AI पर महाशक्तियों में 'शीत युद्ध': अमेरिका की तर्ज पर चीन ने भी उठाया बड़ा कदम; एडवांस्ड AI तकनीक के निर्यात पर लगेगा कड़ा पहरा

अलीबाबा, बाइटडांस और Z.ai के साथ चीनी अधिकारियों की सीक्रेट मीटिंग; राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत AI लीक को 'अपराध' मानने की तैयारी, सिलिकॉन वैली में मची हलचल।

08 Jul 2026  |  1007

 

बीजिंग / वाशिंगटन।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया अब सिर्फ तकनीकी विकास का जरिया नहीं, बल्कि वैश्विक महाशक्तियों के बीच वर्चस्व की सबसे बड़ी 'राष्ट्रीय संपत्ति' बन चुकी है। अमेरिका के बाद अब चीन ने भी अपनी अत्याधुनिक AI तकनीक और मॉडल्स को देश की सीमा से बाहर जाने से रोकने के लिए कमर कस ली है। बीजिंग को सबसे बड़ा डर अपने सबसे एडवांस्ड AI मॉडल्स के लीक होने या विदेशी ताकतों द्वारा चोरी किए जाने का है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी वाणिज्य मंत्रालय और नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन (NDRC) के आला अधिकारियों ने पिछले महीने देश की दिग्गज टेक कंपनियों के साथ कई दौर की गुप्त बैठकें की हैं। इस मंथन का एकमात्र उद्देश्य चीन के सबसे एडवांस्ड AI मॉडल्स को देश के भीतर ही कैद रखना है।

बैठक में शामिल रहीं अलीबाबा और बाइटडांस जैसी दिग्गज कंपनियां

सूत्रों के अनुसार, इन अत्यंत गोपनीय बैठकों में चीन की सबसे बड़ी टेक कंपनियां जैसे अलीबाबा (Alibaba), बाइटडांस (ByteDance) और तेजी से उभरता हुआ स्टार्टअप Z.ai शामिल थे। स्थिति की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बैठक में शामिल अधिकारियों और प्रतिनिधियों को मीडिया से बात करने तक की इजाजत नहीं थी।

वर्तमान में अलीबाबा का Qwen और बाइटडांस का Doubao चीन में सबसे लोकप्रिय एआई मॉडल्स हैं। वहीं, Z.ai के नए GLM-5.2 मॉडल ने अपनी कम लागत और अमेरिकी मॉडल्स के बराबर क्षमताओं के कारण हाल ही में सिलिकॉन वैली (अमेरिका) की नींद उड़ा रखी है।

AI चोरी पर मिलेगी 'देशद्रोह' जैसी कड़ी सजा!

मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि चीनी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि घरेलू प्रोप्राइटरी AI टेक्नोलॉजी के किसी भी तरह के लीक या अनधिकृत निर्यात को चीन के कड़े 'राष्ट्रीय सुरक्षा कानून' के तहत गंभीर अपराध माना जाएगा। इसके अलावा सरकार दो अन्य बड़े प्रतिबंधों पर भी विचार कर रही है:

फंडिंग पर रोक: घरेलू एआई स्टार्टअप्स में कौन विदेशी नागरिक या कंपनी निवेश कर सकती है, इस पर कड़े नियम बनाए जाएंगे।

अधिग्रहण रद्द करना: विदेशी कंपनियों द्वारा चीनी एआई स्टार्टअप्स के टेकओवर को रोका जाएगा (जैसे हाल ही में मेटा द्वारा चीनी स्टार्टअप 'Manus' के $2 बिलियन के अधिग्रहण सौदे को बीजिंग ने रद्द करवा दिया था)।

तुलनात्मक समीकरण: एआई रेस में चीन बनाम अमेरिका

विश्व स्तर पर बढ़ते एआई खतरों को देखते हुए दोनों ही देश एक-दूसरे की तकनीक को ब्लॉक करने में जुटे हैं:

देशसुरक्षा उपाय और हालिया कदममुख्य चिंता
चीन (China)

* 'DeepSeek R1' और 'GLM-5.2' की विदेशी पहुंच सीमित करना।


 

* लीक करने पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई।


 

* विदेशी फंडिंग और अधिग्रहणों पर सख्त पाबंदी।

* अमेरिका द्वारा चीन के हितों के खिलाफ एआई (जैसे अमेरिकी Mythos सॉफ्टवेयर) का इस्तेमाल करने का डर।
अमेरिका (USA)

* जो बाइडन के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन भी बेहद सख्त।


 

* जून में 'Anthropic' के सबसे एडवांस्ड Fable और Mythos मॉडल के विदेशी एक्सेस पर रोक।

* अमेरिकी AI प्रोडक्ट्स का गलत इस्तेमाल चीन या रूस की मिलिट्री इंटेलिजेंस द्वारा किए जाने की आशंका।

वैश्विक बाजार पर क्या पड़ेगा असर?

पिछले साल जब चीन का DeepSeek R1 मॉडल लॉन्च हुआ था, तो अपनी बेहद कम लागत के चलते वह दुनिया भर के बिजनेस के लिए पहली पसंद बन गया था। साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि बीजिंग ने अपने ओपन-वेट और क्लोज्ड-सोर्स मॉडल्स पर एक्सपोर्ट कंट्रोल (नियंत्रण) कड़ा कर दिया, तो वैश्विक स्तर पर कई टेक कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए परिचालन लागत (Operational Cost) काफी बढ़ जाएगी।

फिलहाल, चीनी अधिकारियों ने 'Manus' समेत कई उन लोकल स्टार्टअप्स की जांच भी शुरू कर दी है जो विदेश स्थानांतरित हो चुकी हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने एक्सपोर्ट कानूनों का उल्लंघन किया है या नहीं। साफ है कि आने वाले दिनों में तकनीक की यह जंग और भी आक्रामक मोड़ लेने वाली है।

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