प्रशांत महासागर में ड्रैगन की बड़ी हिमाकत: परमाणु पन डुब्बी से दागी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल, अमेरिका और सहयोगियों में हड़कंप,बचाव में उतरा रूस

समंदर से सीधे अमेरिका पर अचूक निशाना: पहली बार चीन ने सार्वजनिक रूप से कबूला परमाणु पनडुब्बी से मिसाइल टेस्ट; फिलीपींस-ताइवान ने बताया उकसावे की कार्रवाई

07 Jul 2026  |  1107

 

बीजिंग/वाशिंगटन।

प्रशांत महासागर के अशांत पानी में चीन (ड्रैगन) ने एक बार फिर अपनी खतरनाक सैन्य महत्वाकांक्षाओं का प्रदर्शन कर पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। चीन ने अपनी एक परमाणु पनडुब्बी से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (JL-2) का सफल परीक्षण किया है। यह इतिहास में पहली बार है जब चीन ने खुले तौर पर प्रशांत महासागर में परमाणु पनडुब्बी से इस श्रेणी की मिसाइल दागने की बात सार्वजनिक रूप से कबूल की है। हालांकि चीन इसे एक 'सामान्य और सालाना सैन्य अभ्यास' का हिस्सा बता रहा है, लेकिन इस परीक्षण ने अमेरिका समेत उसके सहयोगी देशों की रातों की नींद उड़ा दी है।

क्यों डरा अमेरिका? सीधे मुख्य भूमि तक मार करने की क्षमता

रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, यह परीक्षण केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि वाशिंगटन को सीधी चेतावनी है।

समुद्र से महाविनाश की ताकत: इस सफल परीक्षण से चीन ने यह साबित कर दिया है कि उसकी नौसेना अब अपने सुरक्षित समुद्री इलाके (Home Waters) में रहते हुए ही सीधे अमेरिका की मुख्य भूमि (US Mainland) को निशाना बना सकती है।

रणनीतिक बदलाव: अब चीन की परमाणु मारक क्षमता सिर्फ जमीन से दागी जाने वाली मिसाइलों (Silos) तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह समुद्र के भीतर छिपी परमाणु पनडुब्बियों से भी अमेरिका को तबाह करने की क्षमता हासिल कर चुका है।

दुनिया भर में तीखी प्रतिक्रिया: किसने क्या कहा?

चीन की इस हरकत के बाद वैश्विक मंच पर हड़कंप मच गया है और कई देशों ने ड्रैगन को आड़े हाथों लिया है:

अमेरिका: अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, "एक तरफ जहां अमेरिका परमाणु हथियारों को रोकने की कोशिश कर रहा है, वहीं चीन इसके उलट अपने परमाणु जखीरे का गुप्त विस्तार कर रहा है। चीन को इसे तुरंत रोकना चाहिए।"

फिलीपींस व ताइवान: फिलीपींस ने इसे सैन्य ताकत का 'लापरवाह प्रदर्शन' कहा है। वहीं, ताइवान के राष्ट्रीय सुरक्षा सचिव जोसेफ वू ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि यह मिसाइल फिलीपींस के ऊपर से गुजरी। चीन खुद को इस इलाके का 'बॉस' साबित करने की सनक में लगा है।

जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड: इन देशों ने इसे क्षेत्र को अस्थिर करने वाला कदम बताया। न्यूजीलैंड ने इस बात पर नाराजगी जताई कि उन्हें टेस्ट से महज कुछ घंटे पहले सूचित किया गया। सोलोमन द्वीप के पीएम मैथ्यू वेल ने चीनी राजनयिकों के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया।

ड्रैगन के बचाव में उतरा रूस: जहाँ पूरी दुनिया चीन के इस कदम की निंदा कर रही है, वहीं रूस खुलकर अपने दोस्त के बचाव में आ गया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि मिसाइल टेस्ट करना चीन का 'संप्रभु अधिकार' है और इससे किसी को खतरा नहीं है।

आंकड़ों में समझिए दुनिया की असली चिंता

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के अनुमानित आंकड़े बताते हैं कि चीन किस तेजी से परमाणु महाशक्ति बनने की होड़ में शामिल है:

समय सीमाचीन के पास अनुमानित परमाणु हथियार
वर्तमान समयलगभग 600 परमाणु हथियार
वर्ष 2030 तक (अनुमानित)1,000 से अधिक परमाणु हथियार

 

प्रशांत महासागर बना महाशक्तियों का अखाड़ा

प्रशांत महासागर में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही कूटनीतिक और सैन्य तनातनी चल रही है। चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में फिजी, वनुआतु और सोलोमन द्वीप जैसे रणनीतिक देशों के साथ सुरक्षा समझौते किए हैं। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में चीन का यह मिसाइल परीक्षण साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में महाशक्तियों के बीच यह मुकाबला और ज्यादा आक्रामक होने वाला है।

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