' — एक्सपर्ट्स की राय

जमीन के रिकॉर्ड से लेकर डिजिटल क्रेडेंशियल्स तक में बढ़ा ब्लॉकचेन का इस्तेमाल; कानूनी जानकारों ने कहा— साइबर सिक्योरिटी और डेटा गवर्नेंस जैसे नए नीतिगत फ्रेमवर्क की है तुरंत जरूरत।

29 Jun 2026  |  142

 

 

नई दिल्ली। भारत में ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का दायरा अब सिर्फ क्रिप्टोकरेंसी या टोकन ट्रेडिंग तक सीमित नहीं रह गया है। इसका इस्तेमाल अब सरकारी और प्रशासनिक कार्यों में बड़े पैमाने पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में होने लगा है। यही वजह है कि देश के दिग्गज कानूनी और नीतिगत विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अब जब भी डिजिटल पॉलिसी या गवर्नेंस पर चर्चा हो, तो ब्लॉकचेन के व्यापक इस्तेमाल और इससे जुड़ी चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, इस उभरती हुई तकनीक के बड़े पैमाने पर उपयोग से नए कानूनी और गवर्नेंस संबंधी सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसके लिए कड़े कानून और दूरदर्शी पॉलिसियां बनाने की जरूरत है।

भारत में कहाँ-कहाँ हो रहा है ब्लॉकचेन का इस्तेमाल?

भारत वर्तमान में कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में ब्लॉकचेन तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग कर रहा है:

दस्तावेज़ सत्यापन (Document Verification) और डिजिटल क्रेडेंशियल्स।

जमीन के रिकॉर्ड (Land Records) का सुरक्षित रखरखाव।

सप्लाई चेन ट्रेसेबिलिटी (Supply Chain Traceability) यानी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी।

इसके अलावा, भारत सरकार ने प्रशासन और उद्योगों में इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए एक नेशनल ब्लॉकचेन फ्रेमवर्क (NBF) भी तैयार किया है।

सिर्फ 'क्रिप्टो' के इर्द-गिर्द सिमटी है चर्चा: हरदीप सचदेवा

एक प्रमुख आर्थिक समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक, जानी-मानी लॉ फर्म 'AZB & Partners' के सीनियर पार्टनर हरदीप सचदेवा ने इस विषय पर अपनी महत्वपूर्ण राय रखी है। उन्होंने कहा कि भारत में पॉलिसी पर होने वाली अब तक की ज्यादातर बातचीत क्रिप्टो एसेट्स के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है, क्योंकि उनसे निवेशकों की सुरक्षा, फाइनेंशियल स्टेबिलिटी, टैक्स, मनी लॉन्ड्रिंग और क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन जैसी चिंताएं जुड़ी हैं।

सचदेवा ने आगाह करते हुए कहा:

"अगर हम अपनी चर्चाओं को केवल क्रिप्टो तक ही सीमित रखेंगे, तो ब्लॉकचेन को एक मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर इस्तेमाल करने का बहुत बड़ा मौका हमारे हाथ से निकल सकता है।"

नीतिगत दायरे में इन मुद्दों को शामिल करना जरूरी

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य की नीतियों का दायरा सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं होना चाहिए कि किसी टोकन को ट्रेड कैसे किया जाए या उस पर कितना टैक्स लगेगा। इसके बजाय, नए नीतिगत ढांचे में निम्नलिखित बिंदुओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए:

डेटा गवर्नेंस और साइबर सिक्योरिटी: ब्लॉकचेन पर मौजूद डेटा की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो।

स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट और ऑडिट: स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स को लागू करने और उनके ऑडिट की कानूनी स्थिति क्या होगी।

इंटरऑपरेबिलिटी और स्टैंडर्ड्स: अलग-अलग ब्लॉकचेन नेटवर्क्स के बीच आपसी समन्वय और उनके मानक तय करना।

कानूनी स्थिति: डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर (Distributed Ledger) पर रखे गए रिकॉर्ड्स की अदालत में कानूनी मान्यता और जिम्मेदारी (Liability) तय करना।

संपादकीय टिप्पणी: समय की मांग है नया कानून जैसे-जैसे ब्लॉकचेन भारत के बड़े डिजिटल इकोसिस्टम का अभिन्न हिस्सा बनती जा रही है, वैसे-वैसे इससे जुड़े प्रशासनिक और कानूनी सवाल भी जटिल होते जा रहे हैं। क्रिप्टो से हटकर ब्लॉकचेन के सामाजिक और प्रशासनिक फायदों को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार को जल्द ही एक व्यापक और कड़ा कानून लाना होगा, ताकि सुरक्षा और विकास दोनों साथ-साथ चल सकें।

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