बिहार में उच्च शिक्षा की नई क्रांति: 15 जुलाई को भागलपुर से मुख्यमंत्री कर सकते हैं बड़ी घोषणाएं, AI, कौशल विकास और औद्योगिक प्रशिक्षण अब अनिवार्य

211 प्रखंडों को मिलेंगे नए डिग्री कॉलेज; स्नातक छात्रों के लिए AI, कौशल विकास और औद्योगिक प्रशिक्षण अब अनिवार्य।

09 Jul 2026  |  1408

 

 

भागलपुर / पटना। बिहार में उच्च शिक्षा के परिदृश्य को बदलने और इसे आधुनिक तकनीकी दौर के अनुरूप ढालने के लिए राज्य सरकार एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। आगामी 15 जुलाई को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भागलपुर के गोराडीह प्रखंड स्थित कासिल का दौरा कर सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि इसी ऐतिहासिक मंच से मुख्यमंत्री राज्य के उन 211 प्रखंडों में उच्च शिक्षा के विस्तार और नए डिग्री कॉलेजों के संचालन की नई तिथि की घोषणा करेंगे, जहाँ अब तक एक भी डिग्री कॉलेज मौजूद नहीं है।

यद्यपि जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री के इस प्रस्तावित दौरे की आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है, लेकिन कासिल स्थित प्रस्तावित डिग्री कॉलेज परिसर से पूरे बिहार में शिक्षा क्रांति का एक नया अध्याय शुरू होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

कासिल से शुरू होगा बुनियादी ढांचे का नया युग

प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री उच्च माध्यमिक विद्यालय, कासिल के खेल मैदान में बनने वाले नए डिग्री कॉलेज भवन और उसकी आधुनिक आधारभूत संरचनाओं के विकास की आधारशिला या घोषणा कर सकते हैं।

बिहार सरकार इस कॉलेज को पहले ही स्वीकृति दे चुकी है और यहाँ नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। वर्तमान में, कॉलेज का संचालन अस्थाई रूप से उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर के सात कमरों (एक कार्यालय और छह कक्षाएं) से किया जाएगा, जहाँ छह विषयों की पढ़ाई होगी।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा नया परिसर: विद्यालय के खेल मैदान में बनने वाले स्थाई और भव्य भवन में छात्रों को वैश्विक स्तर की सुविधाएं मिलेंगी। नए परिसर में आधुनिक स्मार्ट कक्षाएं, सीसीटीवी निगरानी, उन्नत बेंच-डेस्क, पंखे और एयर कंडीशनिंग (AC) जैसी अत्याधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। यह पहल तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय द्वारा भेजे गए प्रखंडवार प्रस्ताव के आधार पर फलीभूत हुई है।

सात निश्चय-3: शिक्षा से वंचित प्रखंडों का कायाकल्प

बिहार सरकार अपने 'सात निश्चय-3' कार्यक्रम के तहत शिक्षा के क्षेत्र में असमानता को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके अंतर्गत राज्य के उन 211 प्रखंडों में नए राजकीय डिग्री महाविद्यालय खोले जा रहे हैं, जहाँ के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए मीलों दूर जाना पड़ता था।

इन कॉलेजों का संचालन पूर्व में 1 जुलाई से शुरू होना था, लेकिन भवन निर्माण, आधारभूत सुविधाओं की स्थापना और शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में हुए आंशिक विलंब के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब 15 जुलाई या उसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा इसके संचालन की नई आधिकारिक तिथि घोषित होने की प्रबल संभावना है, जिससे पूरे सूबे में इस अभियान को तीव्र गति मिलेगी।

सिर्फ डिग्री नहीं, रोजगार की गारंटी: स्नातक में AI और कौशल विकास अनिवार्य

उच्च शिक्षा को पूरी तरह रोजगारोन्मुख बनाने के लिए राज्यपाल सचिवालय ने एक क्रांतिकारी नीतिगत निर्णय लिया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत अब बिहार के स्नातक छात्रों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की पढ़ाई, कौशल विकास (Skill Development) और औद्योगिक प्रशिक्षण (Industrial Training) को अनिवार्य कर दिया गया है।

यह ऐतिहासिक व्यवस्था राज्य के सभी 268 अंगीभूत कॉलेजों के साथ-साथ नवसृजित 211 राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में भी प्रभावी होगी। नए कॉलेजों में अगले सत्र से इसे पूरी तरह लागू करने के लिए राज्यपाल सचिवालय एक 'कॉमन प्रोग्राम' तैयार करवा रहा है।

राज्यपाल सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस दूरगामी बदलाव पर प्रकाश डालते हुए कहा:

"अब छात्रों को सिर्फ कागजी डिग्री लेने तक सीमित नहीं रखा जा सकता। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल पारंपरिक डिग्री के भरोसे नौकरी मिलना आसान नहीं है। इसीलिए स्नातक स्तर पर ही AI शिक्षा, कौशल विकास और प्रैक्टिकल इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग को शामिल कर उच्च शिक्षा के पूरे ढांचे को बदला जा रहा है, ताकि बिहार का युवा सीधे रोजगार के बाजार के लिए तैयार हो सके।"

मुख्यमंत्री के इस संभावित दौरे और राजभवन के इस कड़े रुख से साफ है कि बिहार अब पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था से आगे बढ़कर 'डिजिटल और स्किल्ड' भविष्य की ओर कदम बढ़ा चुका है।

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