मध्य प्रदेश: भेरूंदा में 6 जुलाई को किसानों का महाआंदोलन: शत-प्रतिशत मूंग खरीदी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरेंगे हजारों किसान

'घेरा डालो, डेरा डालो' रणनीति के साथ अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी; 5000 ट्रैक्टरों पर सवार होकर हुंकार भरेंगे 200 गांवों के अन्नदाता।

04 Jul 2026  |  464

 

 

सीहोर/भेरूंदा (मध्य प्रदेश)।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र बुधनी के अंतर्गत आने वाले भेरूंदा में आगामी 6 जुलाई को एक बड़े किसान आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। किसान स्वराज संगठन के नेतृत्व में आयोजित होने वाले इस 'महाआंदोलन' को लेकर तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। प्रदेश सरकार की नीतियों के विरोध में इस बार हजारों किसान हजारों ट्रैक्टरों के साथ सड़कों पर उतरकर अपनी ताकत का अहसास कराने की रणनीति बना चुके हैं।

5,000 ट्रैक्टरों के साथ 200 गांवों के किसान भरेंगे हुंकार

किसान नेताओं के मुताबिक, इस महाआंदोलन का खाका बेहद व्यापक स्तर पर तैयार किया गया है।

गांवों की भागीदारी: भेरूंदा और रेहटी क्षेत्र के लगभग 200 गांवों के किसान अपनी-अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ भेरूंदा पहुंचेंगे।

ट्रैक्टर मार्च: अनुमान लगाया जा रहा है कि इस आंदोलन में 5,000 से अधिक ट्रैक्टरों का काफिला शामिल होगा, जो सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराएगा।

'घेरा डालो, डेरा डालो'— अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी

किसान स्वराज संगठन ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन केवल सांकेतिक नहीं होगा। संगठन ने “घेरा डालो, डेरा डालो” अभियान के तहत भेरूंदा में अनिश्चितकालीन आंदोलन का एलान किया है। किसानों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर सीधे सीहोर कलेक्टर को ही ज्ञापन सौंपेंगे। जब तक कलेक्टर मौके पर आकर ज्ञापन नहीं लेते और मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक किसान सड़कों पर ही डटे रहेंगे।

मुख्य एजेंडा: मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी

इस पूरे आक्रोश की मुख्य वजह ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल की सरकारी खरीद को लेकर बनी अनिश्चितता है।

भोपाल कूच और उग्र प्रदर्शन की चेतावनी

किसान स्वराज संगठन के जिला अध्यक्ष भगवान यदुवंशी ने आंदोलन के रुख को साफ करते हुए कहा है:

"यदि प्रदेश सरकार ने किसानों की शत-प्रतिशत मूंग खरीदी की तत्काल घोषणा नहीं की, तो समस्त किसान भेरूंदा से सीधे भोपाल के लिए रवाना होंगे और राजधानी में उग्र प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद पैदा होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए शासन-प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार होगा।"

किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से मूंग की पूरी फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने की गारंटी मांग रहे हैं। 6 जुलाई को होने वाला यह आंदोलन जहां एक ओर किसानों के इसी संचित आक्रोश को व्यक्त करेगा, वहीं दूसरी ओर सरकार को मूंग खरीदी सुनिश्चित करने के लिए मजबूर करेगा। प्रशासन भी इस बड़े जमावड़े को देखते हुए अलर्ट मोड पर आ गया है।

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