EPF Scheme 2026: लागू हुई नई ईपीएफ योजना; जानिए क्या अब मिलेगा 8.25% से ज्यादा ब्याज और क्या बदले नियम

सरकार ने 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020' के तहत जारी किया नोटिफिकेशन; 1952 की पुरानी योजना हुई खत्म, डिजिटल सेवाओं को मिला कानूनी आधार।

03 Jul 2026  |  514

 

 

नई दिल्ली:

केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों को प्रभावित करने वाला एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020' के तहत आधिकारिक तौर पर 'कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026' (EPF Scheme 2026) को मंजूरी दे दी है। इस नई योजना ने पिछले कई दशकों से चली आ रही 'कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952' की जगह ली है।

इस ऐतिहासिक बदलाव के बाद ईपीएफओ (EPFO) के करोड़ों सब्सक्राइबर्स के मन में ब्याज दरों और नियमों को लेकर कई सवाल हैं। आइए जानते हैं नई ईपीएफ स्कीम से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सवालों के सटीक जवाब:

FAQs: नई ईपीएफ योजना (2026) और आपके सवालों के जवाब

सवाल 1: क्या नई स्कीम के तहत अब पीएफ पर पहले से ज्यादा ब्याज मिलेगा?

जवाब: नहीं, ब्याज दर में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। नई ईपीएफ योजना लागू होने के बाद भी पीएफ पर मिलने वाली ब्याज दर 8.25% पर ही बरकरार रहेगी। ईपीएफओ द्वारा 1 जुलाई 2026 को जारी सर्कुलर के अनुसार, लेबर मिनिस्ट्री ने वित्तीय वर्ष (FY) 2025-26 के लिए ईपीएफ स्कीम के हर मेंबर के खाते में 8.25% की दर से ही ब्याज जमा करने की मंजूरी दी है।

सवाल 2: क्या ईपीएफ अब पूरी तरह से सोशल सिक्योरिटी कोड के दायरे में आ गया है?

जवाब: हां। अब तक ईपीएफ योजना 'कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952' के तहत संचालित होती थी। लेकिन अब इसे आधिकारिक तौर पर 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020' के तहत ट्रांसफर कर दिया गया है। हालांकि, इस प्रशासनिक बदलाव का खाताधारकों के फायदों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

सवाल 3: प्राइवेट या छूट प्राप्त (Exempted) पीएफ ट्रस्टों के लिए क्या नया नियम है?

जवाब: नए नियमों के तहत प्राइवेट पीएफ ट्रस्टों के लिए एक कैपिंग (सीमा) तय की गई है। अब कोई भी प्राइवेट पीएफ ट्रस्ट केंद्र सरकार द्वारा घोषित ईपीएफ ब्याज दर (8.25%) से 2% से ज्यादा ब्याज नहीं दे सकेगा। इसके अलावा, ब्याज हर महीने सदस्य के अकाउंट में उसके रनिंग बैलेंस के आधार पर ही जमा किया जाएगा।

सवाल 4: क्या नई स्कीम के बाद ईपीएफओ (EPFO) की डिजिटल सेवाएं बदल जाएंगी?

जवाब: नई योजना के तहत ईपीएफओ की ऑनलाइन सेवाओं को कानूनी ढांचे (Legal Framework) का हिस्सा बना दिया गया है ताकि व्यवस्था और पारदर्शी हो सके। इसके तहत निम्नलिखित सेवाओं को अनिवार्य और मजबूत किया गया है:

रिटर्न की ऑनलाइन फाइलिंग और पीएफ रिकॉर्ड्स का इलेक्ट्रॉनिक मेंटेनेंस।

सब्सक्राइबर्स के डिजिटल अकाउंट और ई-पासबुक की सुविधा।

ऑनलाइन क्लेम सबमिशन और डिजिटल इंस्पेक्शन।

सवाल 5: क्या आपातकाल में सरकार ईपीएफ योगदान (Contribution) को घटा सकती है?

जवाब: हां, सरकार को अब यह विशेष अधिकार मिला है। ईपीएफ योजना, 2026 के तहत किसी महामारी, प्राकृतिक आपदा या गंभीर राष्ट्रीय संकट के समय केंद्र सरकार को ईपीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन को अस्थायी रूप से कम करने या टालने की शक्ति दी गई है। सरकार इस विशेष शक्ति का उपयोग अधिकतम 3 महीने के लिए कर सकती है।

सवाल 6: क्या पीएफ निकालने और ट्रांसफर करने के सामान्य नियम भी बदल गए हैं?

जवाब: नहीं, आम नियम पहले जैसे ही हैं। भले ही ईपीएफओ का पूरा कानूनी स्ट्रक्चर नए सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत अपडेट हो गया है, लेकिन सैलरीड क्लास से जुड़े ज्यादातर बुनियादी नियम यथावत हैं। पीएफ से पैसे निकालने (Withdrawal), अकाउंट ट्रांसफर करने या नॉमिनेशन (Nomination) जैसे जरूरी नियमों में कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया गया है।

निष्कर्ष:

'कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026' मुख्य रूप से ईपीएफओ के कामकाज को आधुनिक, डिजिटल और कानूनी रूप से अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लाई गई है। आम सब्सक्राइबर्स के लिए राहत की बात यह है कि उनके वित्तीय लाभ और निकासी की प्रक्रिया पहले की तरह ही सुरक्षित और आसान बनी रहेगी।

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