नई दिल्ली: देशभर में E20 पेट्रोल (80% पेट्रोल और 20% इथेनॉल मिश्रण) को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और वाहन मालिकों के बीच बहस छिड़ी हुई है। माइलेज कम होने और इंजन खराब होने की आशंकाओं के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस पर एक बड़ा और बेहद महत्वपूर्ण बयान दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है और माइलेज में 30% तक गिरावट के दावे महज एक अफवाह हैं।
'दिखाएं एक भी खराब इंजन' — नितिन गडकरी की खुली चुनौती
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सभी सवालों को सिरे से खारिज करते हुए कहा:
"देश में अब तक ऐसा एक भी प्रामाणिक मामला सामने नहीं आया है, जिसमें E20 पेट्रोल के कारण किसी वाहन का इंजन सीज या खराब हुआ हो। मुझे देश में एक भी ऐसी गाड़ी दिखा दीजिए, जिसे इस ईंधन से नुकसान हुआ हो। इसे लागू करने से पहले देश की शीर्ष एजेंसियों जैसे ARAI, SIAM और इंडियन ऑयल ने व्यापक परीक्षण किए हैं।"
आखिर कितना कम होता है माइलेज?
गडकरी ने माना कि चूंकि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (कैलोरीफिक वैल्यू) शुद्ध पेट्रोल से थोड़ी कम होती है, इसलिए माइलेज में करीब 3 से 4 प्रतिशत की मामूली कमी आ सकती है।
वही, इस विषय पर नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि विभिन्न वाहनों पर किए गए परीक्षणों में ईंधन दक्षता में औसतन 6% तक की कमी देखी गई है, जो कि वाहन के मॉडल, ड्राइविंग स्टाइल, टायर प्रेशर और एसी के इस्तेमाल पर भी निर्भर करता है। सरकार ने साफ किया कि 30% माइलेज गिरने की बातें पूरी तरह निराधार हैं।
क्या इंजन को सच में पहुंचता है नुकसान?
लंबे समय तक किए गए तकनीकी परीक्षणों की रिपोर्ट के अनुसार:
इंजन में किसी भी प्रकार की असामान्य घिसावट, कार्बन जमा होना या इंजन ऑयल की खराबी जैसी कोई गंभीर समस्या नहीं पाई गई।
अत्यधिक ठंडे या गर्म, दोनों ही मौसमों में गाड़ियां सामान्य रूप से स्टार्ट और संचालित हुईं।
बदले जाएंगे पुराने पार्ट्स: नितिन गडकरी ने बताया कि पुरानी गाड़ियों के कुछ प्लास्टिक या रबर पार्ट्स (जैसे वॉशर/सील) पर इथेनॉल का असर हो सकता है। इसके लिए वाहन कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि जब भी ऐसी गाड़ियां सर्विसिंग के लिए आएं, तो कंपनियां इन पार्ट्स को बिना कोई अतिरिक्त चार्ज लिए मुफ्त (फ्री) में बदलें।
क्यों जरूरी है E20 ईंधन? सरकार के 3 बड़े लक्ष्य
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और नितिन गडकरी दोनों का मानना है कि माइलेज में मामूली कमी के मुकाबले इस ईंधन के देश को होने वाले फायदे कहीं ज्यादा बड़े हैं:
आयात पर निर्भरता कम करना: इससे विदेशों से महंगे कच्चे तेल के आयात में कटौती होगी और देश की विदेशी मुद्रा बचेगी।
किसानों की आय में बढ़ोतरी: इथेनॉल का उत्पादन गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से होता है, जिससे सीधे तौर पर देश के अन्नदाताओं को आर्थिक लाभ मिल रहा है।
पर्यावरण की सुरक्षा: इससे वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।
सरकार ने साल 2025-26 का अपना तय लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया है और अब भविष्य में E85 और E100 (100% इथेनॉल) जैसे और अधिक पर्यावरण अनुकूल ईंधनों की दिशा में कदम बढ़ा रही है।