माटी से सोना: रांची के किसान ने ऑर्गेनिक खेती को बनाया मुनाफे का 'बिजनेस मॉडल', घर बैठे कमा रहे सालाना ₹30 लाख

लोकल बाजार को बाय-बाय, मेट्रो शहरों में हाई-डिमांड; 9 एकड़ में बिना यूरिया-केमिकल के उगा रहे 20 तरह की सब्जियां और तरबूज।

30 Jun 2026  |  147

 

 

रांची।

झारखंड की राजधानी रांची से सटे मुरकुनि गांव के किसान राम पाठक ने पारंपरिक खेती की परिभाषा बदल दी है। अपनी मेहनत, सूझबूझ और आधुनिक दृष्टिकोण के दम पर उन्होंने 9 एकड़ जमीन को मुनाफे की ऐसी 'फैक्ट्री' में बदल दिया है कि लोकल लोग आज उन्हें आदर से 'धन्ना सेठ' बुलाते हैं। राम पाठक किसी कॉर्पोरेट जॉब के बिना, सिर्फ सीजनल ऑर्गेनिक (जैविक) खेती और तरबूज उगाकर हर साल 25 से 30 लाख रुपये का बंपर मुनाफा कमा रहे हैं, और वह भी पिछले 10 सालों से लगातार।

आइए जानते हैं कि कैसे राम पाठक ने इस अनोखे कृषि मॉडल को खड़ा किया और वह देश के बड़े-बड़े शहरों में अपनी फसल बेच रहे हैं।

100% ऑर्गेनिक फॉर्मूला: जामुन के सिरके और सहजन से बनती है खाद

राम पाठक के खेतों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वहां यूरिया या किसी भी तरह के रासायनिक केमिकल का नामोनिशान तक नहीं है। वे पूरी तरह 100% जैविक तरीके से 15 से 20 तरह की सब्जियां (जैसे खीरा, भिंडी, शिमला मिर्च, मिर्च) और तरबूज उगाते हैं।

देसी खाद की सीक्रेट रेसिपी: खाद के लिए वे बाजार पर निर्भर नहीं हैं। वे गोमूत्र, सड़ा हुआ गोबर और सहजन (ड्रमस्टिक) के पत्तों का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, उनके पास जामुन के पेड़ हैं, जिनसे वे जामुन का सिरका तैयार करते हैं। इस सिरके में सरसों की खली और नीम की खली को सड़ाकर मिट्टी में डाला जाता है, जिससे पौधों को भरपूर पोषण मिलता है।

मार्केटिंग की 'मास्टरक्लास': लोकल मंडी नहीं, सीधे बड़े शहरों के मॉल्स से कनेक्शन

राम पाठक का मानना है कि किसानों की सबसे बड़ी चुनौती फसल उगाना नहीं, बल्कि उसकी सही मार्केटिंग करना है। उन्होंने एक बेहद जरूरी रणनीति साझा की:

ट्रेडर्स से डायरेक्ट कांटेक्ट: राम पाठक जानते थे कि अगर वह अपनी प्रीमियम ऑर्गेनिक सब्जियों को लोकल बाजार में ले जाएंगे, तो उन्हें सही दाम नहीं मिलेगा। इसलिए उन्होंने बड़े शहरों के स्वतंत्र व्यापारियों (ट्रेडर्स) से सीधा संपर्क साधा।

मेट्रो शहरों में धाक: आज उनके खेतों में तैयार होने वाला तरबूज और सब्जियां सीधे बोकारो, धनबाद के साथ-साथ बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों में जाती हैं।

प्रीमियम क्लास को टारगेट: बड़े शहरों के मॉल्स में जो महंगी ऑर्गेनिक सब्जियां दिखती हैं, उनमें से एक बड़ा हिस्सा राम पाठक के खेतों का होता है। वहां एक ऐसा खास वर्ग है जो सेहत के लिए सिर्फ ऑर्गेनिक सब्जियां ही खोजता है और इसके लिए दोगुनी कीमत देने को भी तैयार रहता है।

हर एकड़ का सही इस्तेमाल

राम पाठक मौसम और बाजार की मांग के हिसाब से ही कदम बढ़ाते हैं। वह अपनी 9 एकड़ जमीन के हर एक हिस्से (एकड़) में सीजन के अनुसार अलग-अलग फसलें चक्रानुक्रम (Crop Rotation) में लगाते हैं। इसी सटीक प्लानिंग का नतीजा है कि आज वह देश के लाखों युवाओं और किसानों के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं, जो यह साबित करता है कि अगर सही विजन हो, तो खेती से भी करोड़पति बना जा सकता है।

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