खरीफ 2026 पर एल नीनो और खाद संकट का साया: बदलती जलवायु के बीच 'जैविक समाधान' बने किसानों की ढाल

कम बारिश और महंगी खाद से निपटने के लिए मिट्टी की सेहत सुधारना जरूरी; जाइटोनिक जैसी आधुनिक तकनीकें टिकाऊ खेती और बेहतर मुनाफे की राह दिखाएंगी।

07 Jul 2026  |  704

 

 

नई दिल्ली। भारत की कृषि व्यवस्था काफी हद तक मानसून के मिजाज पर टिकी हुई है। हर साल देश के करोड़ों अन्नदाता खरीफ सीजन का बेसब्री से इंतजार करते हैं, लेकिन चालू वर्ष 2026 किसानों के लिए कई बड़ी चुनौतियां लेकर आया है। एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के कारण यूरिया और अन्य जरूरी उर्वरकों (खाद) की उपलब्धता और कीमतों पर भारी दबाव है, वहीं दूसरी तरफ मौसम वैज्ञानिकों ने इस साल एल नीनो (El Niño) के सक्रिय होने की गंभीर चेतावनी दी है।

ऐसी विपरीत परिस्थितियों में जब सामान्य से कम बारिश और ऊंचे तापमान की आशंका है, कृषि विशेषज्ञ पारंपरिक रासायनिक खेती के बजाय जैविक और टिकाऊ कृषि तकनीकों (सस्टेनेबल फार्मिंग) को अपनाने पर जोर दे रहे हैं।

एल नीनो का खतरा: क्यों बढ़ी है किसानों की चिंता?

एल नीनो प्रशांत महासागर के सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की एक प्राकृतिक घटना है, जो वैश्विक मौसम चक्र को बिगाड़ देती है। भारत के संदर्भ में, इसका सीधा असर कमजोर मानसून, अनियमित वर्षा, लंबे सूखे और भीषण गर्मी के रूप में देखा जाता है।

फसलों पर असर: मानसून में देरी या बारिश के बीच लंबा सूखा आने से फसलों को उनकी महत्वपूर्ण अवस्थाओं—जैसे अंकुरण (Germination), पौधों की वृद्धि, फूल आने और दाना भरने के समय पर्याप्त नमी नहीं मिल पाती। पानी की इस कमी से पौधों का विकास रुक जाता है और अंततः पैदावार में भारी गिरावट आती है।

खरीफ सीजन में यूरिया का संकट और बढ़ती लागत

मौसम की मार के साथ-साथ इस साल किसानों को खाद की कमी का भी सामना करना पड़ सकता है। आंकड़ों के अनुसार:

खरीफ सीजन में देश को लगभग 18 से 19.4 मिलियन टन यूरिया की जरूरत होती है।

इस बार शुरुआती स्टॉक सीमित है, और वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण यूरिया का घरेलू उत्पादन व आयात दोनों प्रभावित हुए हैं।

हालांकि सरकार ने सब्सिडी बढ़ाकर खुदरा कीमतों को नियंत्रित रखा है, लेकिन जमीनी स्तर पर बुवाई के समय किसानों को समय पर पर्याप्त खाद मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

मिट्टी की सेहत और जल संरक्षण: 'जायटोनिक' तकनीक बनी उम्मीद की किरण

बदलते दौर में केवल रासायनिक खादों पर निर्भर रहना खेती को घाटे का सौदा बना रहा है। यही वजह है कि अब जैव-आधारित और सूक्ष्मजीव (Microbial) तकनीकों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

इस संकट काल में Zydex की Zytonic Technology (जायटोनिक टेक्नोलॉजी) पर आधारित उत्पाद, जैसे कि Zytonic Suraksha और Zytonic Mini Kit, किसानों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।

तकनीक/समाधानकिसानों को मिलने वाले मुख्य लाभ
जल संरक्षणमिट्टी की जलधारण क्षमता (Water Retention) को बढ़ाकर कम पानी में भी फसलों को हरा-भरा रखता है।
खाद की बचतमिट्टी में पहले से मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्वों को सक्रिय करता है, जिससे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है।
मौसम से सुरक्षाएल नीनो जैसी कठिन परिस्थितियों और बढ़ते तापमान के प्रति पौधों की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।

 

विशेषज्ञों की राय: भविष्य की खेती को सुरक्षित रखने का एकमात्र रास्ता मिट्टी की जैविक सेहत को सुधारना है। जैव-उर्वरक न केवल पौधों को भरपूर पोषण देते हैं, बल्कि पानी की हर एक बूंद का सही इस्तेमाल सुनिश्चित कर विपरीत मौसम में भी किसानों का उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ाते हैं।

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