सूखे के खतरे के बीच साय सरकार का बड़ा नीतिगत फैसला, छत्तीसगढ़ में धान की जगह दाल और तेल फसलें उगाने पर मिलेंगे ₹15,000 प्रति एकड़

छत्तीसगढ़ में अल-नीनो का संकट: 'फसल परिवर्तन योजना' के लिए ₹200 करोड़ का बजट जारी

02 Jul 2026  |  141

 

 

रायपुर: छत्तीसगढ़ में मानसून के दस्तक देने के बावजूद अब तक सामान्य से 60 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। इस बीच वैश्विक मौसम प्रणाली 'अल-नीनो' (El Nino) के बढ़ते खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा और दूरगामी नीतिगत फैसला लिया है। चालू खरीफ सीजन में सूखे के संकट से किसानों को बचाने के लिए सरकार ने 'फसल परिवर्तन योजना' को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत धान के बदले कम पानी वाली दलहन (दालें) और तिलहन (तेल वाली फसलें) बोने पर किसानों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ की भारी-भरकम प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

अल-नीनो के साये में घटेगा धान का रकबा

कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक, अल-नीनो के असर से इस साल प्रदेश में धान का रकबा करीब 50 हजार हेक्टेयर तक घट सकता है। इसकी भरपाई और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए सरकार इस पूरी योजना पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है।

खरीफ का कुल लक्ष्य: इस साल खरीफ सीजन का कुल अनुमानित रकबा 48.65 लाख हेक्टेयर तय किया गया है, जिसमें अमूमन 38 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई होती है।

रणनीतिक बदलाव: कम बारिश की स्थिति में धान की फसल बर्बाद न हो, इसलिए सरकार समय रहते कम से कम 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वैकल्पिक फसलें लगवा रही है।

धान छोड़ें, दलहन-तिलहन बोएं और पाएं ₹15,000

यह योजना मुख्य रूप से उन क्षेत्रों के लिए गेमचेंजर साबित होगी जहां सिंचाई के साधन सीमित हैं या जो पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं।

यदि कोई किसान अपने खेत में धान के बदले अरहर, मूंग, उड़द (दलहन) या सोयाबीन, मूंगफली और सूरजमुखी (तिलहन) फसलों का चयन करता है, तो उसे प्रति एकड़ 15,000 रुपये की इनपुट सब्सिडी दी जाएगी।

किसे और कैसे मिलेगा योजना का लाभ?

सरकार ने इस योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कड़े और स्पष्ट नियम तय किए हैं:

पात्रता और शर्तेंलाभ की प्रक्रिया
पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन: किसान का छत्तीसगढ़ सरकार के आधिकारिक एकीकृत किसान पोर्टल (Unified Farmer Portal) पर पंजीकृत होना अनिवार्य है।डिजिटल सत्यापन: कम पानी वाले रकबे में धान की जगह दलहन/तिलहन की बुआई का गिरदावरी (Girdawari) सत्यापन किया जाएगा।
सीधा बैंक खाते में लाभ: सत्यापन प्रक्रिया पूरी होते ही प्रोत्साहन राशि DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।पारदर्शी व्यवस्था: बिचौलियों के दखल को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।

 

कृषि विशेषज्ञों की राय: खेत से बाजार तक रिस्क मैनेजमेंट

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम बेहद समयोचित है। धान की तुलना में दलहन और तिलहन फसलों को बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में अगर अल-नीनो के कारण सूखे के हालात बनते हैं, तब भी ये फसलें खेतों में सुरक्षित रहेंगी। इसके अलावा, बाजार में दालों और तिलहन के भाव अमूमन धान से बेहतर या स्थिर रहते हैं, जिससे किसानों को बाजार में अपनी उपज की 'प्रीमियम वैल्यू' (बेहतर दाम) भी मिल सकेगी। इस कदम से न सिर्फ पानी की बचत होगी, बल्कि संकट के समय में किसानों की आय भी सुरक्षित रहेगी।

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