एआई नियमन पर भारत सरकार का बड़ा यू-टर्न: जल्द सामने आएगा देश का नया और समर्पित 'AI 'कानून'

मौजूदा कानूनों के भरोसे नहीं रहेगा देश, तेजी से बदलते तकनीकी युग में डिजिटल सुरक्षा के लिए नया ब्लूप्रिंट तैयार।

04 Jul 2026  |  351

 

नई दिल्ली।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बेलगाम रफ्तार और डीपफेक जैसी चुनौतियों के बीच भारत सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव के संकेत दिए हैं। केंद्र सरकार अब एआई को नियंत्रित करने के लिए एक पूरी तरह से समर्पित और नया कानूनी ढांचा (Dedicated Legal Framework) तैयार करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह सरकार के उस पुराने रुख से बिल्कुल अलग है, जिसमें अब तक केवल मौजूदा कानूनों के जरिए ही एआई को संभालने की बात कही जाती थी।

MeitY सचिव का बड़ा बयान: 'अब सही समय आ गया है'

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक हालिया कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने सरकार की इस नई दिशा को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा:

"सरकार सही समय आने पर एआई नियमन पर विचार करने की बात कहती रही है, और ऐसा लगता है कि अब वह समय आ गया है। मंत्रालय के स्तर पर सरकार जल्द ही एआई के लिए एक मसौदा नियम (Draft Regulation) तैयार करने की शुरुआत कर सकती है।"

क्यों बदला सरकार का नजरिया?

इससे पहले तक केंद्र सरकार का मानना था कि सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम और मध्यवर्ती (Intermediary) नियम ही डीपफेक, भ्रामक जानकारी और ऑनलाइन खतरों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं।

नवाचार बनाम नियमन: पहले सरकार का तर्क था कि बहुत जल्दी सख्त नियम लागू करने से तकनीकी नवाचार (Innovation) बाधित हो सकता है, विशेषकर तब जब देश 'इंडिया एआई मिशन' के तहत अपनी घरेलू क्षमताओं को बढ़ाने में जुटा है।

बदलती जरूरतें: हालांकि, एआई से पैदा हो रहे नए जोखिमों और इसकी वैश्विक रफ्तार को देखते हुए अब सरकार ने इसके लिए अलग और विशेष कानून बनाने की जरूरत को स्वीकार किया है।

वैश्विक पटल पर एआई नियमन: कौन कहां खड़ा है?

दुनिया भर के देश एआई को संभालने के लिए अपनी-अपनी रणनीतियां अपना रहे हैं, जिन्हें इस प्रकार समझा जा सकता है:

देश/क्षेत्रनियमन का तरीका
यूरोपीय संघ (EU)जोखिम श्रेणियों पर आधारित दुनिया का पहला और सबसे व्यापक 'एआई एक्ट' लागू किया।
चीनजनरेटिव एआई, रिकमेंडेशन एल्गोरिदम और डीप सिंथेसिस के लिए बेहद सख्त और लक्षित नियम बनाए।
ब्रिटेनसिद्धांतों पर आधारित लचीला ढांचा, जिसे मौजूदा नियामक ही संभालते हैं।
अमेरिकामुख्य रूप से कार्यकारी आदेशों और एआई कंपनियों की स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं पर निर्भर।

सुपर-एडवांस्ड एआई मॉडल तक पहुंच की कोशिश में भारत

कानूनी ढांचे के साथ-साथ भारत अपनी तकनीकी ताकत बढ़ाने के लिए वैश्विक स्तर पर रणनीतिक साझेदारी भी कर रहा है। सचिव एस. कृष्णन ने जानकारी दी कि भारत इस समय अमेरिकी सरकार और दिग्गज एआई कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) के साथ बातचीत कर रहा है।

इस संवाद का मुख्य उद्देश्य एंथ्रोपिक के सबसे उन्नत एआई मॉडल्स तक भारत की सीधी पहुंच सुनिश्चित करना है। भारत दुनिया के उन चुनिंदा और विश्वसनीय देशों के समूह में शामिल होना चाहता है, जिन्हें इन बेहद शक्तिशाली और संवेदनशील एआई प्रणालियों के सुरक्षित उपयोग की विशेष अनुमति हासिल है।

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