बिहार को औद्योगिक हब बनाने की तैयारी: 'MSME नीति-2026' का मसौदा जारी, 1 करोड़ रोजगार का लक्ष्य

महिलाओं और SC-ST को मिलेगा 10% अतिरिक्त अनुदान; हर जिले में बनेंगे नैनो और मेगा पार्क!

08 Jul 2026  |  1146

 

 

पटना:

बिहार को पूर्वी भारत का प्रमुख औद्योगिक और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। बिहार सरकार द्वारा 'बिहार एमएसएमई नीति-2026' का प्रारूप (मसौदा) जारी कर दिया गया है। इस महत्वाकांक्षी नीति का मुख्य लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एक करोड़ एमएसएमई इकाइयों का पंजीकरण करना और राज्य के युवाओं के लिए एक करोड़ से अधिक रोजगार के अवसरों का सृजन करना है।

इसके साथ ही, बिहार की 500 एमएसएमई इकाइयों को वैश्विक वैल्यू चेन (Global Value Chain) से जोड़ने का भी बड़ा खाका तैयार किया गया है।

आम जनता से मांगे गए सुझाव

इस नीति को पूरी तरह समावेशी बनाने के लिए सरकार ने इच्छुक व्यक्तियों और विशेषज्ञों से 15 दिनों के भीतर ई-मेल के माध्यम से सुझाव मांगे हैं। इन सुझावों की समीक्षा के बाद ही नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

पूंजी सब्सिडी: किसे कितना मिलेगा फायदा?

इस नई नीति में निवेशकों और नए उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए भारी पूंजी सब्सिडी (Capital Subsidy) का प्रविधान किया गया है:

ए श्रेणी के जिले: उद्यमियों को 25 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी मिलेगी।

बी श्रेणी के जिले: उद्यमियों को 30 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी मिलेगी।

उद्यम के अनुसार अधिकतम सब्सिडी सीमा:

सूक्ष्म (Micro) उद्यम: अधिकतम ₹25 लाख तक।

लघु (Small) उद्यम: अधिकतम ₹1.5 करोड़ तक।

मध्यम (Medium) उद्यम: अधिकतम ₹5 करोड़ तक।

विशेष प्रोत्साहन: महिला, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), पिछड़ा, अति-पिछड़ा, दिव्यांग और मंगलामुखी (ट्रांसजेंडर) उद्यमियों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त पूंजी अनुदान दिया जाएगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प: नैनो और मेगा पार्क

बिहार के हर जिले में उद्योगों के लिए जमीन और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को दूर करने के लिए विशेष पार्कों का निर्माण किया जाएगा:

नैनो पार्क: प्रत्येक जिले में 10 से 20 एकड़ क्षेत्र में छोटे उद्योगों के लिए विकसित किए जाएंगे।

मेगा एमएसएमई पार्क: 20 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बड़े स्तर पर तैयार होंगे।

अन्य सुविधाएं: इसके अलावा कॉमन फैसिलिटी सेंटर, हेरिटेज क्लस्टर, परीक्षण प्रयोगशालाएं और 'प्लगे-एंड-प्ले' औद्योगिक ढांचा विकसित किया जाएगा।

टेक्नोलॉजी सेंटर और एक्सपोर्ट सेल का गठन

चार नए केंद्र: कोसी, भागलपुर, मुंगेर और पूर्णिया परिक्षेत्र में चार टेक्नोलॉजी एवं एक्सटेंशन सेंटर स्थापित होंगे, जहां प्रतिवर्ष 1 लाख उद्यमियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा।

एक्सपोर्ट सेल: बिहार के लोकल उत्पादों को वैश्विक बाजार देने के लिए एक विशेष 'एक्सपोर्ट सेल' का गठन होगा। साथ ही खरीदार-विक्रेता सम्मेलन और ई-कॉमर्स नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा।

पंचायत स्तर पर तैनात होंगे 'उद्योग सलाहकार'

उद्यमियों की मदद के लिए सरकार एक मजबूत ग्राउंड नेटवर्क तैयार कर रही है:

हर जिला उद्योग केंद्र (DIC) में एमएसएमई केंद्र बनेगा।

प्रखंड (ब्लॉक) स्तर पर 'एमएसएमई मित्र' और पंचायत स्तर पर 'उद्योग सलाहकार' नियुक्त होंगे, जो सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता की जानकारी सीधे उद्यमियों तक पहुंचाएंगे।

इसके अलावा सहायता के लिए एमएसएमई हेल्पलाइन, डिजिटल पोर्टल, मोबाइल ऐप और चैटबॉट भी लॉन्च किए जाएंगे।

नीति के अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय प्रविधान

ईपीएफ प्रतिपूर्ति: नई इकाइयों को पहले 3 वर्षों तक कर्मचारियों के ईपीएफ (EPF) में नियोक्ता अंशदान की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जाएगी।

बिजली और ऊर्जा: 3 वर्ष तक बिजली शुल्क पर 20 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। रूफटॉप सोलर लगाने पर 25 प्रतिशत (अधिकतम ₹5 लाख) की मदद दी जाएगी।

टैक्स और स्टाम्प ड्यूटी: स्टाम्प ड्यूटी की 100% प्रतिपूर्ति होगी और 6 वर्षों तक एसजीएसटी (SGST) की 50% प्रतिपूर्ति की जाएगी।

निर्यात सहायता: निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रति वर्ष अधिकतम ₹20 लाख की वित्तीय सहायता दी जाएगी।

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