फिल्मों और OTT कंटेंट की पायरेसी पर टेलीग्राम को सरकार का कड़ा अल्टीमेटम: जवाबदेही तय, 15 दिनों के भीतर मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट

सिर्फ चैनल डिलीट करने से नहीं चलेगा काम; सरकार ने कड़े कानून याद दिलाकर मांगी 15 दिनों में एक्शन रिपोर्ट।

04 Jul 2026  |  301

 

 

नई दिल्ली।

फिल्मों और ओटीटी कंटेंट की बड़े पैमाने पर हो रही डिजिटल चोरी (पायरेसी) के खिलाफ केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार किया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम (Telegram) को एक आधिकारिक नोटिस जारी किया है। सरकार ने टेलीग्राम को सख्त निर्देश दिया है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर चल रहे पायरेटेड कंटेंट के खिलाफ तुरंत सख्त कदम उठाए और 15 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट सौंपे।

एक-एक चैनल हटाने का ढर्रा अब नहीं चलेगा: सरकार

सरकारी सूत्रों के अनुसार, अब सरकार पायरेटेड कंटेंट को एक-एक करके हटाने के बजाय सीधे प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने की रणनीति पर काम कर रही है। अधिकारियों ने टेलीग्राम को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है:

"टेलीग्राम सिर्फ इस बात का इंतजार नहीं कर सकता कि सरकार एक-एक करके पायरेसी चैनलों की पहचान करे और उन्हें बताए। सिर्फ प्रतिक्रिया देना और एक-एक चैनल हटाना आईटी एक्ट, 2000 और आईटी नियम, 2021 के तहत जरूरी सावधानी (Due Diligence) बरतने के लिए काफी नहीं माना जाएगा।"

कॉपीराइट उल्लंघन सिर्फ सिविल मामला नहीं, बल्कि आपराधिक अपराध

मंत्रालय ने टेलीग्राम को कड़े भारतीय कानूनों की याद दिलाते हुए साफ किया है कि फिल्मों या ओटीटी कंटेंट की चोरी कोई साधारण मामला नहीं है।

आपराधिक श्रेणी: यह कॉपीराइट एक्ट, 1957 और सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 के तहत एक गंभीर आपराधिक अपराध (Criminal Offense) है।

सख्त जांच की चेतावनी: नियमों का पालन न करने या अधूरा जवाब देने पर टेलीग्राम के खिलाफ मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत आगे की कड़ी जांच और दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

क्रिएटर इकोनॉमी की सुरक्षा के लिए उठाया कदम

सरकार के इस बड़े कदम के पीछे भारत के मनोरंजन जगत को बचाना मुख्य उद्देश्य है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से निम्नलिखित सेक्टर्स की सुरक्षा के लिए की गई है:

फिल्म इंडस्ट्री, प्रोड्यूसर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स

ब्रॉडकास्टर्स और ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स

भारत की तेजी से बढ़ती क्रिएटर इकोनॉमी

सरकार ने टेलीग्राम से यह भी पूछा है कि प्रोड्यूसर्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए उनका शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) कितना प्रभावी है और यह कैसे काम करता है।

मेटा के बाद अब टेलीग्राम पर कसा शिकंजा

पायरेसी और डिजिटल सुरक्षा को लेकर सरकार लगातार तकनीकी दिग्गजों पर नकेल कस रही है। टेलीग्राम को यह नोटिस मेटा (Meta) के खिलाफ की गई रेगुलेटरी कार्रवाई के तुरंत बाद मिला है। हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मेटा को व्हाट्सऐप के आगामी 'यूजरनेम फीचर' को लेकर नोटिस भेजा था, और इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों को बढ़ावा देने के मामले में कंपनी को तलब करने का फैसला किया है।

गौरतलब है कि इससे पहले जून में NEET परीक्षा के दौरान पेपर लीक को रोकने के लिए एहतियात के तौर पर टेलीग्राम को भारत में कुछ समय के लिए ब्लॉक भी किया गया था। ऐसे में सरकार का यह नया नोटिस टेलीग्राम के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

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