दुबई/वॉशिंगटन:
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बार फिर युद्ध की भीषण चिंगारी भड़क उठी है। अमेरिकी सैन्य बल, यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर विनाशकारी हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। सेटकॉम के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से ईरान के 80 रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध के बादल गहरा गए हैं।
क्यों भड़का अमेरिका? (हमले की वजह)
अमेरिका का रुख साफ है कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में निर्दोष नागरिकों वाले कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों को लगातार निशाना बनाने के जवाब में की गई है। हाल ही में ईरान ने दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' में तीन तेल टैंकरों पर हमला किया था, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हड़कंप मच गया था।
अमेरिका ने ईरान की इस आक्रामकता को गैर-जरूरी और खतरनाक बताते हुए कहा कि यह पिछले महीने दोनों देशों के बीच हुए द्विपक्षीय सीजफायर (युद्धविराम) का सीधा और स्पष्ट उल्लंघन है।
इन प्रमुख ठिकानों को बनाया गया निशाना
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह बेहद सटीक और आक्रामक हमला था जिसका मकसद ईरान की युद्ध क्षमता को पंगु बनाना है। हमलों में मुख्य रूप से निम्नलिखित को निशाना बनाया गया:
एयर डिफेंस सिस्टम और तटीय निगरानी प्रणाली।
सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (SAMs)।
एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें और ड्रोन लॉन्च पैड्स।
जमीनी हालात: दक्षिणी ईरान के प्रमुख बंदरगाह शहरों— सिरीक, केशम और बंदर अब्बास में भीषण धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इन शहरों में आसमान में धुएं का गुबार देखा जा सकता है।
ईरान की तीखी प्रतिक्रिया: 'अंजाम भुगतने को तैयार रहे अमेरिका'
इस भीषण हमले के बाद ईरान का रुख भी बेहद सख्त है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक आधिकारिक पोस्ट जारी कर अमेरिका को सीधी चेतावनी दी है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा:
"अमेरिका द्वारा समझौते का उल्लंघन किए जाने के नतीजे बेहद गंभीर होंगे। ईरान अपने राष्ट्रीय हितों, संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए कोई भी आवश्यक और कड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।"
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच इस सीधे टकराव से वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर बेहद बुरा असर पड़ सकता है। यदि ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई होती है, तो यह संघर्ष एक पूर्ण महायुद्ध का रूप ले सकता है।