साल 2100 तक डूब जाएगी मुंबई? डूबने की कगार पर तटीय शहर; कॉपरनिकस रिपोर्ट में खुलासा, मुंबई को बचाने के लिए 'क्लाइमेट एक्शन प्लान' पर काम शुरू

मानसून ही नहीं, अब समंदर से भी मुंबई को खतरा: 2100 तक 4 फीट बढ़ सकता है जलस्तर, नरीमन पॉइंट और धारावी समेत कई इलाके संवेदनशील,सामान्य से 11°C गर्म हुआ उत्तरी ध्रुव, मुंबई को बचाने के लिए 'क्लाइमेट एक्शन प्लान' पर काम शुरू।

07 Jul 2026  |  1128

 

 

मुंबई।

हर साल मानसून की चंद घंटों की बारिश में डूबने वाली देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के सामने अब एक और भयानक और स्थायी संकट आकर खड़ा हो गया है। जलवायु वैज्ञानिकों (Climate Scientists) ने चेतावनी दी है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र का जलस्तर जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे भविष्य में मुंबई की चुनौती केवल मानसूनी बारिश तक सीमित नहीं रहेगी।

जलवायु आकलनों के मुताबिक, यदि वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन को तुरंत नियंत्रित नहीं किया गया, तो वर्ष 2100 तक समुद्र का जलस्तर 3 से 4 फीट या उससे भी अधिक बढ़ सकता है। ऐसी भयावह स्थिति में मुंबई का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा अलग-अलग स्तर पर जलभराव और समुद्री बाढ़ की चपेट में आ सकता है।

कॉपरनिकस की डराने वाली रिपोर्ट: रिकॉर्ड स्तर पर पिघल रही बर्फ

यूरोपीय संघ की मौसम एजेंसी 'कॉपरनिकस' की हालिया रिपोर्ट के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं:

उत्तरी ध्रुव में गर्मी: फरवरी 2025 में उत्तरी ध्रुव (North Pole) के आसपास का तापमान सामान्य से रिकॉर्ड 11 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया।

सिकुड़ती बर्फ: आर्कटिक और अंटार्कटिका में समुद्री बर्फ का कुल क्षेत्रफल घटकर लगभग 1.60 करोड़ वर्ग किलोमीटर रह गया है, जो इतिहास के सबसे निचले स्तरों में से एक है। यही पिघलती बर्फ वैश्विक समुद्री जलस्तर को तेजी से बढ़ा रही है।

मुंबई के कौन से इलाके सबसे ज्यादा खतरे में?

विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई पूरी तरह समुद्र में समा जाएगी, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन 2050 और 2100 के बीच ऊंचे ज्वार (High Tides) और चक्रवाती तूफानों के दौरान समंदर का पानी शहर के काफी अंदर तक प्रवेश कर जाएगा।

अति संवेदनशील (निचले इलाके): नरीमन पॉइंट, कफ परेड, गिरगांव, बांद्रा, वर्सोवा और धारावी। इन इलाकों में बार-बार समुद्री पानी घुसने और ज्वारीय बाढ़ का खतरा सबसे ज्यादा है।

अपेक्षाकृत सुरक्षित (ऊंचाई वाले इलाके): मालाबार हिल, कंबाला हिल, पाली हिल, पवई और संजय गांधी नेशनल पार्क समुद्र तल से काफी ऊपर होने के कारण सुरक्षित माने जा रहे हैं।

वैश्विक रडार पर भारत समेत दुनिया के कई महानगर

समुद्र का यह बढ़ता जलस्तर केवल मुंबई ही नहीं, बल्कि वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े शहरों के अस्तित्व के लिए खतरा बन चुका है:

भारत में जोखिम वाले क्षेत्रवैश्विक स्तर पर खतरे में पड़े शहर
मुंबई, कोलकातान्यूयॉर्क (अमेरिका)
केरल के तटीय इलाकेलंदन (ब्रिटेन)
तमिलनाडु और कर्नाटक के तटटोक्यो (जापान) और मालदीव

 

बचाव की कवायद: 'मुंबई क्लाइमेट एक्शन प्लान' लागू

इस महासंकट से मुंबई को बचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर रणनीतियाँ तैयार की जा रही हैं:

सी-वॉल का निर्माण: समुद्री लहरों के सीधे प्रहार और तटीय कटाव को रोकने के लिए आधुनिक सी-वॉल और मजबूत तटीय सुरक्षा ढांचे बनाए जा रहे हैं।

MCAP रणनीति: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने 'मुंबई क्लाइमेट एक्शन प्लान' (MCAP) लागू किया है। इसके तहत कार्बन उत्सर्जन में कटौती, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और शहरी हरित क्षेत्र (Green Cover) को बढ़ाने पर काम चल रहा है।

निष्कर्ष: वैज्ञानिकों का स्पष्ट मानना है कि सिर्फ स्थानीय स्तर पर दीवारें खड़ी करने या पेड़ लगाने से मुंबई को नहीं बचाया जा सकता। जब तक पूरी दुनिया मिलकर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के वैश्विक प्रयासों में तेजी नहीं लाएगी, तब तक मुंबई समेत दुनिया के तमाम तटीय शहरों पर विनाश का यह साया मंडराता रहेगा।

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