दिग्विजय सिंह का बड़ा दांव: 'चंदा चोरों' के खिलाफ उज्जैन से अयोध्या तक निकालेंगे पदयात्रा, बोले- "अब सिर्फ धर्म की रक्षा करूँगा"

सियासी झंडे-बैनर से दूर 1000 किलोमीटर की गैर-राजनीतिक यात्रा; 'चंदा चोरों' पर बैनर लगाकर घिरे पूर्व CM, बीजेपी ने 'जाकिर नाइक' का नाम लेकर किया पलटवार!

07 Jul 2026  |  1069

 

 

भोपाल।

मध्य प्रदेश की सियासत में राम मंदिर के चंदे को लेकर एक बार फिर घमासान मच गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 'राम मंदिर चंदा चोरी' से आहत होकर आगामी 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से उज्जैन से अयोध्या तक एक भव्य पदयात्रा शुरू करने का ऐलान किया है। इस यात्रा से पहले दिग्विजय सिंह ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अब वे राजनीति से अलग होकर सिर्फ और सिर्फ धर्म की रक्षा करेंगे।

1. "आखिरी सांस तक धर्म की रक्षा, कोई राजनीति नहीं"

दिग्विजय सिंह ने साफ किया कि उनकी इस यात्रा के पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। भाजपा, आरएसएस (RSS) और वीएचपी (VHP) पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा:

"मैं सनातन धर्म को भी समझता हूँ और BJP, VHP व RSS को भी। अब मेरा एकमात्र मकसद धर्म की रक्षा करना है और अपनी आखिरी सांस तक मैं इस कार्य को करता रहूँगा। इस यात्रा में कोई राजनीति शामिल नहीं है।"

2. राहुल गांधी नहीं, चार गोली खाने वाले 'कारसेवक' होंगे मुख्य अतिथि

जब दिग्विजय सिंह से पूछा गया कि क्या वे इस यात्रा में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को आमंत्रित करेंगे, तो उन्होंने स्पष्ट मना कर दिया।

कोई वीआईपी आमंत्रण नहीं: दिग्विजय सिंह ने कहा, "मैं यात्रा में किसी (बड़े नेता) को नहीं बुलाऊँगा।"

संतोष दुबे होंगे मुख्य अतिथि: उन्होंने ऐलान किया कि इस यात्रा के मुख्य अतिथि 'संतोष दुबे' होंगे। संतोष दुबे वही कारसेवक हैं, जिन्हें राम मंदिर आंदोलन के दौरान चार बार गोली लगी थी।

3. यात्रा का स्वरूप: 1000 किमी का सफर, सोशल मीडिया से दूरी

दिग्विजय सिंह ने अपनी इस पदयात्रा को लेकर कुछ कड़े नियम तय किए हैं:

दूरी और रूट: यात्रा मध्य प्रदेश के उज्जैन से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक जाएगी, जो लगभग 1000 किलोमीटर लंबी होगी।

प्रतिदिन का लक्ष्य: यात्रा के दौरान हर रोज 10 से 15 किलोमीटर पैदल चला जाएगा।

नो सोशल मीडिया: यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह न तो फेसबुक (Facebook) का इस्तेमाल करेंगे और न ही ट्विटर (X) का।

बिना झंडे की यात्रा: इस यात्रा में किसी भी राजनीतिक दल का झंडा या बैनर इस्तेमाल नहीं होगा। इसमें वे सभी लोग शामिल हो सकते हैं जिनकी भगवान राम में आस्था है और जिन्होंने राम मंदिर के लिए चंदा दिया है।

घर के बाहर लगाया विवादित बोर्ड:

दिग्विजय सिंह ने भोपाल स्थित अपने सरकारी निवास के बाहर एक विवादित बैनर भी टांग दिया है, जिस पर लिखा है— 'राम मंदिर के चंदा चोरों और चढ़ावा चोरों का प्रवेश वर्जित है।' इस बैनर के बाद से ही मध्य प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है।

4. बीजेपी का तीखा पलटवार: "जाकिर नाइक को भी बुला लें दिग्विजय"

दिग्विजय सिंह के इस कदम और 'चंदा चोरी' के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है।

डॉ. हितेश वाजपेयी (बीजेपी प्रवक्ता): उन्होंने दिग्विजय सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि "दिग्विजय सिंह को विवादित इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक और उनके जैसी विचारधारा वाले लोगों को भी इस यात्रा में शामिल होने के लिए बुला लेना चाहिए।"

हेमंत खंडेलवाल (प्रदेश अध्यक्ष): उन्होंने कहा कि राम मंदिर देश के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, जिसे सबके सामूहिक प्रयास से बनाया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार इसके विकास के लिए कड़े कदम उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा देश की सनातन आस्था को ठेस पहुँचाने का काम किया है और यह यात्रा भी उसी पाखंड का हिस्सा है।

निष्कर्ष: 2 अक्टूबर से शुरू होने वाली यह यात्रा भले ही 'गैर-राजनीतिक' होने का दावा कर रही हो, लेकिन उज्जैन से अयोध्या तक के इस 1000 किलोमीटर के रास्ते में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के कई तीखे तीर चलने तय हैं।

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