झारखंड: JPSC परीक्षा विवाद: JLKM ने खोला मोर्चा, राज्यपाल से मिलकर की CBI जांच और मुख्य परीक्षा स्थगित करने की मांग, न्याय नहीं मिला तो सड़क तक होगा महासंग्राम!

लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल; जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो बोले—'न्याय नहीं मिला तो हाईकोर्ट से लेकर सड़क तक होगा महासंग्राम!'

07 Jul 2026  |  914

 

 

राँची। 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रारंभिक परीक्षा (PT) के परिणामों को लेकर सूबे में सियासी और छात्र आंदोलन की तपिश बढ़ गई है। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) ने परीक्षा परिणामों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सीधे राजभवन का रुख किया है। मोर्चा के उपाध्यक्ष और प्रखर छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर उन्हें इस पूरे मामले से अवगत कराया और एक मांग पत्र सौंपा।

JLKM ने राज्यपाल से पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या किसी अन्य सक्षम उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच कराने और आगामी मुख्य परीक्षा को तत्काल स्थगित करने की पुरजोर मांग की है।

मुख्यमंत्री से मुलाकात और जेपीएससी घेराव की चेतावनी

राजभवन से बाहर निकलने के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने मीडिया से बात करते हुए कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा:

"यह मामला सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य और संवैधानिक संस्थाओं की साख से जुड़ा है। हम इस मुद्दे को अपनी पार्टी के विधायक जयराम महतो के साथ मिलकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष उठाएंगे। अगर सरकार ने सुध नहीं ली, तो हम अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और जेपीएससी का पुरजोर घेराव करेंगे।"

छात्र नेता ने बेहद आक्रोशित लहजे में यह भी कहा कि अगर इसके बावजूद भी आयोग छात्रों की जायज बात नहीं सुनता है, तो युवाओं का व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा और लोग ऐसी निकम्मी संस्थाओं को उड़ाने की बात करने लगेंगे।

पीटी परीक्षा परिणाम में भारी गड़बड़ी के आरोप

देवेंद्र नाथ महतो ने बताया कि कुछ दिनों पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए उन्होंने परीक्षा परिणाम से जुड़ी जिन विसंगतियों को उजागर किया था, आज उन्हीं तथ्यों से महामहिम राज्यपाल को विस्तार से अवगत कराया गया है। उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु सामने रखे:

हस्ताक्षर विहीन परिणाम: आयोग द्वारा जारी किए गए रिजल्ट पर संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं हैं।

कट-ऑफ का रहस्य: श्रेणीवार (Category-wise) कट-ऑफ अंकों को सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे पारदर्शिता पूरी तरह गायब है।

ओएमआर शीट वायरल: सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ओएमआर शीट और उससे जुड़े दावों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

18 जुलाई से होने वाली मुख्य परीक्षा टालने की मांग

JLKM ने राज्यपाल से मांग की है कि जब तक पूरे मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती और कट-ऑफ जारी नहीं होता, तब तक 18, 19 और 20 जुलाई 2026 को प्रस्तावित मुख्य परीक्षा को तत्काल स्थगित किया जाए।

महतो ने व्यावहारिक कठिनाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्य परीक्षा के लिए फॉर्म भरने और तैयारी के लिए छात्रों को मात्र 7 दिनों का समय दिया गया है। इतने कम समय में जाति, स्थानीय, आय, क्रीमीलेयर और दिव्यांगता जैसे आवश्यक प्रमाण-पत्र बनवाना और परीक्षा की तैयारी करना किसी भी अभ्यर्थी के लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

"लड़ाई किसी राज्य या अभ्यर्थी से नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ है"

अपनी बात को स्पष्ट करते हुए छात्र नेता ने कहा कि जेएलकेएम किसी भी राज्य या किसी विशेष अभ्यर्थी के खिलाफ नहीं है। संगठन की यह लड़ाई विशुद्ध रूप से झारखंड के युवाओं को एक निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायपूर्ण भर्ती प्रक्रिया दिलाने के लिए है। उन्होंने मांग की कि भविष्य में जेपीएससी की सभी परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और दोषी अधिकारियों व एजेंसियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई हो।

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