बंगाल में सियासी घमासान: बरुईपुर कांड के विरोध में उतरीं ममता बनर्जी ने अपने ही कार्यकर्ता को जड़ा थप्पड़! बीजेपी का तंज- 'खो चुकी हैं मानसिक संतुलन'

बरुईपुर रेप-मर्डर के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कालीघाट पर मची अफरा-तफरी; भीड़ संभालने उतरीं पूर्व सीएम का फूटा गुस्सा, अपनी ही पुलिस को भी लिया आड़े हाथों।

08 Jul 2026  |  799

 

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है। सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी बरुईपुर में हुए जघन्य बलात्कार और हत्याकांड के विरोध में आज अपने कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतरीं। इस दौरान कोलकाता के कालीघाट स्थित उनके आवास के सामने एक ऐसी अप्रत्याशित घटना घटी, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। प्रदर्शन के दौरान मची अफरा-तफरी को शांत कराने नीचे उतरीं ममता बनर्जी ने अचानक अपने ही एक कार्यकर्ता को सरेआम थप्पड़ जड़ दिया।

इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद राज्य के सियासी गलियारों में गरमाहट चरम पर पहुंच गई है और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पूर्व मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है।

भीड़ को संभालते वक्त फूटा गुस्सा, वजह अब भी सस्पेंस

चश्मदीदों और सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी हाथ में माइक लेकर अपने पुराने आक्रामक अंदाज में भीड़ को संबोधित कर रही थीं। इसी बीच कालीघाट स्थित उनके घर के ठीक सामने भारी अव्यवस्था और धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई। माहौल को बिगड़ता देख ममता बनर्जी खुद मंच से नीचे उतरीं। इसी दौरान उन्होंने सामने मौजूद एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया, जिसकी पहचान टीएमसी कार्यकर्ता के रूप में हुई है। हालांकि, ममता बनर्जी ने उसे थप्पड़ क्यों मारा, इसकी आधिकारिक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है, लेकिन माना जा रहा है कि भीड़ के बेकाबू होने पर पूर्व सीएम अपना आपा खो बैठीं।

बीजेपी का तीखा प्रहार: "हार के बाद मानसिक स्थिरता बिगड़ रही है"

इस घटना को लपकते हुए बीजेपी ने ममता बनर्जी को चौतरफा घेरना शुरू कर दिया है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने इस वाकये पर तंज कसते हुए कहा:

"चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी की मानसिक स्थिरता पूरी तरह बिगड़ चुकी है। सरेआम अपने ही कार्यकर्ता पर हाथ उठाना यह साफ दर्शाता है कि वह इस वक्त किस कदर हताशा और मानसिक तनाव में हैं।"

अपनी ही पुलिस और प्रशासन पर भड़कीं ममता बनर्जी

कार्यकर्ता को थप्पड़ मारने की घटना के इतर ममता बनर्जी ने राज्य के पुलिस प्रशासन के खिलाफ भी जमकर गुबार निकाला। उन्होंने रैली में बाधा डालने के लिए सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया।

प्रशासन को लताड़ते हुए पूर्व सीएम ने कहा: "मुझे सूचना मिली कि हमारे आईटी सेल के अध्यक्ष को घेरकर उन पर हमला किया गया है, मैं उन्हें बचाने गई थी। आखिर सूबे में कानून कहाँ है? हमारे कार्यकर्ताओं को नारे लगाने से रोका जा रहा है। मैं इसके लिए बीजेपी को नहीं, बल्कि सीधे तौर पर प्रशासन को दोष दे रही हूं। रैली का शांतिपूर्ण आयोजन सुनिश्चित करना आपकी (पुलिस की) जिम्मेदारी थी।"

ममता बनर्जी ने आगे आरोप लगाया कि हाई कोर्ट की अनुमति के बावजूद पुलिस मूकदर्शक बनी रही और भाजपा के लोग प्रदर्शन में घुस आए, जिन्होंने टीएमसी कार्यकर्ताओं के हैंड माइक छीन लिए और उनके साथ मारपीट की।

"बंगाल में बदतर हो रहे हैं हालात, दो महीनों में 14 से ज्यादा बलात्कार"

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य की वर्तमान कानून-व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि बंगाल में हालात अब बद से बदतर होते जा रहे हैं, जिसकी कल्पना देश का कोई नागरिक नहीं कर सकता।

ममता बनर्जी द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु:

दमनकारी कार्रवाई: बरुईपुर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों को कल गिरफ्तार किया गया।

महिलाओं पर अत्याचार: दुर्गापुर, बर्दवान, भगवानपुर, पताशपुर, बेहाला और मालदा जैसी जगहों पर महिलाओं को बर्बरतापूर्वक प्रताड़ित किया गया है।

चौंकाने वाले आंकड़े: पिछले मात्र दो महीनों के भीतर राज्य में 14 से अधिक लड़कियों और महिलाओं के साथ बलात्कार और प्रताड़ना की घटनाएं हुई हैं, जिनमें से कई की हत्या कर दी गई।

ममता बनर्जी ने प्रशासन से हर मसले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की अपील की है। बहरहाल, बरुईपुर की घटना पर न्याय मांगने उतरीं ममता बनर्जी का खुद कार्यकर्ता पर हाथ उठाना, अब उनके लिए ही गले की हड्डी बनता नजर आ रहा है।

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