मानसून की बेरुखी: आम आदमी की थाली पर महंगाई की मार, खाद्य मुद्रास्फीति 6 % छूने का अनुमान

1901 के बाद पांचवां सबसे सूखा जून; जुलाई में भी कम बारिश की आशंका से सरकार और उपभोक्ताओं की बढ़ी चिंता।

04 Jul 2026  |  388

 

 

नई दिल्ली। कमजोर मानसून और आसमान छूती कीमतों के कारण इस साल आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ना तय नजर आ रहा है। रेटिंग एजेंसी केयरएज रेटिंग्स (CareEdge Ratings) की होलिया रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में देश में औसत खाद्य महंगाई (Food Inflation) बढ़कर 6 प्रतिशत के आसपास पहुंच सकती है। वहीं, मुख्य खुदरा महंगाई दर (Headline Retail Inflation) भी 5 प्रतिशत पर टिके रहने का अनुमान जताया गया है।

इस आसन्न संकट की मुख्य वजह मानसून की शुरुआत में हुई भारी कम बारिश है, जिसने कृषि उत्पादन और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

जून में 40% कम बारिश, 125 सालों का पांचवां सबसे सूखा महीना

मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में साल 1901 के बाद से इस बार का जून पांचवां सबसे सूखा महीना दर्ज किया गया है। 1 से 30 जून के बीच देश में सामान्य से 40 फीसदी कम बारिश हुई है। भारत के कृषि क्षेत्र के लिए दक्षिण-पश्चिम मानसून रीढ़ की हड्डी माना जाता है, क्योंकि देश की सालाना होने वाली कुल बारिश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा इसी मानसून से आता है। जून की इस भारी कमी ने खरीफ फसलों की बुआई पर सीधे तौर पर ब्रेक लगा दिया है।

जुलाई में भी राहत के आसार नहीं

चिंता की बात यह है कि संकट केवल जून तक सीमित नहीं है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी जारी की है कि जुलाई में भी मानसून की बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) के 94 फीसदी से कम रह सकती है। आईएमडी के अनुसार, देश के मध्य, पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों के बड़े इलाकों में औसत से कम बारिश होने का अनुमान है, जो देश के प्रमुख कृषि बेल्ट हैं।

महंगाई का डबल अटैक मई के महीने में खाद्य तेल की महंगाई दर पहले ही 9.5 फीसदी के उच्च स्तर पर थी। अब कमजोर मानसून के कारण दालों, सब्जियों और अनाज के उत्पादन में कमी आने की आशंका है, जिससे आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों की कीमतें और भड़क सकती हैं।

सरकार और आम आदमी दोनों की बढ़ीं मुश्किलें

खाद्य सुरक्षा और कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनने जा रहा है। यदि जुलाई में भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले त्योहारी सीजन में आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है। केयरएज रेटिंग्स की यह रिपोर्ट साफ संकेत दे रही है कि इस वित्त वर्ष में आर्थिक मोर्चे पर महंगाई से निपटना नीति निर्माताओं के लिए सबसे टेढ़ी खीर साबित होगा।

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