नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते भू-राजनीतिक संकट और ईरान युद्ध की तपिश अब भारतीय अर्थव्यवस्था और देश की दिग्गज तेल कंपनियों की बैलेंस शीट पर साफ दिखने लगी है। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी ने भारत की टॉप तीन सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) — IOCL, BPCL और HPCL — की मुश्किलें चरम पर पहुंचा दी हैं।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (जून तिमाही) में इन तीनों कंपनियों को कुल मिलाकर करीब ₹47,700 करोड़ का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ सकता है।
100 दिनों की जंग, कच्चे तेल में भारी उछाल
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 6 फीसदी का उछाल आया, और बाजार में यह तेजी लगातार बनी हुई है। गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर शुरू किए गए हमले के बाद यह संघर्ष 100 से अधिक दिनों तक खिंच गया। इस लंबी अवधि ने वैश्विक तेल बाजार को पूरी तरह प्रभावित किया है, जिसका सबसे सीधा और बुरा असर भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर पड़ा है।
यद्यपि सरकार और कंपनियों ने हाल ही में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में कुछ बढ़ोतरी की थी, लेकिन वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों का पूरा बोझ आम उपभोक्ताओं पर डालने में असमर्थ रहीं। इसी 'अंडर-रिकवरी' (लागत से कम पर बिक्री) ने कंपनियों की कमर तोड़ दी है।
ब्रोकरेज फर्म्स के चौंकाने वाले अनुमान
दिग्गज घरेलू और वैश्विक ब्रोकरेज फर्म्स ने तेल कंपनियों को होने वाले नुकसान के जो आंकड़े जारी किए हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं:
जापानी ब्रोकरेज नोमुरा (Nomura): नोमुरा के मुताबिक, तीनों कंपनियों को कुल मिलाकर भारी एबिटा लॉस (EBITDA Loss) होगा। इसमें HPCL को ₹13,900 करोड़, BPCL को ₹15,800 करोड़ और IOCL को ₹17,300 करोड़ का घाटा होने का अनुमान है। नोमुरा का मानना है कि HPCL पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा क्योंकि उसका मार्केटिंग एक्सपोजर काफी अधिक है।
जेएम फाइनेंशियल (JM Financial): इस घरेलू ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि कुल नुकसान ₹47,700 करोड़ तक पहुंच सकता है। इसके मुताबिक, HPCL को ₹17,300 करोड़, IOCL को ₹17,200 करोड़ और BPCL को ₹13,200 करोड़ का शुद्ध नुकसान होने की आशंका है।
मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal): इसने तीनों कंपनियों को संयुक्त रूप से ₹36,400 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान जताया है।
एलपीजी सिलेंडर पर घाटा हुआ 7 गुना से ज्यादा!
सबसे चौंकाने वाली स्थिति घरेलू एलपीजी (रसोई गैस) सिलेंडर पर देखने को मिल रही है। नोमुरा के अनुमान के मुताबिक, पहली तिमाही में एलपीजी पर अंडर-रिकवरी बढ़कर ₹560 प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई है, जो कि पिछली तिमाही (Q4) में महज ₹77 प्रति सिलेंडर थी।
जेएम फाइनेंशियल के आंकड़ों के अनुसार, एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी इस तिमाही में बढ़कर ₹25,000 करोड़ के पार पहुंच जाएगी, जो कि पिछली तिमाही में सिर्फ ₹5,000 करोड़ थी। यानी रसोई गैस पर कंपनियों का घाटा सीधे 5 गुना बढ़ गया है।
हर दिन ₹1,380 करोड़ का नुकसान, ₹25 की बढ़ोतरी की जरूरत
मुख्य बिंदु: एनालिस्ट्स के मुताबिक, तेल विपणन कंपनियां इस समय रोजाना ₹1,380 करोड़ का भारी नुकसान सह रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन कंपनियों को अपने मार्केटिंग मार्जिन को केवल बराबर (ब्रेक-इवन) पर लाना है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल ₹25 प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने की आवश्यकता होगी।
फिलहाल, कच्चे तेल के मोर्चे पर जारी यह उबाल भारतीय तेल कंपनियों के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा बन गया है, जिससे पार पाना सरकार और कंपनियों दोनों के लिए बड़ी चुनौती है।