बांकीपुर उपचुनाव के बीच पटना में NDA का महामंथन: 10 जुलाई को नीतीश-सम्राट की मौजूदगी में बड़ी बैठक, प्रशांत किशोर की एंट्री ने बढ़ाई सियासी तपिश

पीके (PK) के चुनावी डेब्यू से गरमाई बिहार की राजनीति; सीएम सम्राट चौधरी ने बुलाई एनडीए की साझा बैठक, नीतीश कुमार भी रहेंगे मौजूद; जिला स्तर तक अभेद्य किलेबंदी की तैयारी।

07 Jul 2026  |  1218

 

 

पटना।

बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव ने राज्य के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। इस चुनावी तपिश के बीच सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने आगामी 10 जुलाई को एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी बैठक बुलाई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा आहूत इस बैठक में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के सुप्रीम लीडर नीतीश कुमार भी विशेष रूप से मौजूद रहेंगे।

राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि क्या यह महाबैठक बांकीपुर सीट पर एनडीए के पारंपरिक गढ़ को बचाने और वहां से पहली बार चुनावी मैदान में उतरे जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की घेराबंदी के लिए बुलाई गई है?

पटना से लेकर जिला स्तर तक अचूक 'समन्वय' की तैयारी

10 जुलाई को होने वाली इस बैठक का स्वरूप काफी व्यापक रखा गया है। इसमें एनडीए के पांचों घटक दलों के प्रदेश व जिला स्तर के पदाधिकारी, सरकार के सभी मंत्री और वरिष्ठ नेता एक मंच पर जुटेंगे।

रणनीति को लेकर जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने साफ किया:

"एनडीए में हम लोग लगातार बैठकर चर्चा करते रहते हैं। हमारा उद्देश्य बिहार के विकास के लिए बेहतर समन्वय (Coordination) के साथ काम करना है। पिछले 20 वर्षों में हमने जो काम किया है, उसे आगे बढ़ाते हुए अगले पांच वर्षों में घोषणा-पत्र के वादों को जमीन पर उतारना हमारी प्राथमिकता है। यह समन्वय सिर्फ पटना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिला स्तर पर भी पांचों दलों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया जाएगा।"

प्रशांत किशोर की एंट्री से क्यों दिलचस्प हुआ बांकीपुर का दंगल?

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का अभेद्य किला रही है। हाल ही में यहाँ के विधायक नितिन नवीन को राज्यसभा भेजे जाने के बाद यह सीट खाली हुई है, जिस पर 30 जुलाई को मतदान होना है।

पीके का पहला दांव: चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने इसी सीट से चुनाव लड़कर अपने चुनावी करियर का डेब्यू करने का एलान किया है।

एनडीए की साख का सवाल: नई नवेली सम्राट चौधरी सरकार और दो महीने पुरानी कैबिनेट के लिए यह उपचुनाव एक बड़े 'एसिड टेस्ट' या जनमत संग्रह की तरह देखा जा रहा है। यही वजह है कि एनडीए किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है और 10 जुलाई की बैठक में जमीनी फीडबैक के आधार पर चक्रव्यूह रचा जाएगा।

सीएए (CAA) और संवैधानिक मुद्दों पर जेडीयू का रुख

बैठक के एजेंडे से इतर मीडिया द्वारा पूछे गए एक अहम सवाल पर संजय झा ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि देश हमेशा संविधान और कानून के दायरे में ही चलता है और उनकी पार्टी इसी के अनुरूप काम करती है। सीएए (CAA) से जुड़े बयानों पर उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं देखा है और बिहार में फिलहाल ऐसा कोई मुद्दा नहीं है; राज्य में स्थितियां पूरी तरह सामान्य और नियंत्रण में हैं।

10 जुलाई की इस बैठक से साफ है कि एनडीए न सिर्फ बांकीपुर उपचुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंकने जा रही है, बल्कि संगठनात्मक और प्रशासनिक स्तर पर भी सहयोगियों के बीच किसी भी तरह के 'कम्युनिकेशन गैप' को खत्म करने की तैयारी में है। अब सबकी निगाहें इस बैठक से निकलने वाले राजनीतिक संदेश पर टिकी हैं।

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