भारत-इंडोनेशिया के बीच महाडील; फाइटर जेट्स ने किया पीएम के विमान का एस्कॉर्ट, सबांग पोर्ट से अस्त्र मिसाइल तक कई ऐतिहासिक समझौते

समंदर में बढ़ी भारत की ताकत: रक्षा से लेकर मिनरल्स तक जकार्ता के साथ नई दोस्ती की इबारत; इंडोनेशिया खरीदेगा भारतीय 'अस्त्र' मिसाइलें, चीन की घेराबंदी के लिए सबांग पोर्ट होगा विकसित।

07 Jul 2026  |  1092

 

जकार्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया की आधिकारिक राजकीय यात्रा भारत के लिए सामरिक और कूटनीतिक लिहाज से बेहद ऐतिहासिक साबित हुई है। जकार्ता पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का किसी 'ग्लोबल सुपरहीरो' की तरह भव्य और अभूतपूर्व स्वागत किया गया। जैसे ही पीएम मोदी का विमान इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ, वहां की वायु सेना के फाइटर जेट्स ने उनके विमान को आसमान में एस्कॉर्ट किया। हवाई अड्डे पर खुद इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने प्रोटोकॉल तोड़कर व्यक्तिगत रूप से पीएम मोदी की अगवानी की।

राष्ट्रपति भवन 'इस्ताना मर्देका' में दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद रक्षा, तकनीक, मिनरल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में कई गेम-चेंजर समझौते हुए हैं।

रक्षा क्षेत्र में भारत का डंका: 'अस्त्र' खरीदेगा इंडोनेशिया

भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक का लोहा अब दुनिया मान रही है। भारत की हवा से हवा में मार करने वाली 'अस्त्र' (Astra) मिसाइल की जबरदस्त कामयाबी को देखते हुए इंडोनेशिया ने भारत से इस मिसाइल की खेप खरीदने का बड़ा फैसला किया है। इसके अलावा, इंडोनेशिया अपने ब्रह्मोस मिसाइल के स्टॉक को लगातार बढ़ा रहा है, जिसे और अधिक मजबूत बनाने के लिए भारत उसे 'ब्रह्मोस मिसाइल बैटरी' की अतिरिक्त सप्लाई करेगा।

मलक्का स्ट्रेट में चीन को घेरने की तैयारी: विकसित होगा 'सबांग पोर्ट'

सामरिक दृष्टिकोण से इस यात्रा की सबसे बड़ी कामयाबी सबांग पोर्ट (Sabang Port) का संयुक्त विकास है। सूत्रों के मुताबिक, भारत और इंडोनेशिया मिलकर मलक्का स्ट्रेट के बेहद करीब स्थित इस पोर्ट को डेवलप करेंगे।

महत्व: यह पोर्ट भारत के 'ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट' से महज 100 मील की दूरी पर है। इसके विकसित होने से हिंद महासागर और मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) में भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी, जो सीधे तौर पर इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते दखल का माकूल जवाब होगी।

इंडोनेशिया में लोकतंत्र को मजबूत करेगा भारत; EVM निर्माण में मदद

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अब वह अपनी चुनावी तकनीक को दुनिया के साथ साझा कर रहा है। समझौतों के तहत, भारत इंडोनेशिया की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वहां खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के निर्माण और तकनीकी विकास में बड़ी मदद मुहैया कराएगा।

क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन पर बड़ी डील

भविष्य की जरूरतों और सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए दोनों देशों ने मिनरल सेक्टर में हाथ मिलाया है। भारत अब इंडोनेशिया में स्टील, निकेल और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (Rare Earth Permanent Magnets) की मैन्युफैक्चरिंग और प्रोसेसिंग में भारी निवेश करेगा, जिससे भारत की ईवी (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री को सीधा फायदा पहुंचेगा।

6 साल बाद पहली द्विपक्षीय यात्रा: संबंधों का नया स्वर्णिम युग

विदेश मंत्रालय का बयान:

"यह यात्रा भारत-इंडोनेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक मील का पत्थर है। इससे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे और दोनों देशों को जोड़ने वाले गहरे भरोसे, साझा मूल्यों और स्थायी मित्रता को मजबूती मिलेगी।"

क्यों खास है यह दौरा? साल 2018 में जब दोनों देशों के बीच संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) का दर्जा दिया गया था, उसके बाद से किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली द्विपक्षीय यात्रा है। हाल के वर्षों में नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यासों और रक्षा सहयोग के चलते नई दिल्ली और जकार्ता के रिश्ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) रूप से बेहद मजबूत हो चुके हैं।

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