नई दिल्ली।
भारत को दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय की व्यय वित्त समिति (EFC) ने 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' (ISM 2.0) के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को अपनी मंजूरी दे दी है। पिछले हफ्ते समिति से पास होने के बाद अब इस मेगा प्रस्ताव को अंतिम मुहर के लिए केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।
यह नया बजट मिशन के पहले चरण (ISM 1.0) में आवंटित 76,000 करोड़ रुपये से काफी अधिक है, जो साफ दर्शाता है कि भारत सरकार वैश्विक चिप बाजार (Global Chip Market) में अपनी बादशाहत कायम करने के लिए कितनी गंभीर है।
ISM 2.0 से क्या बदलेगा? मजबूत होगा पूरा इकोसिस्टम
जहाँ 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 1.0' के तहत सरकार ने केवल चिप बनाने, असेंबली और डिजाइन से जुड़ी 10 बड़ी सुविधाओं (प्लांट्स) को मंजूरी देने पर ध्यान केंद्रित किया था, वहीं मिशन 2.0 का दायरा कहीं अधिक व्यापक है। इसके तहत पूरे सहायक सप्लायर नेटवर्क और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा, जिसमें शामिल हैं:
इंडस्ट्रियल गैस और स्पेशल केमिकल्स का स्थानीय उत्पादन।
कैपिटल इक्विपमेंट (चिप बनाने वाली मशीनरी) का निर्माण।
एमएसएमई (MSMEs) और अन्य सहायक सप्लायर्स का बड़ा नेटवर्क तैयार करना।
आयात पर निर्भरता होगी खत्म: 2030 तक 'आत्मनिर्भर भारत'
इस महा-योजना के जरिए भारत ने साल 2030 तक के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है:
75% घरेलू आपूर्ति का लक्ष्य: सरकार को पूरी उम्मीद है कि इस योजना के जमीन पर उतरते ही भारत 2030 तक अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर मांग का 75 प्रतिशत तक हिस्सा खुद देश में ही तैयार कर सकेगा। इससे ताइवान और चीन जैसे देशों से होने वाले आयात पर भारत की निर्भरता लगभग खत्म हो जाएगी।
चिप की भारी डिमांड: 65 करोड़ स्मार्टफोन यूजर्स और ₹12 लाख करोड़ का बाजार
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय काफी समय से इस मंजूरी का इंतजार कर रहा था, क्योंकि देश में इलेक्ट्रॉनिक्स की खपत और उत्पादन दोनों ही रॉकेट की रफ्तार से भाग रहे हैं:
विशाल बाजार: भारत में इस समय 65 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स हैं।
बंपर प्रोडक्शन: देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का सालाना उत्पादन 12 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है।
भविष्य की जरूरत: देश में तेजी से बन रहे एआई-आधारित सिस्टम (AI Systems), बड़े डेटा सेंटर्स और इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EVs), इन सभी की रीढ़ 'सेमीकंडक्टर चिप' ही है। ऐसे में ग्लोबल वैल्यू चेन में भारत की मजबूत हिस्सेदारी अब बेहद जरूरी हो चुकी है।
जमीन पर दिखने लगा असर: गुजरात के साणंद में पायलट प्रोडक्शन शुरू
मिशन के पहले चरण के तहत स्वीकृत 10 सेमीकंडक्टर प्लांट्स का निर्माण देश में बेहद तेजी से चल रहा है। गुजरात के साणंद में स्थित एक यूनिट में पायलट प्रोडक्शन लाइन पहले ही सफलतापूर्वक शुरू की जा चुकी है, जबकि अगले एक साल के भीतर चार और बड़ी यूनिट्स में व्यावसायिक उत्पादन (Production) शुरू होने की पूरी उम्मीद है।
भारत के इस विजन को देखते हुए एप्लाइड मैटेरियल्स, लैम रिसर्च, मर्क और लिंडे जैसी दुनिया की दिग्गज ग्लोबल कंपनियों ने भी भारत की सपोर्टिंग फैक्ट्रियों और सप्लाई चेन में भारी निवेश करना शुरू कर दिया है।